विश्व मधुमेह दिवस पर राज्य स्तरीय बैठक के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों की एनसीडी स्क्रीनिंग की गई। मधुमेह जागरूकता और स्वास्थ्य सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया।
रायपुर। विश्व मधुमेह दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक विशेष पहल करते हुए राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की एनसीडी (Non-Communicable Diseases) स्क्रीनिंग की गई। इस स्क्रीनिंग में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोगों के जोखिम, मोटापा, थायराइड और अन्य जीवनशैली आधारित रोगों की जांच शामिल रही। इस अभिनव प्रयास का उद्देश्य था— स्वास्थ्य कर्मियों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाना, नियमित परीक्षण की आदत विकसित करना और एनसीडी नियंत्रण के लिए विभागीय संवेदनशीलता को मजबूत करना।
बैठक में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, जिला स्वास्थ्य अधिकारियों, चिकित्सकों और विभिन्न कार्यक्रमों के प्रबंधकों ने भाग लिया। बैठक के दौरान विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा के साथ-साथ एनसीडी नियंत्रण कार्यक्रम की रणनीतियों पर भी चर्चा हुई।
🩺 एनसीडी स्क्रीनिंग : क्या-क्या जांचे गए?
स्क्रीनिंग में स्वास्थ्य कर्मियों के लिए निम्न जांचें की गईं—
- रक्त शर्करा (Blood Sugar)
- बीपी (Blood Pressure)
- बीएमआई (BMI)
- लिपिड प्रोफाइल
- थायराइड स्तर
- हृदय रोग जोखिम मूल्यांकन
- मोटापा और कमर-हिप अनुपात
- एनसीडी जोखिम स्कोर
विशेषज्ञ टीम ने मौके पर ही रिपोर्ट का प्राथमिक आकलन किया और जिन कर्मचारियों में किसी भी जोखिम स्तर का संकेत मिला, उन्हें तत्काल चिकित्सकीय परामर्श दिया गया।
🩺 क्यों जरूरी है एनसीडी स्क्रीनिंग?
बैठक में वक्ताओं ने बताया कि—
- देश में मधुमेह, हृदय रोग, कैंसर और हाई बीपी जैसे एनसीडी मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है।
- 30 वर्ष से अधिक आयु के हर व्यक्ति को साल में कम से कम एक बार स्वास्थ्य परीक्षण करवाना चाहिए।
- स्वास्थ्य कर्मियों के लिए यह और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ होते हैं।
विश्व मधुमेह दिवस के तहत यह संदेश दिया गया कि रोकथाम ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।
👩⚕️ स्वास्थ्य विभाग ने क्यों चुना यह तरीका?
राज्य ने राष्ट्रीय एनसीडी कार्यक्रम को मजबूत करने के लक्ष्य के साथ “स्वयं स्वस्थ, समाज स्वस्थ” की अवधारणा पर जोर दिया है।
इसके तहत—
- विभागीय कर्मचारियों को स्क्रीनिंग
- स्वास्थ्य जागरूकता सत्र
- जीवनशैली सुधार कार्यक्रम
- तनाव प्रबंधन
- डाइट और फिजिकल एक्टिविटी की गाइडलाइन
जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।
बैठक में बताया गया कि स्वास्थ्य विभाग अपने कर्मचारियों के लिए तिमाही स्क्रीनिंग और वार्षिक स्वास्थ्य जांच को भी अनिवार्य करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
🍎 कार्यक्रम में जागरूकता सत्र भी आयोजित
स्क्रीनिंग के बाद विशेषज्ञ डॉक्टरों ने जीवनशैली सुधार के महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जिनमें शामिल थे—
- मीठा और फास्ट फूड कम करें
- नियमित व्यायाम और योग
- दिन में कम से कम 30 मिनट वॉक
- तनाव कम करने के उपाय
- पर्याप्त नींद
- नियमित चिकित्सा परामर्श
डॉक्टरों ने कहा कि मधुमेह का खतरा केवल उम्र से नहीं, बल्कि आधुनिक जीवनशैली, तनाव और अनियमित खानपान से भी बढ़ता है।
🏛️ बैठक में हुई विभागीय योजनाओं की समीक्षा
राज्य स्तरीय बैठक में निम्न बिंदुओं पर विस्तृत समीक्षा हुई—
- हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की प्रगति
- जिला एनसीडी क्लीनिक की स्थिति
- स्क्रीनिंग और उपचार की उपलब्धता
- दवाओं और परीक्षण सामग्री की उपलब्धता
- मोबाइल मेडिकल यूनिट की भूमिका
- आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना का क्रियान्वयन
अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में एनसीडी जांच को और प्रभावी बनाया जाए।
📊 स्वास्थ्य विभाग की प्रतिबद्धता
वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि विश्व मधुमेह दिवस केवल प्रतीकात्मक दिन नहीं है, बल्कि यह सभी को याद दिलाने का अवसर है कि स्वास्थ्य की उपेक्षा महामारी जैसी समस्याओं को जन्म दे सकती है। उन्होंने कहा—
“यदि स्वास्थ्य कर्मी स्वयं स्वास्थ्य जागरूक होंगे, तभी वे जनता को प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं दे पाएंगे।”
अधिकारियों ने यह भी वादा किया कि एनसीडी नियंत्रण के लिए राज्य में नई तकनीकें, डिजिटल रिकॉर्ड और सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे।
🌟 समग्र रूप से—स्वास्थ्य सुरक्षा का महत्वपूर्ण कदम
विश्व मधुमेह दिवस पर आयोजित यह राज्य स्तरीय बैठक विभागीय कार्यों की समीक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य कर्मियों की स्वास्थ्य जांच जैसी सार्थक पहल के कारण विशेष बन गई।
इस स्क्रीनिंग का उद्देश्य केवल परीक्षण करना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदारी और जागरूकता को बढ़ाना था।
जनता को सेवा देने वाले विभाग ने खुद से शुरुआत कर एक उदाहरण प्रस्तुत किया कि नियमित जांच और जागरूकता कैसे जीवन बचा सकती है।








