शुक्रवार को देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी गई, जिसके बाद प्रमुख शहरों में ईंधन के दाम बढ़ गए हैं। इस मूल्य वृद्धि पर टिप्पणी करते हुए, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के निदेशक (रिफाइनरीज) अरविंद कुमार ने इसे ‘बहुत मामूली वृद्धि’ करार दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि रिफाइनियां निर्बाध ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 100% से अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं, ताकि उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार की कमी का सामना न करना पड़े। यह वृद्धि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण उत्पन्न वैश्विक दबाव के बीच हुई है, जिसे सरकारी तेल विपणन कंपनियां (OMCs) पिछले 11 हफ्तों से वहन कर रही थीं।
देशभर में ईंधन की नई कीमतें
इस मूल्य वृद्धि के बाद, राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये से बढ़कर 97.77 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जबकि डीजल 87.67 रुपये से बढ़कर 90.67 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है। अन्य महानगरों में भी इसी तरह का संशोधन देखा गया है। कोलकाता में पेट्रोल की कीमत में 3.29 रुपये की बढ़ोतरी के साथ यह 108.74 रुपये प्रति लीटर हो गया है। वहीं, चेन्नई में पेट्रोल 2.83 रुपये महंगा होकर 103.67 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल की कीमतें 3.14 रुपये बढ़कर 106.68 रुपये प्रति लीटर हो गई हैं।
डीजल की कीमतों में भी प्रमुख शहरों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मुंबई में डीजल 3.11 रुपये की वृद्धि के बाद 93.14 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है। कोलकाता में भी डीजल की दरों में इतनी ही बढ़ोतरी हुई और यह 95.13 रुपये प्रति लीटर हो गया। चेन्नई में डीजल की कीमतें 2.86 रुपये बढ़कर 95.25 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह बढ़ोतरी राज्य-दर-राज्य भिन्न हो सकती है, क्योंकि स्थानीय करों और वैट का प्रभाव अलग-अलग होता है, जिससे अंतिम उपभोक्ता मूल्य प्रभावित होता है।
इंडियन ऑयल निदेशक की प्रतिक्रिया और आपूर्ति का आश्वासन

मूल्य संशोधन पर टिप्पणी करते हुए, अरविंद कुमार ने समाचार एजेंसी ANI को बताया कि वैश्विक दबावों के बावजूद यह बढ़ोतरी अपेक्षाकृत कम है। उन्होंने कहा, “यह एक बहुत मामूली वृद्धि है, और आप जानते हैं कि बहुत दबाव है।” उन्होंने देश को आश्वस्त किया कि इंडियन ऑयल समूह की 10 रिफाइनियां चौबीसों घंटे और 100% से अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं, ताकि किसी भी खुदरा आउटलेट पर ईंधन की कोई कमी न हो। कुमार ने इस आपातकालीन और महत्वपूर्ण समय में ईंधन बचाने के लिए एकजुट होने का भी आग्रह किया। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब उपभोक्ताओं के मन में आपूर्ति को लेकर चिंताएं थीं, जिसे उन्होंने पूरी तरह से दूर करने का प्रयास किया है। यह सुनिश्चित करना कि देश भर में ईंधन की उपलब्धता बनी रहे, तेल कंपनियों की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है।
मूल्य वृद्धि का कारण और पृष्ठभूमि
PTI की एक रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया वृद्धि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा लागत में तेज वृद्धि को पूरी तरह से ऑफसेट करने के लिए आवश्यक मूल्य संशोधन का केवल लगभग दसवां हिस्सा है। सूत्रों के मुताबिक, सरकारी तेल विपणन कंपनियां (OMCs) इनपुट लागत में भारी उछाल के बावजूद लगभग 11 हफ्तों से ईंधन की कीमतें बढ़ाने से बच रही थीं। हालांकि, जब वित्तीय बोझ असहनीय हो गया, तो उन्हें बढ़ी हुई लागत का एक हिस्सा उपभोक्ताओं पर डालना पड़ा।
यह ध्यान देने योग्य है कि अप्रैल 2022 से पेट्रोल और डीजल की कीमतें काफी हद तक अपरिवर्तित रही थीं, सिवाय मार्च 2024 में लोकसभा चुनावों से पहले दोनों ईंधनों पर 2 रुपये प्रति लीटर की एकमुश्त कटौती के। यह कटौती उपभोक्ताओं को राहत देने और चुनावी माहौल को ध्यान में रखते हुए की गई थी। लेकिन वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक अस्थिरता ने तेल कंपनियों के लिए लंबे समय तक कीमतों को स्थिर रखना मुश्किल बना दिया था।
वैश्विक दबाव और भविष्य की चुनौतियाँ
वर्तमान मूल्य वृद्धि केवल एक शुरुआत हो सकती है, क्योंकि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल के उत्पादन में संभावित कटौती की आशंकाएं अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों को ऊपर धकेल रही हैं। ऐसे में, तेल विपणन कंपनियों पर लागत का दबाव लगातार बना हुआ है। यदि वैश्विक कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो भविष्य में और मूल्य संशोधन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अरविंद कुमार का यह बयान कि ‘बहुत दबाव है’, इस बात का स्पष्ट संकेत देता है कि तेल कंपनियां एक चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रही हैं। उपभोक्ताओं को भी ईंधन के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए तैयार रहना होगा, जैसा कि इंडियन ऑयल निदेशक ने अपील की है। सरकार और तेल कंपनियों को इस संवेदनशील मुद्दे पर संतुलन बनाए रखना होगा, ताकि उपभोक्ता और अर्थव्यवस्था दोनों पर अत्यधिक बोझ न पड़े और देश की ऊर्जा सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।










