छत्तीसगढ़ में गणेशोत्सव के दौरान सीसीटीवी निगरानी होगी। डीजे नियम तोड़ने पर पहली बार चालान और दूसरी बार गाड़ी होगी राजसात। प्रशासन सख्त रुख में।
छत्तीसगढ़ में आगामी गणेशोत्सव के लिए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। इस बार त्योहार को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने तकनीकी निगरानी पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। शहर के प्रमुख चौक-चौराहों, जुलूस मार्ग और विसर्जन स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था या नियम उल्लंघन की स्थिति पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
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डीजे गाड़ियों पर सख्त निर्देश
प्रशासन ने साफ कहा है कि डीजे बजाने में अगर ध्वनि प्रदूषण या कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन पाया गया तो सख्त दंडात्मक कार्रवाई होगी। पहली बार पकड़े जाने पर चालान किया जाएगा, लेकिन यदि वही डीजे गाड़ी दूसरी बार नियम तोड़ते हुए पाई गई तो गाड़ी को सीधे राजसात कर लिया जाएगा।
ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण
गणेशोत्सव के दौरान डीजे गाड़ियों और तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम की शिकायतें हर साल आती रही हैं। इस बार प्रशासन ने पहले से ही घोषणा कर दी है कि किसी भी हालत में निर्धारित डेसीबल लिमिट से अधिक आवाज बजाने की अनुमति नहीं होगी। इसके लिए जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीम गठित की गई है।
सीसीटीवी कैमरों से चौकसी
गणेशोत्सव में भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों पर सीसीटीवी कैमरों से चौकसी रखी जाएगी। पुलिस कंट्रोल रूम में एक अलग मॉनिटरिंग टीम बनाई जाएगी, जो चौबीसों घंटे लाइव फुटेज पर नजर रखेगी। इससे न सिर्फ डीजे नियम उल्लंघन बल्कि जुलूस में होने वाली अन्य अव्यवस्थाओं पर भी तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी।
आयोजकों की जिम्मेदारी तय
पुलिस प्रशासन ने गणेशोत्सव समिति और पंडाल आयोजकों को निर्देश दिए हैं कि वे ध्वनि और जुलूस की दिशा में पूरी तरह से कानूनी नियमों का पालन करें। आयोजकों की जिम्मेदारी होगी कि उनके पंडाल या जुलूस में नियम उल्लंघन न हो।
स्थानीय जनता से अपील
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे उत्सव में शामिल होते समय कानून-व्यवस्था का ध्यान रखें और किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियम तोड़ने की स्थिति में पुलिस की मदद करें।
परंपरा और कानून का संतुलन
गणेशोत्सव प्रदेश का प्रमुख पर्व है और लाखों श्रद्धालु इसमें भाग लेते हैं। प्रशासन का कहना है कि उनका उद्देश्य धार्मिक परंपराओं को बाधित करना नहीं बल्कि उत्सव को सुरक्षित, शांतिपूर्ण और व्यवस्थित बनाना है। इसलिए सभी लोगों से सहयोग अपेक्षित है।








