आज सोमवार, 8 जून को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई, जहाँ सेंसेक्स 500 अंक से अधिक लुढ़क कर 73,700 के स्तर पर आ गया, वहीं निफ्टी भी लगभग 200 अंक गिरकर 23,200 पर कारोबार कर रहा था। मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कमजोर वैश्विक बाजार संकेतों के कारण निवेशकों में घबराहट का माहौल देखा गया, जिससे बाजार में चौतरफा बिकवाली हावी रही। विशेष रूप से IT, मेटल और रियल्टी जैसे क्षेत्रों के शेयरों में सबसे अधिक दबाव देखा गया।
भारतीय बाजार में बड़ी गिरावट
आज के ट्रेडिंग सत्र में भारतीय शेयर बाजार ने एक मजबूत नकारात्मक शुरुआत की। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स लगभग 500 अंक (0.70%) की गिरावट के साथ 73,700 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी भी लगभग 200 अंक (0.80%) गिरकर 23,200 के महत्वपूर्ण स्तर पर आ गया। बाजार की इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते सैन्य टकराव को माना जा रहा है, जिसने वैश्विक निवेशकों की धारणा को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। IT कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई, साथ ही मेटल और रियल्टी सेक्टर भी दबाव में रहे, जिससे निवेशकों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा।
मिडिल ईस्ट तनाव बना मुख्य कारण
बाजार में इस गिरावट का प्रमुख कारण मिडिल ईस्ट में अचानक से बढ़ा भू-राजनीतिक तनाव है। अप्रैल में सीजफायर के बाद यह पहली बार हुआ जब ईरान ने इजराइल पर मिसाइल हमला किया। इसके जवाब में, इजराइल ने सोमवार तड़के पश्चिमी और मध्य ईरान में सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमला किया, जिससे तेहरान, तबरीज और इस्फहान जैसे शहरों में धमाकों की खबरें आईं। इस घटनाक्रम ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव की आशंकाओं ने निवेशकों को जोखिम भरी संपत्तियों से दूर रहने पर मजबूर कर दिया है। इस तरह के भू-राजनीतिक तनाव हमेशा से ही वैश्विक वित्तीय बाजारों के लिए एक प्रमुख जोखिम रहे हैं।
वैश्विक बाजारों पर भी दिखा असर
भारतीय बाजारों पर पड़ने वाले दबाव में कमजोर वैश्विक संकेतों का भी बड़ा हाथ रहा। सोमवार को एशियाई शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखी गई। दक्षिण कोरिया का KOSPI इंडेक्स 375 अंक (4.49%) गिरकर 7,768 के स्तर पर आ गया। वहीं, जापान का Nikkei इंडेक्स 2,548 अंक (3.83%) की भारी गिरावट के साथ 64,040 पर कारोबार कर रहा था। हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स भी 262 अंक (1.01%) गिरकर 24,700 के स्तर पर आ गया। एशियाई बाजारों से पहले, अमेरिकी शेयर बाजार भी दबाव में बंद हुए थे। डॉव जोन्स 695 अंक (1.35%) गिरकर 50,867 पर, जबकि नैस्डैक में 1,122 अंक (4.18%) की भारी गिरावट दर्ज की गई और यह 25,709 पर बंद हुआ। S&P 500 इंडेक्स भी 201 अंक (2.64%) गिरकर 7,384 पर बंद हुआ। यह दर्शाता है कि वैश्विक स्तर पर निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं।
FIIs की बिकवाली और DIIs का सहारा
भारतीय बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs/FPIs) की बिकवाली का सिलसिला लगातार जारी है, जो बाजार पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है। 5 जून को FIIs ने 8,776 करोड़ रुपये की शुद्ध बिक्री की। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 9,134 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी करके बाजार को कुछ सहारा दिया। पिछले 30 दिनों के आंकड़ों पर गौर करें तो, FIIs ने कुल 76,006 करोड़ रुपये की शुद्ध बिक्री की है, जबकि DIIs ने 95,209 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी करके बाजार को एक बड़ी गिरावट से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी ने विदेशी बिकवाली के प्रभाव को कुछ हद तक कम किया है, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव का असर इतना गहरा है कि यह घरेलू समर्थन को भी चुनौती दे रहा है।
आगे क्या
आने वाले दिनों में शेयर बाजार की दिशा काफी हद तक मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक स्थिति और वैश्विक बाजारों के रुख पर निर्भर करेगी। यदि ईरान और इजराइल के बीच तनाव बढ़ता रहा, तो बाजार में और अधिक अस्थिरता और गिरावट देखने को मिल सकती है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे सावधानी बरतें और किसी भी बड़े निवेश से पहले बाजार की स्थिति का गहन विश्लेषण करें। कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक मुद्रास्फीति और केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियां भी बाजार की आगे की चाल तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।




