रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने लघु वनोपजों के माध्यम से आत्मनिर्भरता और हरित विकास का रोडमैप प्रस्तुत किया, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी।
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम उठाते हुए लघु वनोपजों पर केंद्रित हरित विकास का नया रोडमैप तैयार किया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में इस योजना के तहत वनोपज आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने, वन उत्पादों के मूल्य संवर्धन और ग्रामीणों की आय में वृद्धि पर विस्तृत चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “छत्तीसगढ़ की पहचान वन संपदा से है और राज्य के विकास की असली ताकत हमारे लघु वनोपज संग्राहक और वनवासी भाई-बहन हैं। सरकार का लक्ष्य उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और उनकी आजीविका को सुरक्षित करना है।”
हरित विकास का नया दृष्टिकोण
बैठक में ‘हरित विकास रोडमैप 2025’ को स्वीकृति दी गई, जिसके तहत लघु वनोपजों के संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन को संगठित और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि वनोपजों के माध्यम से ग्रामीण समुदाय को स्थायी आय, रोजगार और पर्यावरणीय संरक्षण — तीनों लाभ एक साथ प्राप्त हों।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि लघु वनोपजों का वैज्ञानिक और व्यावसायिक उपयोग राज्य की आर्थिक आत्मनिर्भरता की कुंजी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि संग्रहण केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाए और उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की योजना तैयार की जाए।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती
राज्य के वनांचल क्षेत्रों में तेंदूपत्ता, महुआ, साल बीज, हर्रा, बहेड़ा, इमली और चार जैसी लघु वनोपजें ग्रामीणों की आजीविका का मुख्य साधन हैं। सरकार इन उत्पादों के मूल्यवर्धन के लिए ‘वन धन केंद्रों’ को सशक्त बना रही है।
वन मंत्री ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में 150 से अधिक नए वन धन केंद्रों की स्थापना की जाएगी। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को न केवल वनोपज के उचित दाम मिलेंगे, बल्कि उन्हें प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का सपना तभी साकार होगा जब गांव और वन क्षेत्र के लोग आर्थिक रूप से सशक्त बनेंगे। उन्होंने कहा —
“लघु वनोपज सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि यह गांव की अर्थव्यवस्था और संस्कृति की रीढ़ है। हमारा उद्देश्य है कि हर संग्राहक को उसके परिश्रम का सही मूल्य मिले और वन उत्पादों से जुड़ा हर परिवार समृद्ध हो।”
सरकार ने निर्णय लिया है कि लघु वनोपजों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सुनिश्चित करने के लिए विशेष फंड बनाया जाएगा। साथ ही, इन उत्पादों के ऑनलाइन मार्केट प्लेटफॉर्म तैयार किए जाएंगे ताकि पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहे।
पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा आर्थिक विकास
‘हरित विकास रोडमैप’ केवल आर्थिक सुधार का नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन का भी दस्तावेज है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। लघु वनोपजों से जुड़ी गतिविधियां वनों के संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी के प्रयासों को भी समर्थन देंगी।
उन्होंने कहा, “हमारा विकास मॉडल ऐसा होगा जो प्रकृति के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि सहअस्तित्व और सहयोग पर आधारित होगा। यही सच्चा हरित विकास है।”
महिला स्व-सहायता समूहों को मिलेगा नया अवसर
बैठक में निर्णय लिया गया कि लघु वनोपजों के प्रसंस्करण और पैकेजिंग कार्य में महिला स्व-सहायता समूहों (SHGs) को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होंगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन होगा।
महिला समूहों को उत्पाद निर्माण के लिए लोन, मशीनरी और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही, “छत्तीसगढ़ हर्बल” और “वन उत्पाद ब्रांड” के अंतर्गत इन उत्पादों की मार्केटिंग राज्य और देशभर में की जाएगी।
डिजिटलीकरण और पारदर्शिता की पहल
मुख्यमंत्री ने कहा कि वनोपज खरीद और वितरण की पूरी प्रक्रिया अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर की जाएगी। इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और संग्राहकों को सीधा लाभ मिलेगा।
वन विभाग ने बताया कि “e-Vanopaj Portal” पर सभी लेनदेन ऑनलाइन होंगे। संग्राहक अपने मोबाइल से रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे और उत्पाद की बिक्री का भुगतान सीधे बैंक खाते में प्राप्त करेंगे।
नवाचार और निवेश को प्रोत्साहन
सरकार ने यह भी तय किया कि राज्य में वनोपज आधारित लघु उद्योगों को बढ़ावा दिया जाएगा। निजी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए विशेष नीति तैयार की जा रही है। इससे न केवल ग्रामीणों को रोजगार मिलेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ वन उत्पाद निर्यात का प्रमुख केंद्र भी बनेगा।
वन मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है — “वन से विकास और वनवासी से समृद्धि”। उन्होंने बताया कि आने वाले दो वर्षों में लगभग 10,000 लोगों को वनोपज आधारित उद्योगों में रोजगार देने का लक्ष्य है।
भविष्य की दृष्टि
‘हरित विकास रोडमैप’ का उद्देश्य है कि 2027 तक राज्य की वन अर्थव्यवस्था में 25% की वृद्धि हो। साथ ही, प्रत्येक वन पंचायत में स्थायी आजीविका केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा —
“हमारा सपना है कि छत्तीसगढ़ के जंगलों में बसने वाला हर व्यक्ति न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हो, बल्कि अपने पर्यावरण की रक्षा करते हुए गर्व से कह सके — ‘हम आत्मनिर्भर हैं।’”
इस पहल से छत्तीसगढ़ न केवल हरित विकास का नया मॉडल पेश करेगा, बल्कि यह देशभर में सतत और समावेशी विकास का उदाहरण बनेगा।








