राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हाल ही में नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित एक गरिमापूर्ण समारोह में पद्मश्री अनूप रंजन को वर्ष 2022 के लिए प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया। यह सम्मान उन्हें छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक कला और संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन तथा उसे राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर पहुंचाने में उनके उत्कृष्ट और आजीवन योगदान के लिए प्रदान किया गया है। इस सम्मान से न केवल अनूप रंजन के कलात्मक सफर को नई पहचान मिली है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की विशिष्ट लोक संस्कृति को भी राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करता है।
सम्मान का महत्व और पृष्ठभूमि
संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार भारत में प्रदर्शन कलाओं के क्षेत्र में दिया जाने वाला सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान है। यह पुरस्कार संगीत, नृत्य और नाटक के क्षेत्र में कलाकारों, गुरुओं और विद्वानों के असाधारण योगदान को मान्यता देता है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तहत स्थापित संगीत नाटक अकादमी द्वारा प्रतिवर्ष ये पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं, जो भारतीय कला जगत में अत्यंत प्रतिष्ठित माने जाते हैं। अनूप रंजन को यह सम्मान मिलना उनकी दशकों की तपस्या और लोक कला के प्रति उनके अटूट समर्पण का परिणाम है। उन्हें इससे पहले 2019 में कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से भी नवाजा जा चुका है, जो उनके बहुमुखी प्रतिभा और अथक प्रयासों का प्रमाण है। यह पुरस्कार समारोह भारतीय कला और संस्कृति के विविध रूपों को प्रोत्साहित करने और उन्हें सम्मान देने की राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
अनूप रंजन का योगदान और छत्तीसगढ़ की लोक कला
पद्मश्री अनूप रंजन ने अपना पूरा जीवन छत्तीसगढ़ की लोक कलाओं के उत्थान और प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर दिया है। उन्होंने छत्तीसगढ़ी लोक नृत्य, संगीत, नाटक और लोककथाओं को मंच पर लाने और उन्हें समकालीन दर्शकों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके प्रयासों से राज्य की कई लुप्तप्राय लोक कला शैलियों को पुनर्जीवित किया गया है। उन्होंने न केवल इन कला रूपों का प्रदर्शन किया, बल्कि उनके लेखन, निर्देशन और प्रशिक्षण के माध्यम से नई पीढ़ी के कलाकारों को भी प्रेरित किया। अनूप रंजन ने छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में घूम-घूमकर लोक कलाओं के विभिन्न रूपों जैसे पंडवानी, नाचा, करमा, सुआ और पंथी नृत्य का गहन अध्ययन किया और उन्हें एक संरचित रूप दिया। उन्होंने कई लोक नाटकों और संगीत रचनाओं का सृजन किया, जो स्थानीय कहानियों, मिथकों और सामाजिक संदेशों को कलात्मक ढंग से प्रस्तुत करते हैं। उनके कार्य ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने और उसे राष्ट्रीय मानचित्र पर लाने में अमूल्य योगदान दिया है। उनका मानना है कि लोक कलाएं केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि किसी भी समाज की आत्मा और उसकी सदियों पुरानी परंपराओं का जीवंत प्रतीक होती हैं।
कला जगत में प्रेरणा और भविष्य
अनूप रंजन जैसे कलाकारों को मिलने वाला यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत प्रयासों को मान्यता देता है, बल्कि देश भर के उन हजारों लोक कलाकारों को भी प्रेरित करता है जो गुमनामी में रहकर अपनी कला को जीवित रखने का प्रयास कर रहे हैं। यह पुरस्कार युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने और भारतीय कला परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करेगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस अवसर पर कलाकारों के समर्पण और त्याग की सराहना करते हुए कहा कि कला संस्कृति किसी भी राष्ट्र की पहचान होती है। उन्होंने कला को समाज में सद्भाव और एकता स्थापित करने का एक शक्तिशाली माध्यम बताया। अनूप रंजन का यह सम्मान छत्तीसगढ़ की लोक कलाओं को और अधिक राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने में सहायक होगा, जिससे इन कला रूपों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने के नए अवसर खुलेंगे। उम्मीद है कि इस तरह के सम्मान कला और संस्कृति के क्षेत्र में और अधिक शोध, संरक्षण और नवाचार को बढ़ावा देंगे, जिससे भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित रहेगी।







