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छत्तीसगढ़

उत्तरी छत्तीसगढ़ में कड़ाके की ठंड का प्रकोप, बच्चों में हाइपोथर्मिया के 400 से अधिक मामले दर्ज

उत्तरी छत्तीसगढ़ में severe ठंड से बच्चों में हाइपोथर्मिया के 400 से अधिक मामले दर्ज, अस्पतालों में दबाव बढ़ा; प्रशासन ने राहत उपाय तेज किए।

उत्तरी छत्तीसगढ़ इन दिनों कड़ाके की ठंड की चपेट में है। तापमान लगातार नीचे जा रहा है और कई इलाकों में सुबह–शाम कोहरा छाया रहता है। कड़ी ठंड का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर दिख रहा है। पिछले कुछ दिनों में स्वास्थ्य विभाग ने हाइपोथर्मिया के 400 से अधिक मामलों की पुष्टि की है, जिससे क्षेत्र में चिंता का माहौल बन गया है। अस्पतालों में भी छोटे मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है।


कड़ाके की ठंड बनी स्वास्थ्य संकट का कारण

पिछले एक सप्ताह से उत्तरी छत्तीसगढ़ में तापमान सामान्य से 6–8 डिग्री तक नीचे दर्ज किया जा रहा है। सरगुजा, कोरिया, जशपुर और बलरामपुर जिलों में सुबह का न्यूनतम तापमान 4 से 7 डिग्री तक पहुंच गया है।
मौसम विभाग ने बताया कि उत्तर भारत से आ रही सर्द हवाओं के कारण प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में ठंड और बढ़ गई है।
यह मौसम बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर रहा है।


हाइपोथर्मिया के 400+ मामले: स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों में हाइपोथर्मिया से पीड़ित बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
डॉक्टरों के अनुसार, हाइपोथर्मिया तब होता है जब शरीर का तापमान सामान्य से नीचे चला जाता है और शरीर गर्मी पैदा नहीं कर पाता।
छोटे बच्चों में यह स्थिति जल्दी विकसित होती है क्योंकि उनका शरीर वयस्कों की तुलना में तेजी से तापमान खोता है।

अस्पताल प्रशासन ने बताया कि बच्चों में मुख्य लक्षण—

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  • लगातार कंपकंपी
  • सुस्ती
  • सांस लेने में तेजी
  • त्वचा का ठंडा और पीला पड़ जाना
    जैसे मामले बड़ी संख्या में रिपोर्ट हो रहे हैं।

अस्पतालों में बढ़ा दबाव

अम्बिकापुर मेडिकल कॉलेज, बैकुंठपुर जिला अस्पताल, जशपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों सहित कई जगहों पर बाल रोग वार्ड पूरी तरह भर चुके हैं।
कुछ अस्पतालों में अतिरिक्त बेड लगाने पड़े हैं।
स्वास्थ्यकर्मियों को 24 घंटे शिफ्ट में काम करना पड़ रहा है ताकि समय पर बच्चों का इलाज हो सके।


ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति ज्यादा गंभीर

शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण इलाकों में स्थिति ज्यादा चिंताजनक है।
कई गांवों में ठंड से बचाव के पर्याप्त साधन नहीं हैं, जिससे बच्चों में हाइपोथर्मिया के मामले तेजी से बढ़े हैं।
किराए के घरों, कच्चे मकानों और जंगल किनारे बसे परिवारों में ठंड का असर दोगुना होता है।

आंगनबाड़ी केंद्रों ने बताया कि कई बच्चे सुबह होने वाली कड़ाके की ठंड में केंद्र तक पहुंचने में सक्षम नहीं हैं।


राहत उपायों के निर्देश

स्वास्थ्य विभाग ने जिलों को हाइपोथर्मिया से निपटने के लिए विशेष दिशा–निर्देश जारी किए हैं—

  • नवजात और छोटे बच्चों को पर्याप्त गर्म कपड़े उपलब्ध कराना
  • स्कूलों व आंगनबाड़ी केंद्रों के समय में परिवर्तन
  • हॉस्पिटल में हीटेड वार्ड और वार्मिंग डिवाइस उपलब्ध कराना
  • ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य टीमों की विशेष तैनाती

इसके अलावा, कलेक्टरों को जरूरत पड़ने पर रात्रि में अलाव की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।


प्रशासन और स्थानीय निकाय सक्रिय

स्थानीय प्रशासन गावों में कंबल वितरण, अलाव व्यवस्था और जागरूकता कार्यक्रम चला रहा है।
सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी घर–घर जाकर माता–पिता को बच्चों को ठंड से सुरक्षित रखने के उपाय बता रहे हैं।
कई स्वयंसेवी संगठन भी गर्म कपड़ों के वितरण में सहयोग कर रहे हैं।


मौसम विभाग का पूर्वानुमान

मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी जारी की है कि ठंड का यह दौर एक सप्ताह और जारी रह सकता है।
उत्तर–पूर्वी हवाओं का प्रभाव बढ़ने से तापमान और गिरने की संभावना है।
उत्तरी छत्तीसगढ़ में कुछ क्षेत्रों में पाला पड़ने की भी संभावना जताई गई है, जिससे कृषि पर भी असर पड़ सकता है।


माता–पिता के लिए विशेष सलाह

डॉक्टरों ने माता–पिता को सलाह दी है कि वे बच्चों को—

  • सिर, पैर और कान पूरी तरह ढककर रखें
  • सुबह–शाम बाहर न निकलने दें
  • पर्याप्त गर्म पानी पिलाएं
  • हीटर–कोयला जलाते समय कमरे में वेंटिलेशन रखें

विशेषज्ञों ने कहा कि हाइपोथर्मिया की स्थिति में बच्चे को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाना चाहिए।


ठंड का बच्चों पर मानसिक और शारीरिक प्रभाव

विशेषज्ञ बताते हैं कि लंबे समय तक ठंड का प्रभाव बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता को कम कर सकता है।
इसके अलावा, नींद की कमी, भूख में कमी और खेलकूद बंद होने से मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है।
स्कूलों के समय में बदलाव से बच्चों को कुछ राहत जरूर मिली है।


स्थानीय निवासियों की चिंताएं

कई माता–पिता ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इतनी कड़ी ठंड पिछले कई वर्षों में नहीं देखी गई।
उन्होंने प्रशासन से ठंड कम होने तक सुबह स्कूल समय को पूरी तरह स्थगित करने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार को कंबल वितरण और अलाव व्यवस्था बढ़ानी चाहिए।


अंतिम विचारात्मक पंक्ति (बिना निष्कर्ष)

कड़ाके की ठंड से बच्चों पर बढ़ते खतरे ने उत्तरी छत्तीसगढ़ को सतर्क कर दिया है, और स्वास्थ्य विभाग हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है।


Heshma lahre
लेखक: Heshma lahre

Heshma lahre is a dedicated journalist at Dabang Awaz, known for her comprehensive coverage across all news categories, delivering accurate and timely reports with integrity.