रमन सिंह ने राष्ट्रमंडल संसदीय संघ सम्मेलन में कहा, क्लोज डोर मीटिंग से विधायक खुलकर अपनी बात रखेंगे। इससे नक्सलवाद रुकेगा और लोकतंत्र मजबूत होगा।
रायपुर। राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (CPA) भारत जोन के 11वें सम्मेलन के दूसरे दिन शुक्रवार को बेंगलूरु में देशभर की विधानसभाओं के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष शामिल हुए। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि राज्य में नक्सलवाद की चुनौती से निपटने और विधायकों के मनोभाव को समझने के लिए क्लोज डोर मीटिंग की शुरुआत की गई है। आने वाले समय में इसके परिणाम दिखेंगे और नक्सलवाद जैसी गंभीर समस्या पर रोक लगेगी।
क्लोज डोर मीटिंग क्यों हुई शुरू?
रमन सिंह ने कहा कि विधायक अक्सर सदन में खुलकर बोलने से हिचकते हैं। कई बार राजनीतिक दबाव, विपक्ष की आलोचना या मीडिया की निगाहों के चलते विधायक अपनी बात पूरी तरह नहीं रख पाते। इस स्थिति को देखते हुए विधानसभा में क्लोज डोर मीटिंग्स शुरू की गई हैं, जहां विधायक बिना किसी डर के अपनी राय रख सकते हैं।
उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाना है। जब विधायक बिना झिझक अपनी समस्याएं और सुझाव साझा करेंगे, तो उन पर गंभीरता से विचार किया जा सकेगा।
नक्सलवाद से लड़ाई में मददगार
डॉ. सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद दशकों से एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। कई बार विधायकों को जमीनी स्तर पर ऐसी समस्याएं दिखती हैं, जिन्हें सदन में कह पाना आसान नहीं होता। क्लोज डोर मीटिंग में वे खुलकर अपनी बात रखते हैं, जिससे नक्सल प्रभावित इलाकों की सच्चाई और वास्तविक समस्याएं सामने आती हैं।
उन्होंने विश्वास जताया कि इस पहल से सरकार को नक्सलवाद से निपटने के नए रास्ते मिलेंगे और आने वाले समय में यह समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी।
लोकतंत्र की मजबूती पर जोर
सम्मेलन के दौरान डॉ. सिंह ने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब जनप्रतिनिधि स्वतंत्र रूप से अपनी बात रख सकें। उन्होंने कहा कि जनता की आवाज विधानसभा तक सही रूप में पहुंचे, यही लोकतंत्र का सार है।
उन्होंने क्लोज डोर मीटिंग को लोकतंत्र की सशक्तिकरण प्रक्रिया का हिस्सा बताया। उनका मानना है कि इससे न केवल विधायक, बल्कि जनता का भी विश्वास बढ़ेगा।
राष्ट्रमंडल संसदीय संघ सम्मेलन का महत्व
बेंगलूरु में हो रहे इस सम्मेलन में देशभर से विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष शामिल हुए। इसमें संसदीय परंपराओं को मजबूत करने, विधायकों की भागीदारी बढ़ाने और लोकतांत्रिक संवाद को प्रोत्साहित करने पर चर्चा हुई।
छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष के संबोधन को विशेष महत्व मिला क्योंकि उन्होंने जमीनी मुद्दों और नक्सलवाद जैसी गंभीर चुनौती पर खुलकर विचार रखे।
विधायक और जनता के बीच की खाई होगी कम
रमन सिंह ने कहा कि क्लोज डोर मीटिंग से विधायकों और जनता के बीच की दूरी कम होगी। अक्सर विधायक अपनी समस्याएं या स्थानीय मुद्दे सार्वजनिक मंच पर नहीं रख पाते, लेकिन बंद कमरे की चर्चा में वे न केवल अपनी राय देंगे, बल्कि समाधान के रास्ते भी सुझाएंगे।
उन्होंने कहा कि जब विधायक खुलकर अपने अनुभव साझा करेंगे, तो शासन और प्रशासन के लिए बेहतर नीति बनाना आसान होगा।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास योजनाएं
डॉ. सिंह ने कहा कि नक्सलवाद की जड़ केवल हिंसा नहीं है, बल्कि विकास की कमी भी इसका कारण है। जब विधायकों से सही जानकारी मिलेगी, तो सरकार उन क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार जैसी सुविधाएं तेजी से पहुंचा सकेगी।
उन्होंने कहा कि क्लोज डोर मीटिंग से प्राप्त सुझावों के आधार पर सरकार विकास योजनाओं को और प्रभावी बनाएगी।
पारदर्शिता और विश्वास बढ़ेगा
उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि यह मीटिंग क्लोज डोर है, लेकिन इसका परिणाम पूरी तरह पारदर्शी होगा। जनता को इसका लाभ सीधे मिलेगा। जब विधायक स्वतंत्र रूप से अपनी बात रखेंगे, तो शासन-प्रशासन और जनता के बीच विश्वास का पुल मजबूत होगा।
भविष्य की दिशा
सम्मेलन के अंत में डॉ. सिंह ने कहा कि आने वाले वर्षों में इस तरह की बैठकें नियमित होंगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि छत्तीसगढ़ विधानसभा की यह पहल देश की अन्य विधानसभाओं के लिए भी एक मॉडल साबित होगी।
निष्कर्ष
बेंगलूरु सम्मेलन में रमन सिंह के विचारों ने एक नया दृष्टिकोण सामने रखा है। क्लोज डोर मीटिंग्स की यह पहल विधायकों की आवाज को और मजबूती देगी। इससे न केवल नक्सलवाद जैसी समस्या का समाधान निकलेगा बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को और सशक्त बनाने की दिशा में यह कदम मील का पत्थर साबित होगा।








