पहाड़ी कोरवा समुदाय की शाम कुमारी ने संघर्षों के बीच अपने सपनों को उड़ान दी, सरकारी सहयोग से आगे बढ़कर समाज के लिए प्रेरणा बनीं।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा समुदाय से आने वाली बेटी शाम कुमारी आज अपने सपनों को साकार करने की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ा रही हैं। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें नई पहचान दिलाई है।
शाम कुमारी का जीवन संघर्षों से भरा रहा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। बचपन से ही शिक्षा के प्रति उनका रुझान रहा और उन्होंने हर परिस्थिति में पढ़ाई जारी रखी। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा और निरंतर प्रयास करती रहीं।
सरकारी योजनाओं और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से शाम कुमारी को आगे बढ़ने का अवसर मिला। उन्हें शिक्षा, छात्रवृत्ति और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए, जिससे उनके सपनों को नई उड़ान मिली। अब वे न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।
शाम कुमारी का कहना है कि यदि मन में दृढ़ संकल्प हो, तो कोई भी कठिनाई रास्ता नहीं रोक सकती। उन्होंने बताया कि वे आगे चलकर अपने समुदाय के बच्चों के लिए कुछ करना चाहती हैं, ताकि उन्हें भी बेहतर शिक्षा और अवसर मिल सकें।
स्थानीय लोगों और अधिकारियों ने भी उनकी उपलब्धियों की सराहना की है। उनका मानना है कि शाम कुमारी जैसी बेटियां समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखती हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि सही दिशा और सहयोग मिलने पर हर व्यक्ति अपने सपनों को पूरा कर सकता है।
पहाड़ी कोरवा समुदाय, जो अब तक विकास की मुख्यधारा से दूर रहा है, वहां से निकलकर शाम कुमारी का आगे बढ़ना एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। यह कहानी न केवल संघर्ष और सफलता की है, बल्कि यह भी दिखाती है कि शिक्षा और अवसर किसी भी जीवन को बदल सकते हैं।
शाम कुमारी की यह उपलब्धि राज्य में महिला सशक्तिकरण और जनजातीय विकास की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। आने वाले समय में उनसे और भी बड़ी सफलताओं की उम्मीद की जा रही है।






