मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रायपुर में गोवर्धन पूजा पर गौपूजन किया, गौसेवकों को सम्मानित किया और प्रदेश की सुख-समृद्धि व पर्यावरण संरक्षण की कामना की।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बुधवार को राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास की गौशाला में गोवर्धन पूजा के पावन अवसर पर विधि-विधानपूर्वक गौपूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने गौमाता को खिचड़ी खिलाकर गोसेवा की परंपरा निभाई और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति एवं खुशहाली की मंगलकामना की।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि “गोवर्धन पूजा प्रकृति, गौवंश और पर्यावरण के प्रति आभार व्यक्त करने का पावन पर्व है। यह हमें याद दिलाता है कि मनुष्य का जीवन प्रकृति और पशुधन के बिना अधूरा है।” उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों को गोवर्धन पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं दीं और इस पर्व को संवेदनशीलता, कृतज्ञता और संरक्षण का प्रतीक बताया।

गौपूजन और गोसेवकों का सम्मान
पूजन-अर्चना के पश्चात मुख्यमंत्री ने गौशाला में सेवा कर रहे गौसेवकों को अपने हाथों से मिठाई खिलाकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि गौसेवा केवल धार्मिक कृत्य नहीं, बल्कि यह हमारी संस्कृति की आत्मा है। उन्होंने सभी नागरिकों से गौवंश की रक्षा एवं संरक्षण में सक्रिय भागीदारी का आग्रह किया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने गौशाला की व्यवस्थाओं का निरीक्षण भी किया। गौसेवकों ने उन्हें बताया कि गौवंश की देखभाल और पोषण के लिए आवश्यक सभी व्यवस्थाएं मौजूद हैं। मुख्यमंत्री साय ने इस समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि “गौसेवा के माध्यम से हम केवल पशुधन की नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक और आर्थिक जड़ों की भी रक्षा करते हैं।”
गाय: भारतीय संस्कृति की आधारशिला
मुख्यमंत्री साय ने अपने उद्बोधन में कहा कि गाय भारतीय संस्कृति की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि गाय हमारे ग्रामीण जीवन, अर्थव्यवस्था और आस्था – तीनों का केंद्र है।
“गाय केवल पूजनीय नहीं, बल्कि हमारे जीवन की ऊर्जा, हमारी कृषि की साथी और हमारी आत्मनिर्भरता की प्रतीक है। गौमाता के प्रति सम्मान हमारी समृद्ध संस्कृति का प्रतिबिंब है।”
उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ की मिट्टी में गोसेवा और प्रकृति पूजन की भावना गहराई से रची-बसी है। यहां के लोग अन्न, जल, धरती और गाय को जीवन का स्रोत मानते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम गाय, अन्न और धरती का सम्मान करते हैं, तब हम अपनी संस्कृति की जड़ों को नमन करते हैं।
ग्राम विकास में गौसेवा की भूमिका
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार गोसेवा को ग्रामीण विकास की धुरी बनाने के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि गौसंवर्धन, जैविक खेती और पर्यावरण संरक्षण को जोड़कर ग्राम अर्थव्यवस्था को सशक्त किया जा रहा है। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं, बल्कि ग्रामीणों में आत्मनिर्भरता की भावना भी सशक्त हो रही है।
साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में परंपरागत गोशालाओं और गौठानों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है। उन्होंने कहा,
“हमारा उद्देश्य है कि हर गांव में गौवंश की सेवा और संरक्षण के साथ आर्थिक सशक्तिकरण का मॉडल तैयार किया जाए। गाय केवल श्रद्धा की प्रतीक नहीं, बल्कि सतत विकास की कुंजी है।”
गोवर्धन पूजा का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संदेश
गोवर्धन पूजा भारतीय संस्कृति का एक ऐसा पर्व है जो मनुष्य और प्रकृति के सहअस्तित्व का प्रतीक है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत की पूजा के रूप में आरंभ हुआ, जब उन्होंने लोगों को प्रकृति और पशुधन के प्रति कृतज्ञ होने का संदेश दिया।
मुख्यमंत्री साय ने इसी भावना को दोहराते हुए कहा कि हमें आधुनिक जीवन में भी प्रकृति और पर्यावरण के साथ संतुलन बनाए रखना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे पशुधन संरक्षण, जैविक खेती, जल संरक्षण और वृक्षारोपण जैसे कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लें।
कार्यक्रम की विशेष झलकियाँ
- मुख्यमंत्री ने गौमाता को खिचड़ी खिलाकर पारंपरिक गोसेवा की।
- गौशाला में दीप प्रज्वलन, फूलों से सजावट और भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ।
- गौसेवकों को सम्मानित किया गया और सभी को प्रसाद वितरित किया गया।
- मुख्यमंत्री ने बच्चों को गायों की सेवा के महत्व पर समझाया।
- पूरे परिसर में हरियाली और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया गया।
मुख्यमंत्री का संदेश
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा,
“गाय, अन्न और धरती का सम्मान करना उस मातृशक्ति को प्रणाम करना है जिससे हमारा जीवन जुड़ा है। जब हम इन्हें नमन करते हैं, तब हम अपनी संस्कृति की आत्मा को स्पर्श करते हैं।”
उन्होंने विश्वास जताया कि छत्तीसगढ़ में गौसंवर्धन, ग्रामीण विकास और पर्यावरण संरक्षण के कार्य निरंतर आगे बढ़ते रहेंगे और इससे प्रदेश की समृद्धि में नई ऊर्जा का संचार होगा।
निष्कर्ष
गोवर्धन पूजा के इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का गौपूजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति, पशुधन और मानव जीवन के पारस्परिक संबंधों की पुनर्स्थापना का प्रतीक रहा। इस आयोजन ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को एक बार फिर जीवंत कर दिया।
मुख्यमंत्री की यह पहल राज्य में गौसंवर्धन और ग्राम स्वावलंबन की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम है, जो आने वाले समय में पर्यावरण-संरक्षण और ग्रामीण समृद्धि का नया अध्याय लिखेगा।








