सिलहाटी में उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने डिजिटल कक्षा में छात्रों संग बैठकर ‘आंख की संरचना’ सीखी। आधुनिक शिक्षा प्रणाली से प्रभावित होकर स्कूल मॉडल की सराहना की।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम देखने को मिला, जब उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने सिलहाटी के सरकारी स्कूल में डिजिटल कक्षा का अनुभव एक सामान्य छात्र की तरह किया।
स्कूल पहुंचे उपमुख्यमंत्री न केवल बच्चों के साथ बैठे बल्कि एक पूरी कक्षा डिजिटल बोर्ड से पढ़ाई भी की। शिक्षक ने स्मार्ट बोर्ड के माध्यम से आंख की संरचना (Structure of Eye) पढ़ाई, जिसे उपमुख्यमंत्री ने बच्चों के साथ रुचि लेकर सीखा।
स्कूल में उत्साह, छात्रों में बढ़ा जोश
उपमुख्यमंत्री के आगमन की जानकारी मिलते ही स्कूल परिसर में उत्साह फैल गया।
छात्रों ने उनका स्वागत किया और आधुनिक डिजिटल कक्षा की सुविधाएँ दिखाईं।
कक्षा में प्रवेश करते ही उपमुख्यमंत्री ने कहा—
“आज मैं आपकी क्लास का स्टूडेंट बनकर बैठूंगा।”
इस पर छात्रों में खुशी की लहर दौड़ गई।
डिजिटल बोर्ड पर रोचक तरीके से पढ़ाई
शिक्षक ने डिजिटल बोर्ड पर आंख की संरचना का 3D मॉडल दिखाया।
- कॉर्निया
- पुतली (Pupil)
- रेटिना
- ऑप्टिक नर्व
—की भूमिका को एनिमेशन के माध्यम से समझाया गया।
उपमुख्यमंत्री इस पढ़ाई शैली से प्रभावित दिखे और बीच-बीच में प्रश्न भी पूछते रहे।
उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यम बच्चों की समझ को तेज बनाने में सहायक है और यह तकनीक ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा को नई ताकत देगी।
उपमुख्यमंत्री ने बच्चों से की बातचीत
कक्षा समाप्त होने के बाद उपमुख्यमंत्री ने छात्रों से पूछा कि डिजिटल कक्षा में पढ़ाई उन्हें कैसी लगती है।
बच्चों ने कहा कि—
- विषय जल्दी समझ आता है
- कठिन अवधारणाएँ भी आसान हो जाती हैं
- चित्र और वीडियो से सीखना मजेदार लगता है
उपमुख्यमंत्री ने बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि तकनीक का सही इस्तेमाल उनकी पढ़ाई को और मजबूत करेगा।
सिलहाटी स्कूल में डिजिटल बदलाव
यह सरकारी स्कूल आधुनिक सुविधाओं से लैस है।
यहाँ—
- स्मार्ट बोर्ड
- हाई-रिज़ॉल्यूशन प्रोजेक्टर
- तेज इंटरनेट
- ई-कॉन्टेंट
- वर्चुअल लैब
जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
इनका उपयोग विज्ञान, गणित, सामाजिक अध्ययन और भाषा की कक्षाओं में किया जाता है।
शिक्षकों की भूमिका भी सराही
उपमुख्यमंत्री ने शिक्षकों की मेहनत और नवाचार की सराहना करते हुए कहा कि डिजिटल शिक्षा तभी सफल होगी जब शिक्षक तकनीक का उपयोग समझदारी और रचनात्मक तरीके से करें।
उन्होंने शिक्षकों से अनुरोध किया कि वे इस मॉडल को अन्य स्कूलों में भी साझा करें।
ग्रामीण शिक्षा में बड़ा परिवर्तन
सिलहाटी जैसे गांवों में डिजिटल कक्षा का सफल कार्यान्वयन यह दिखाता है कि शिक्षा का डिजिटल रूपांतरण केवल शहरों तक सीमित नहीं है।
सरकारी योजनाओं के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में—
- स्मार्ट क्लास
- टैबलेट वितरण
- डिजिटल कंटेंट
- शिक्षक प्रशिक्षण
जैसी पहलें बढ़ाई जा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल छत्तीसगढ़ के अधिक स्कूलों में लागू किया गया तो विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता कई गुना बढ़ सकती है।
उपमुख्यमंत्री का संदेश: तकनीक + शिक्षा = भविष्य
अवलोकन के दौरान उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा—
“डिजिटल शिक्षा बच्चों के भविष्य को मजबूत करने का सबसे आधुनिक साधन है। सरकार का प्रयास है कि हर सरकारी स्कूल में स्मार्ट कक्षाएं उपलब्ध हों।”
उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में—
- और अधिक डिजिटल बोर्ड
- कंप्यूटर लैब
- वर्चुअल साइंस मॉड्यूल
- करियर गाइडेंस पोर्टल
स्कूलों में उपलब्ध कराए जाएंगे।
स्थानीय लोगों में गर्व का माहौल
गांव के जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों और ग्रामीणों ने कहा कि उपमुख्यमंत्री का स्कूल आना और बच्चों के बीच बैठकर पढ़ना एक ऐतिहासिक क्षण है।
इससे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ा है और पढ़ाई के प्रति उत्साह में वृद्धि हुई है।
सिलहाटी मॉडल को राज्यभर में लागू करने की तैयारी
शिक्षा विभाग इस मॉडल को सफल मानते हुए इसे अन्य जिलों में लागू करने की योजना बना रहा है।
डिजिटल शिक्षा प्रोजेक्ट के तहत जल्द ही नई तकनीक और उन्नत संसाधन भी स्कूलों तक पहुंचाए जाएंगे।








