भारतीय शतरंज ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानंद ने सेंट लुइस में चल रहे सिंकफील्ड कप के दूसरे दौर में विश्व चैंपियनशिप के दावेदार जावोखिर सिंदारोव को हराकर टूर्नामेंट में संयुक्त बढ़त हासिल कर ली है। 20 वर्षीय प्रज्ञानंद की यह जीत उनके हालिया शानदार प्रदर्शनों की कड़ी में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिसने उन्हें शीर्ष खिलाड़ियों की सूची में ला खड़ा किया है।
सिंकफील्ड कप में शानदार प्रदर्शन
आर प्रज्ञानंद ने सिंकफील्ड कप के दूसरे दौर में जावोखिर सिंदारोव के खिलाफ एक मैराथन मुकाबले के बाद पूर्ण अंक हासिल किए। यह मुकाबला काफी लंबा चला जिसमें खेल के अधिकांश भाग में किसी भी खिलाड़ी को स्पष्ट बढ़त नहीं मिल पाई थी। हालांकि, खेल अंततः प्रज्ञानंद के पक्ष में तब मुड़ा जब सिंदारोव ने 82वीं चाल पर एक महंगी गलती कर दी। प्रज्ञानंद ने इसके जवाब में सटीक चालों की एक श्रृंखला खेली और अपनी बढ़त को बनाए रखा, जिसके 13 चालों बाद सिंदारोव ने हार मान ली। इस जीत के साथ, प्रज्ञानंद ने दो राउंड से 1.5 अंक प्राप्त कर लिए हैं। वह फिलहाल फैबियानो कारुआना, वेस्ले सो, लेवोन अरोनियन और मैक्सिम वाचियर-लाग्रेव के साथ तालिका में शीर्ष पर हैं। यह प्रज्ञानंद के लिए एक और उल्लेखनीय परिणाम है, जो हाल के महीनों में प्रभावशाली फॉर्म में चल रहे हैं और लगातार बड़े टूर्नामेंट में अपनी छाप छोड़ रहे हैं।
लगातार जीत का सिलसिला
यह जीत प्रज्ञानंद के लिए एक ऐसे समय में आई है जब वह लगातार शानदार फॉर्म में चल रहे हैं और शतरंज की दुनिया में अपनी पहचान बना रहे हैं। इसी महीने की शुरुआत में, उन्होंने ग्रैंड चेस टूर सेंट लुइस रैपिड एंड ब्लिट्ज खिताब जीता था। 35 में से 23 अंक हासिल कर, प्रज्ञानंद ने बाकी खिलाड़ियों से 1.5 अंक की स्पष्ट बढ़त के साथ टूर्नामेंट जीता। उस टूर्नामेंट के दौरान उन्होंने सिंदारोव के खिलाफ ही अंतिम से पहले के दौर में ड्रॉ खेला था। जून में, प्रज्ञानंद ने ओस्लो में नॉर्वे चेस 2026 का खिताब जीतकर एक ऐतिहासिक प्रदर्शन किया था। उन्होंने 10वें और अंतिम दौर में जर्मनी के विन्सेंट कीमर को हराकर एक उल्लेखनीय देर से वापसी की थी। इस भारतीय ग्रैंडमास्टर ने टूर्नामेंट के दौरान लगातार चार क्लासिकल गेम जीते और अपने करियर के सबसे बड़े खिताबों में से एक पर कब्जा किया। यह दर्शाता है कि प्रज्ञानंद अब न केवल गति वाले प्रारूपों में बल्कि शास्त्रीय शतरंज में भी अपनी महारत साबित कर रहे हैं। उनकी यह लगातार सफलताएं भारतीय शतरंज के भविष्य के लिए एक उज्ज्वल संकेत हैं।
मुख्यमंत्री द्वारा सम्मान
प्रज्ञानंद की इन उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है। सोमवार, 8 जून को, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने चेन्नई के मुख्य सचिवालय में भारतीय ग्रैंडमास्टर को सम्मानित किया। यह सम्मान प्रज्ञानंद की असाधारण प्रतिभा और देश के लिए उनकी उपलब्धियों की स्वीकृति थी। इस अवसर पर, मुख्यमंत्री विजय ने 20 वर्षीय ग्रैंडमास्टर के साथ शतरंज का एक खेल भी खेला, जो युवा खिलाड़ी के लिए एक प्रेरणादायक पल रहा होगा। यह सम्मान समारोह भारतीय खेल जगत में शतरंज के बढ़ते कद और युवा प्रतिभाओं को मिलने वाले समर्थन को भी रेखांकित करता है।
अन्य भारतीय खिलाड़ियों के लिए कठिन दौर
जहां एक ओर प्रज्ञानंद सिंकफील्ड कप में सफलता का स्वाद चख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सेंट लुइस में ही चल रहे केयर्न्स कप में भारतीय खिलाड़ियों के लिए दूसरा दौर थोड़ा मुश्किल साबित हुआ। आर वैशाली, दिव्या देशमुख और कोनेरू हम्पी तीनों मिलकर केवल आधा अंक ही हासिल कर पाईं। वैशाली ने बिबिसारा असाउबायेवा के खिलाफ ड्रॉ खेला, जबकि दिव्या को एलिस ली के हाथों हार का सामना करना पड़ा। हम्पी भी हारीं और उन्हें तान झोंग्यी ने मात दी। दो राउंड के बाद, वैशाली और हम्पी के पास 0.5 अंक हैं, जबकि दिव्या के पास एक अंक है। झोंग्यी और ली दोनों गेम जीतकर फिलहाल तालिका में शीर्ष पर हैं। यह दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय शतरंज में प्रतिस्पर्धा कितनी कड़ी है और भारतीय खिलाड़ियों को अभी भी शीर्ष पर पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी, हालांकि प्रज्ञानंद की सफलता एक प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।






