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राजस्थान हाईकोर्ट की पहल: तीन दिन वर्चुअल सुनवाई से बचेगा ईंधन

बढ़ती ईंधन खपत को कम करने और प्रशासनिक सादगी के उपायों को बढ़ावा देने की दिशा में राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। हाईकोर्ट प्रशासन ने घोषणा की है कि 22 मई, 26 मई और 27 मई 2026 को हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ और जयपुर बेंच में न्यायिक कार्यवाही मुख्य रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वर्चुअल मोड) के माध्यम से संचालित की जाएगी। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लिया गया है, जिसका उद्देश्य अनावश्यक यात्राओं में कमी लाना और पर्यावरण संरक्षण में योगदान देना है।

ऐतिहासिक पहल और राष्ट्रीय दिशानिर्देश

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राजस्थान हाईकोर्ट का यह कदम देश में न्यायिक प्रक्रियाओं को अधिक कुशल और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। इस संबंध में रजिस्ट्रार जनरल की ओर से एक आधिकारिक नोटिस जारी किया गया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि यह निर्णय भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) और सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप है। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की अदालतों और संस्थानों को समय-समय पर ईंधन संरक्षण, अनावश्यक यात्राओं में कमी लाने और प्रशासनिक सादगी अपनाने के निर्देश दिए हैं। यह पहल न्यायपालिका की ओर से सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी निभाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। न्यायपालिका का यह कदम ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में सतत विकास और कार्बन फुटप्रिंट कम करने पर जोर दिया जा रहा है। वर्चुअल सुनवाई से न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी, जिससे वायु प्रदूषण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

वर्चुअल सुनवाई का स्वरूप और हितधारकों से चर्चा

हाईकोर्ट प्रशासन ने इस नई व्यवस्था को लागू करने से पहले जोधपुर और जयपुर बार एसोसिएशनों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया था। इस चर्चा के बाद ही अदालतों में वर्चुअल सुनवाई को प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया गया, ताकि अधिवक्ताओं और पक्षकारों को बार-बार अदालतों तक लंबी यात्रा करने की आवश्यकता कम हो सके। नोटिस के अनुसार, अदालतों की कार्यवाही संबंधित कोर्ट रूम से ही संचालित होगी, लेकिन अधिवक्ताओं और पक्षकारों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा। यह व्यवस्था यह सुनिश्चित करती है कि न्यायिक प्रक्रियाएं सुचारू रूप से चलती रहें, जबकि भौतिक उपस्थिति की आवश्यकता को कम किया जा सके। इस पहल से अधिवक्ताओं और पक्षकारों दोनों को समय और धन की बचत होगी, जो अक्सर अदालती कार्यवाही के लिए दूरदराज के क्षेत्रों से यात्रा करने में खर्च होता है। यह कदम न्यायिक प्रणाली को अधिक सुलभ और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

ईंधन बचत और सादगी के अन्य उपाय

हाईकोर्ट प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिजिकल हियरिंग पर किसी प्रकार की रोक नहीं लगाई गई है। वर्चुअल मोड को प्राथमिकता दी जा रही है, लेकिन यदि किसी अधिवक्ता या पक्षकार को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना आवश्यक हो, तो उन्हें इसकी अनुमति होगी। इसके बावजूद, हाईकोर्ट ने सभी से अपील की है कि आवश्यकता पड़ने पर वाहन साझा (कार पूलिंग) जैसी व्यवस्थाओं को अपनाया जाए। यह सुझाव ईंधन की बचत सुनिश्चित करने और पर्यावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए दिया गया है। कार पूलिंग जैसी प्रथाएं न केवल व्यक्तिगत स्तर पर खर्च को कम करती हैं, बल्कि सड़क पर वाहनों की संख्या घटाकर यातायात जाम और प्रदूषण को भी कम करने में मदद करती हैं। यह समग्र रूप से एक जिम्मेदार नागरिक व्यवहार को बढ़ावा देने का प्रयास है, जो न्यायिक प्रक्रिया के साथ-साथ समाज के व्यापक हित में भी है। राजस्थान हाईकोर्ट की यह पहल भविष्य में अन्य अदालतों के लिए भी एक प्रेरक मॉडल बन सकती है, जो डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर न्यायिक दक्षता और पर्यावरणीय स्थिरता के लक्ष्यों को प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं।

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Dipti Das
लेखक / Author

दीप्ति दास दबंग आवाज़ की संवाददाता हैं, जो विभिन्न विषयों पर सटीक और संतुलित रिपोर्टिंग के लिए जानी जाती हैं।