जल शक्ति जन भागीदारी अभियान में सूरजपुर जिले ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। चेक डैम, तलाब पुनर्जीवन और सामुदायिक सहयोग से जिले में जल संरक्षण का मजबूत मॉडल बना।
छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी को मजबूत बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे जल शक्ति जन भागीदारी अभियान में सूरजपुर जिला राज्य स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों के संरक्षण, रिचार्ज स्ट्रक्चर निर्माण, नालों और तलाबों के पुनर्जीवन, तथा जनता की सक्रिय सहभागिता ने सूरजपुर को एक आदर्श मॉडल बना दिया है।
राज्य सरकार और जल संसाधन विभाग द्वारा जारी नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार सूरजपुर ने अभियान के विभिन्न मापदंडों—जल संरक्षण, सामुदायिक भागीदारी, नवाचार, निगरानी प्रणाली और क्षेत्रीय कार्यों की प्रगति—में उल्लेखनीय परिणाम दिए हैं।
ग्राम स्तर पर हुआ व्यापक जनसहयोग—लोग खुद जुड़े अभियान से
सूरजपुर की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि इस अभियान को केवल सरकारी कार्यक्रम न मानकर जनता स्वयं इसमें शामिल हुई।
कई गाँवों में लोगों ने—
- नालों की सफाई
- चेक डैम निर्माण
- पारंपरिक जल स्रोतों की मरम्मत
- वर्षाजल संचयन
—जैसे कार्य स्वयंसेवी रूप से किए।
महिला समूहों, युवाओं और पंचायत प्रतिनिधियों ने मिलकर जल संरक्षण को सामुदायिक जिम्मेदारी का रूप दिया।
चेक डैम और रिचार्ज संरचनाओं का तेजी से निर्माण
अभियान के तहत सूरजपुर जिले में—
- चेक डैम
- स्टॉप डैम
- परकोलेशन टैंक
- सोख्ता गड्ढे
- कुओं का रिचार्ज
—जैसी कई संरचनाएँ बनाई गईं।
इन संरचनाओं से—
- भूजल स्तर बढ़ा
- सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हुआ
- कई गांवों में हैंडपंप की जलधारा मजबूत हुई
किसानों ने बताया कि इस वर्ष रबी फसल की सिंचाई में उन्हें पहले की तुलना में अधिक सुविधा मिली।
जलों का पुनर्जीवन—तलाबों की सफाई से मिली नई जान
सूरजपुर के अनेक गाँवों में वर्षों से उपेक्षित पड़े जलाशयों को नए रूप में जीवित किया गया।
तलाबों की—
- गहरीकरण
- सफाई
- किनारों का संरक्षण
- कचरा एवं गाद हटाना
जैसे कार्यों ने जल संरचनाओं को लाभप्रद बनाया।
कई गाँवों में लोग अब वर्षाजल को संरक्षित कर गर्मियों में पानी की कमी से निपट रहे हैं।
स्कूलों में बच्चों को सिखाया जल-संरक्षण
अभियान का एक विशेष पहलू यह रहा कि स्कूलों में बच्चों को जल संरक्षण की समझ दी गई।
- जल-रैली
- निबंध प्रतियोगिता
- मॉडल प्रदर्शन
- वाटर ऑडिट
—के माध्यम से विद्यार्थियों को जागरूक किया गया।
शिक्षकों का कहना है कि बच्चे घरों में भी पानी बचाने का संदेश ले जा रहे हैं।
नवाचार भी बने अभियान की ताकत
सूरजपुर में कुछ पंचायतों ने स्थानीय नवाचारों को भी अपनाया।
- पुराने कुओं का पुनरुद्धार
- पाइप आधारित रिचार्ज
- नालों में चेक-बंडिंग
- खेत-तलाब मॉडल का विस्तार
इन नवाचारों ने कम लागत में अधिक प्रभाव देने का काम किया।
मॉनिटरिंग सिस्टम—डिजिटल ट्रैकिंग से तेज हुआ काम
जिले में कार्यों की मॉनिटरिंग के लिए मोबाइल ऐप और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग किया गया।
फील्ड टीम हर संरचना की—
- तस्वीर
- लोकेशन
- कार्य प्रगति
रोजाना अपलोड करती रही।
इससे कार्य की गुणवत्ता और गति दोनों में सुधार आया।
किसानों की राय—सिंचाई और पीने के पानी में सुधार
किसानों ने बताया कि चेक डैम और रिचार्ज संरचनाओं के कारण फसलों को नियमित पानी मिल रहा है।
एक किसान ने कहा—
“पहले गर्मियों में पानी की समस्या तीव्र हो जाती थी। अब हैंडपंप और कुओं में पानी बेहतर मिल रहा है।”
महिलाओं ने भी कहा कि पानी के लिए दूर तक नहीं जाना पड़ता, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है।
जिला प्रशासन की भूमिका—मॉडल बन गया सूरजपुर
सूरजपुर कलेक्टरेट की टीम ने अभियान को मिशन मोड में चलाया।
- ग्राम सभाओं में जल योजना
- हर गांव में जल संरचना सूची
- सामाजिक निगरानी
- सामुदायिक श्रमदान
जैसे उपायों ने अभियान को सफल बनाया।
राज्य स्तर पर सूरजपुर को कई श्रेणियों में उच्च रैंकिंग मिली है।
समापन—सूरजपुर ने दिखाया जल संरक्षण का मजबूत मॉडल
जल शक्ति जन भागीदारी अभियान में सूरजपुर का प्रदर्शन यह साबित करता है कि जब प्रशासन और जनता मिलकर काम करें, तो जल संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय परिवर्तन संभव है।
सूरजपुर के इस प्रयास ने न केवल भूजल स्तर को सुधारा है, बल्कि भविष्य में जल संकट से निपटने की दिशा में भी प्रदेश के लिए प्रेरक मॉडल प्रस्तुत किया है।








