उदंती-सीतानदी में प्राकृतिक उद्यान विकसित कर दुर्लभ हॉर्नबिल पक्षियों के संरक्षण की पहल, जैव विविधता और इको-टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में दुर्लभ हॉर्नबिल पक्षियों के संरक्षण हेतु विशेष पहल शुरू की गई है। वन विभाग द्वारा प्राकृतिक उद्यानों का विकास कर इस क्षेत्र को हॉर्नबिल के लिए अनुकूल आवास के रूप में विकसित किया जा रहा है।
जैव विविधता संरक्षण की दिशा में प्रयास
वन अधिकारियों के अनुसार हॉर्नबिल पक्षी पर्यावरण संतुलन के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इनकी संख्या में गिरावट को देखते हुए प्राकृतिक आवासों को संरक्षित और विकसित करने की योजना बनाई गई है। उदंती-सीतानदी क्षेत्र की प्राकृतिक परिस्थितियां हॉर्नबिल के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं।
प्राकृतिक उद्यानों का विकास
वन विभाग द्वारा विकसित किए जा रहे प्राकृतिक उद्यानों में स्थानीय वृक्षों और पौधों का रोपण किया जा रहा है, ताकि पक्षियों को भोजन और सुरक्षित घोंसले के लिए अनुकूल वातावरण मिल सके। इसके साथ ही मानव हस्तक्षेप को सीमित करने के लिए विशेष निगरानी व्यवस्था भी की जा रही है।
इको-टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का कहना है कि हॉर्नबिल संरक्षण परियोजना से इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा। प्राकृतिक उद्यानों के विकास से पर्यटकों को वन्यजीवों को करीब से देखने और प्रकृति से जुड़ने का अवसर मिलेगा, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे।
स्थानीय समुदाय की भागीदारी
इस पहल में स्थानीय ग्रामीणों और वन समितियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को वन्यजीव संरक्षण के महत्व से अवगत कराया जा रहा है, ताकि संरक्षण प्रयासों को सामुदायिक सहयोग मिल सके।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से संरक्षण
वन विभाग के विशेषज्ञ हॉर्नबिल की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं और उनके व्यवहार, प्रजनन और आवास से जुड़े पहलुओं का अध्ययन कर रहे हैं। इससे संरक्षण रणनीति को और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
पर्यावरण संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
उदंती-सीतानदी क्षेत्र में प्राकृतिक उद्यानों का विकास और हॉर्नबिल संरक्षण की पहल को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे क्षेत्र की जैव विविधता को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।








