प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को संसद के मानसून सत्र से पहले राष्ट्र को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने सत्र के उत्पादक होने की उम्मीद जताई। उन्होंने संकेत दिया कि यह सत्र अयोध्या राम मंदिर में दान चोरी, NEET पेपर लीक और परिसीमन विधेयक जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर गरमागरम बहस का गवाह बन सकता है। नई दिल्ली में दिए गए इस संबोधन में, प्रधानमंत्री ने देश की प्रगति, युवाओं की क्षमताओं और वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति को रेखांकित किया।
‘सक्रिय मानसून, उत्पादक सत्र’ का आह्वान
अपने संबोधन की शुरुआत में, प्रधानमंत्री मोदी ने मानसून और संसदीय सत्र के बीच एक दिलचस्प समानता प्रस्तुत की। उन्होंने कहा, “चाहे मानसून हो या मानसून सत्र – यदि दोनों सक्रिय हों, तो वे अत्यधिक उत्पादक साबित होते हैं। और जब दोनों उत्पादक होते हैं, तो यह राष्ट्र के कल्याण और सभी जीवों के भले का कारण बनता है।” उन्होंने प्रार्थना की कि मानसून सक्रिय और उत्पादक रहे, और मानसून सत्र भी उतना ही सफल सिद्ध हो। यह तुलना सत्र से सकारात्मक परिणाम की उनकी अपेक्षा को दर्शाती है, जिसमें सांसदों से रचनात्मक चर्चा और जनहित के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया गया है।
युवाओं की अंतरिक्ष में उपलब्धि और कटाक्ष
प्रधानमंत्री ने भारत की युवा शक्ति की सराहना करते हुए, अंतरिक्ष क्षेत्र में हुई हालिया सफलताओं का उल्लेख किया। उन्होंने विक्रम-1 ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल के सफल प्रक्षेपण को रेखांकित किया और बताया कि ‘स्काईरूट’ स्टार्टअप की पूरी टीम की औसत आयु सिर्फ 28 साल है। इस उपलब्धि की प्रशंसा करते हुए, उन्होंने एक परोक्ष कटाक्ष किया, “मैं किसी 56 साल के युवा की बात नहीं कर रहा।” यह टिप्पणी कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर एक veiled हमला माना जा रहा है, जो अक्सर अपनी उम्र के बावजूद ‘युवा’ होने का दावा करते हैं। मोदी ने आगे कहा कि भारत के युवाओं ने अंतरिक्ष में एक नई यात्रा शुरू की है, और यह एक जबरदस्त सफलता है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पिछले मानसून सत्र से ठीक पहले एक भारतीय नागरिक अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुंचा था, और हाल ही में एक युवा भारतीय स्टार्टअप ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह दर्शाता है कि भारत में निजी उद्यम अंतरिक्ष क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जो कुछ ही देशों में देखा जाता है।
वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की आर्थिक प्रगति
प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख और स्वीकार्यता पर भी गर्व व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह कोई संयोग नहीं है, बल्कि यह एक शक्तिशाली संदेश है कि हमारे देश के युवाओं की क्षमताएं और आकांक्षाएं अंतरिक्ष जितनी ही असीमित हैं। उन्होंने पश्चिम एशिया युद्ध से उत्पन्न संकट पर चिंता व्यक्त की, जिससे भारत जैसे ऊर्जा-निर्भर देशों के लिए पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, उर्वरक और रसायनों से संबंधित कई बाधाएं और संकट पैदा हुए। यह वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता का एक महत्वपूर्ण संदर्भ था। इन चुनौतियों के बावजूद, प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत ने 7.7 प्रतिशत की विकास दर बनाए रखी, जो दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा। उन्होंने इसे भारत की अंतर्निहित शक्ति का प्रतिबिंब बताया और कहा कि यह उस उत्साह और जोश की झलक है जिसके साथ राष्ट्र नई ऊंचाइयों को छूने की आकांक्षा रखता है। उन्होंने राजस्थान की तेल रिफाइनरी और हाइड्रोजन ट्रेन का भी उल्लेख किया, जिसे उन्होंने भारत के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, नवप्रवर्तकों, उद्यमियों और श्रमिकों के समर्पण का प्रमाण बताया।
सत्र के संभावित मुख्य मुद्दे
प्रधानमंत्री के संबोधन से यह स्पष्ट हो गया कि आगामी मानसून सत्र में कई ज्वलंत मुद्दों पर जोरदार बहस होने की संभावना है। इसमें सबसे प्रमुख अयोध्या राम मंदिर में दान चोरी का मामला है, जिस पर विपक्ष सरकार को घेरने का प्रयास कर सकता है। दूसरा महत्वपूर्ण मुद्दा NEET पेपर लीक का है, जिसने देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों को प्रभावित किया है। इस पर सरकार से विस्तृत जवाब और कार्रवाई की मांग की जाएगी। तीसरा मुद्दा परिसीमन विधेयक है, जो राज्यों की विधानसभा सीटों के पुनर्गठन से संबंधित है और जिस पर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच मतभेद हो सकते हैं। इन मुद्दों पर सदन में तीखी बहस होने और कार्यवाही में व्यवधान आने की आशंका है, हालांकि प्रधानमंत्री ने एक उत्पादक सत्र की उम्मीद जताई है। देश की वर्तमान गति और संसद की भावना के साथ, यह सत्र भारत के विकास पथ पर नई ऊर्जा प्रदान करने वाला सिद्ध हो सकता है।










