छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने घोषणा की है कि छत्तीसगढ़ विधानसभा के आगामी शीतकालीन सत्र में UCC बिल पेश किया जाएगा और इसे लागू किया जाएगा। यह कदम भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रमुख चुनावी वादों में से एक को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य देश में ‘एक देश, एक कानून’ के सिद्धांत को स्थापित करना है।
क्या हुआ
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने यह महत्वपूर्ण घोषणा हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में विधायी प्रक्रिया शीतकालीन सत्र से शुरू की जाएगी। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब देश भर में UCC को लेकर बहस तेज है और कुछ अन्य भाजपा शासित राज्य भी इसे लागू करने की दिशा में विचार कर रहे हैं या कर चुके हैं, जैसे उत्तराखंड। मुख्यमंत्री के इस बयान से छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल मच गई है और इसे 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद राज्य सरकार का एक बड़ा नीतिगत फैसला माना जा रहा है। इस ऐलान के साथ ही छत्तीसगढ़ उन राज्यों की सूची में शामिल होने की ओर बढ़ रहा है जो समान कानून की अवधारणा को मूर्त रूप देने का प्रयास कर रहे हैं।
समान नागरिक संहिता (UCC) क्या है?
समान नागरिक संहिता (UCC) का अर्थ है भारत में रहने वाले सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, विरासत, गोद लेने और गुजारा भत्ता जैसे व्यक्तिगत मामलों को नियंत्रित करने वाले कानूनों का एक समान सेट। वर्तमान में, इन मामलों को विभिन्न धर्मों और समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों द्वारा नियंत्रित किया जाता है, जैसे हिंदू मैरिज एक्ट, मुस्लिम पर्सनल लॉ, क्रिश्चियन मैरिज एक्ट आदि। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों के तहत समान नागरिक संहिता को लागू करने का प्रावधान है, जिसमें कहा गया है कि “राज्य भारत के समस्त राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान सिविल संहिता प्राप्त कराने का प्रयास करेगा।” UCC का मुख्य उद्देश्य धर्म, लिंग और जाति के आधार पर भेदभाव को समाप्त कर लैंगिक समानता और न्याय सुनिश्चित करना है, जिससे सभी नागरिकों को बिना किसी धार्मिक या सामुदायिक भिन्नता के समान कानूनी अधिकार मिल सकें।
राजनीतिक और सामाजिक निहितार्थ
छत्तीसगढ़ में UCC लागू करने का निर्णय राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर दूरगामी परिणाम वाला हो सकता है। राजनीतिक रूप से, यह भाजपा के कोर एजेंडे का हिस्सा रहा है और इसे 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी की जीत के बाद एक बड़े वादे को पूरा करने के रूप में देखा जाएगा। यह कदम अन्य राज्यों को भी UCC लागू करने के लिए प्रेरित कर सकता है, खासकर उन राज्यों को जहां भाजपा सत्ता में है। सामाजिक स्तर पर, UCC का कार्यान्वयन विभिन्न समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों को प्रभावित करेगा, जिससे समाज के कुछ वर्गों में समर्थन और कुछ में विरोध देखने को मिल सकता है। इस पहल से महिलाओं के अधिकारों और लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि यह सभी व्यक्तिगत कानूनों में समानता लाएगी और उन्हें एक समान कानूनी ढाँचे के तहत लाएगी। हालांकि, विपक्षी दल और कुछ अल्पसंख्यक संगठन इस पर विरोध जता सकते हैं, यह तर्क देते हुए कि यह धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है या विविधता को कम करता है।
आगे क्या
अब सबकी निगाहें छत्तीसगढ़ विधानसभा के आगामी शीतकालीन सत्र पर टिकी हैं। सरकार को UCC विधेयक का मसौदा तैयार करना होगा, जिसमें सभी हितधारकों – कानूनी विशेषज्ञों, धार्मिक नेताओं, सामाजिक संगठनों और आम जनता – के साथ व्यापक परामर्श की आवश्यकता होगी। विधेयक को विधानसभा में पेश किया जाएगा, जहाँ इस पर गहन बहस और चर्चा होने की संभावना है। विपक्षी दल निश्चित रूप से इस विधेयक के विभिन्न पहलुओं पर सवाल उठाएंगे और संशोधनों की मांग कर सकते हैं। विधेयक के पारित होने के बाद, इसे राज्यपाल की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद यह कानून बन जाएगा। छत्तीसगढ़ उत्तराखंड के बाद दूसरा राज्य होगा जो समान नागरिक संहिता को लागू करेगा, और यह देश के संघीय ढांचे में एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम करेगा। इस पूरे घटनाक्रम पर राष्ट्रीय स्तर पर भी नजर रखी जाएगी, क्योंकि यह भविष्य में पूरे देश में UCC लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है और केंद्र सरकार के लिए एक मिसाल पेश कर सकता है।




