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छत्तीसगढ़

उदंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व में उड़न गिलहरी शावक का सफल रेस्क्यू, वन विभाग ने माँ से कराया पुनर्मिलन

उदंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व में उड़न गिलहरी शावक का सफल रेस्क्यू कर वन विभाग ने उसे माँ से मिलाया, शिक्षकों की सतर्कता से बची नन्हीं जान।

गरियाबंद/मैनपुर। उदंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व में वन्यजीव संरक्षण का एक संवेदनशील और प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है, जहां वन विभाग की त्वरित कार्रवाई और शिक्षकों की सतर्कता से उड़न गिलहरी के एक शावक का सफल रेस्क्यू कर उसे सुरक्षित रूप से उसकी माँ से मिलाया गया। इस पूरे अभियान को मानवीय संवेदना और वन्यजीव संरक्षण के उत्कृष्ट समन्वय के रूप में देखा जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, 25 फरवरी को रक्षापथरा प्राथमिक स्कूल के प्रधान पाठक धनसिंह नेगी और सहायक शिक्षक संतोष निषाद ने सुबह करीब 11:50 बजे वन विभाग को सूचना दी कि गोना मार्ग के पास गिरे हुए सूखे धावड़ा वृक्ष पर एक छोटा शावक अकेला बैठा है। शावक के आसपास बड़ी संख्या में चींटियां होने के कारण उसकी हालत खराब होती जा रही थी। सूचना मिलते ही तौरेंगा (बफर) परिक्षेत्र की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का आकलन किया।

वन कर्मियों ने सावधानीपूर्वक शावक को सुरक्षित कस्टडी में लेकर उसका प्राथमिक निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बताया कि शावक कमजोर अवस्था में था, लेकिन उसमें जीवन शक्ति मौजूद थी। टीम ने आसपास के क्षेत्र में उसकी माँ की तलाश शुरू की और प्राकृतिक आवास को ध्यान में रखते हुए पुनर्मिलन की योजना बनाई। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में शावक को उसी स्थान के पास सुरक्षित तरीके से रखा गया, जहां उसकी माँ के आने की संभावना थी।

कुछ समय बाद वन विभाग की निगरानी में उड़न गिलहरी की माँ वहां पहुंची और शावक को अपने साथ ले गई। इस सफल पुनर्मिलन को देखकर वन विभाग की टीम और स्थानीय लोग बेहद भावुक नजर आए। अधिकारियों ने बताया कि वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रखना प्राथमिकता होती है, इसलिए हर कदम बेहद सावधानी से उठाया गया।

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वन विभाग के अधिकारियों ने शिक्षकों की सतर्कता और त्वरित सूचना को इस अभियान की सफलता का बड़ा कारण बताया। उनका कहना है कि यदि समय पर सूचना नहीं मिलती तो शावक को गंभीर नुकसान हो सकता था। इस घटना ने यह भी साबित किया कि वन्यजीव संरक्षण में आम नागरिकों की भागीदारी कितनी महत्वपूर्ण है।

विशेषज्ञों के अनुसार, उड़न गिलहरी जैसे दुर्लभ वन्यजीवों का संरक्षण जैव विविधता के लिए बेहद जरूरी है। ये प्रजातियां जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उदंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व में इस तरह की घटनाएं वन्यजीवों के प्रति बढ़ती जागरूकता और विभाग की सक्रियता को दर्शाती हैं।

स्थानीय ग्रामीणों और शिक्षकों ने भी वन विभाग की इस पहल की सराहना की। उनका कहना है कि इस घटना से बच्चों और युवाओं में वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ेगी। स्कूल के विद्यार्थियों के बीच भी इस रेस्क्यू ऑपरेशन को लेकर उत्साह देखा गया और उन्होंने वन्यजीव संरक्षण के महत्व को समझा।

वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि जंगल या आसपास के क्षेत्रों में किसी घायल या असहाय वन्यजीव को देखें तो तुरंत विभाग को सूचना दें और स्वयं हस्तक्षेप करने से बचें। अधिकारियों का कहना है कि वन्यजीवों की सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है और ऐसे छोटे-छोटे प्रयास बड़े बदलाव ला सकते हैं।

उदंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व में हुआ यह सफल रेस्क्यू ऑपरेशन वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आया है। समय पर कार्रवाई और संवेदनशील दृष्टिकोण के कारण एक नन्हीं उड़न गिलहरी को नया जीवन मिला और उसे फिर से अपने प्राकृतिक परिवार का साथ मिल सका।



Heshma lahre
लेखक: Heshma lahre

Heshma lahre is a dedicated journalist at Dabang Awaz, known for her comprehensive coverage across all news categories, delivering accurate and timely reports with integrity.