भुवनेश्वर: ओडिशा में अगले साल त्रिस्तरीय पंचायत और शहरी स्थानीय निकाय चुनाव एक साथ कराने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने इन चुनावों के लिए युद्धस्तर पर अपनी प्रशासनिक तैयारियां शुरू कर दी हैं और राष्ट्रीय जनगणना का कार्य संपन्न होने के तुरंत बाद इनकी तारीखों का बिगुल फूंक दिया जाएगा। माना जा रहा है कि यह दोनों महत्वपूर्ण चुनाव अगले साल अप्रैल या मई के महीने में एक साथ संपन्न कराए जा सकते हैं, जिसके लिए मार्च 2025 में आधिकारिक अधिसूचना जारी होने की संभावना है। निर्वाचन प्रक्रिया को सुगम और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से आयोग ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
चुनावी तैयारियों की गति तेज
राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव संतोष कुमार दाश ने इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि आयोग ने चुनावों को लेकर अपनी प्रशासनिक तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। उन्होंने पुष्टि की कि अगले साल मार्च महीने में इन चुनावों के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। यह निर्णय राज्य में निर्वाचन प्रक्रिया को और अधिक व्यवस्थित बनाने तथा संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आयोग का लक्ष्य है कि बिना किसी बाधा के, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से चुनाव संपन्न कराए जाएं, जिसके लिए व्यापक स्तर पर योजनाएं बनाई जा रही हैं।
मतदाता सूची और शहरी निकायों की स्थिति
चुनाव प्रक्रिया को सुचारु रूप से चलाने के लिए, इसी साल अक्टूबर महीने से मतदाता सूची में संशोधन और सुधार का काम शुरू कर दिया जाएगा। यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करेगी कि सभी पात्र मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें और कोई भी व्यक्ति बेवजह वंचित न रहे। इस बार ओडिशा के कुल 143 शहरी निकायों में मतदान कराया जाएगा, जिनमें नगर निगम, नगरपालिका और अधिसूचित क्षेत्र परिषद (NAC) शामिल हैं। एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, संबलपुर नगर निगम चुनाव को लेकर ओडिशा हाईकोर्ट में चल रहा कानूनी विवाद अब पूरी तरह सुलझ गया है। अदालत ने इस पर अपना अंतिम आदेश जारी कर दिया है, जिससे इस निगम में भी चुनाव का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। यह न्यायिक फैसला आयोग की तैयारियों को और बल देगा।
आरक्षण और मतदान केंद्रों की व्यवस्था
चुनावी तैयारियों के तहत, नगर पालिकाओं के अध्यक्ष पदों के लिए आरक्षण की सूची पहले ही सार्वजनिक की जा चुकी है। अब इसके आधार पर प्रशासनिक स्तर पर घर-घर जाकर सत्यापन और सर्वे का काम शुरू किया जाएगा। यह सर्वे यह सुनिश्चित करेगा कि आरक्षण के प्रावधानों का सही ढंग से पालन हो और किसी भी प्रकार की त्रुटि न रहे। विशेष रूप से, अधिसूचित क्षेत्र परिषद (NAC) क्षेत्रों के लिए आयोग ने एक विशेष योजना बनाई है, जिसके तहत मतदान को सुगम बनाने के लिए हर वार्ड में कम से कम एक मतदान केंद्र स्थापित किया जाएगा। इससे मतदाताओं को अपने मताधिकार का प्रयोग करने में सुविधा होगी और मतदान प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। चुनाव सामग्री की पुख्ता तैयारी भी सुनिश्चित की जा रही है, जिसमें मतपेटियों से लेकर अन्य आवश्यक उपकरण शामिल हैं।
चुनावों का महत्व और आगे की राह
ओडिशा में पंचायत और शहरी स्थानीय निकाय चुनावों का एक साथ होना राज्य की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है। यह कदम न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ाएगा, बल्कि चुनाव खर्च को भी कम करने में सहायक होगा। राष्ट्रीय जनगणना का कार्य संपन्न होने के बाद, आयोग उम्मीद कर रहा है कि वह बिना किसी देरी के चुनाव की अंतिम तारीखों की घोषणा कर पाएगा। इन चुनावों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर नई नेतृत्व सामने आएगा, जो राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। राज्य निर्वाचन आयोग अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा है, ताकि अगले साल अप्रैल-मई में होने वाले ये चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न हो सकें और जनता को अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करने का अवसर मिल सके।




