स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षकों और विद्यार्थियों की ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य कर दी है, जिससे पारदर्शिता और शिक्षण व्यवस्था में सुधार होगा।
रायपुर। स्कूल शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और अनुशासन बढ़ाने के उद्देश्य से स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षकों और विद्यार्थियों की ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य कर दी है। विभाग द्वारा इस संबंध में सभी जिलों के लिए स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं। नए निर्देशों के तहत अब स्कूलों में उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की जाएगी।
शिक्षा विभाग का कहना है कि इस व्यवस्था से स्कूलों की निगरानी बेहतर होगी और शिक्षण व्यवस्था में सुधार आएगा।
डिजिटल माध्यम से होगी उपस्थिति दर्ज
नए निर्देशों के अनुसार शिक्षक और विद्यार्थी दोनों की दैनिक उपस्थिति ऑनलाइन पोर्टल या निर्धारित मोबाइल एप के माध्यम से दर्ज की जाएगी। इससे मैनुअल रजिस्टर पर निर्भरता कम होगी और डेटा की पारदर्शिता बढ़ेगी।
स्कूलों को दिए गए स्पष्ट निर्देश
विभाग ने सभी शासकीय और अनुदान प्राप्त स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि वे निर्धारित समयसीमा के भीतर ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली को लागू करें। तकनीकी व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन की होगी।
शिक्षण व्यवस्था में आएगा सुधार
अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन उपस्थिति से शिक्षकों की नियमितता सुनिश्चित होगी और विद्यार्थियों की उपस्थिति पर भी नजर रखी जा सकेगी। इससे पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है।
निगरानी और मूल्यांकन होगा आसान
डिजिटल उपस्थिति डेटा के माध्यम से जिला और राज्य स्तर पर स्कूलों की निगरानी आसान होगी। अनुपस्थित शिक्षकों और विद्यार्थियों की जानकारी तुरंत उपलब्ध हो सकेगी।
प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता
शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों को ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली के उपयोग के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। जहां नेटवर्क या तकनीकी समस्या होगी, वहां समाधान के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
अभिभावकों के लिए भी लाभ
ऑनलाइन प्रणाली से अभिभावकों को भी अपने बच्चों की उपस्थिति की जानकारी समय पर मिल सकेगी। इससे बच्चों की पढ़ाई और अनुशासन पर बेहतर निगरानी संभव होगी।
पारदर्शिता की दिशा में कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में सहायक होगा।
जल्द होगा पूर्ण क्रियान्वयन
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्देशों का पालन अनिवार्य होगा और लापरवाही पाए जाने पर संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
स्कूल शिक्षा विभाग का यह निर्णय डिजिटल शिक्षा और प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।








