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छत्तीसगढ़

नानदमाली शाला में शिक्षक पदस्थापना से बच्चों की शिक्षा गुणवत्ता में आया सुधार

रायपुर की नानदमाली शाला में नए शिक्षकों की पदस्थापना से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आया। बच्चों की उपलब्धियां बढ़ीं और अभिभावकों का भरोसा मजबूत हुआ।

रायपुर। शिक्षा को लेकर लंबे समय से शिकायतें थीं कि ग्रामीण और अंचल क्षेत्रों में शिक्षक की कमी से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। लेकिन अब रायपुर जिले की नानदमाली शाला में नए शिक्षकों की पदस्थापना होने से शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल रहा है। बच्चों के सीखने का स्तर बढ़ा है और अभिभावकों का भरोसा भी स्कूल पर मजबूत हुआ है।

लंबे समय से थी शिक्षकों की कमी

नानदमाली शाला में लंबे समय से पर्याप्त संख्या में शिक्षक उपलब्ध नहीं थे। एक-दो शिक्षकों पर पूरे स्कूल की जिम्मेदारी थी, जिससे बच्चों की पढ़ाई अधूरी रह जाती थी। विज्ञान, गणित और अंग्रेज़ी जैसे विषयों में बच्चों को सही मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा था।

हाल ही में पदस्थापना हुई

शासन ने हाल ही में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए कई स्कूलों में पदस्थापना की। नानदमाली शाला में भी योग्य और प्रशिक्षित शिक्षकों को नियुक्त किया गया। अब यहां विषयवार पढ़ाई सुचारू रूप से होने लगी है।

शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार

  • अब बच्चों को हर विषय का अलग-अलग शिक्षक मिला है।
  • कक्षाओं में नियमित पढ़ाई हो रही है।
  • बच्चों की उपस्थिति में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
  • अभिभावक मीटिंग्स में सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आई है।

बच्चों की उपलब्धियां

शिक्षकों की पदस्थापना के बाद बच्चों के प्रदर्शन में सुधार हुआ है।

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  • कई बच्चों ने ब्लॉक और जिला स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लिया।
  • परीक्षा परिणामों में भी पिछली बार की तुलना में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
  • बच्चों में आत्मविश्वास और पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ी है।

अभिभावकों की खुशी

गांव के अभिभावकों ने कहा कि अब उन्हें अपने बच्चों को दूर शहर के स्कूलों में भेजने की जरूरत नहीं है।
एक अभिभावक ने कहा, “अब हमारे बच्चे भी अच्छी पढ़ाई कर पा रहे हैं। शिक्षकों की कमी से जो परेशानी थी, वह खत्म हो गई है।”

शासन की पहल

राज्य सरकार ने हाल ही में ग्रामीण शिक्षा को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। शिक्षकों की नियुक्ति, डिजिटल क्लासरूम और लाइब्रेरी जैसी सुविधाओं पर जोर दिया जा रहा है। नानदमाली शाला में शिक्षक पदस्थापना इसी पहल का हिस्सा है।

स्थानीय समुदाय का योगदान

स्कूल की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने में स्थानीय समुदाय भी सक्रिय हो गया है। गांव के लोगों ने स्कूल में साफ-सफाई और बच्चों को अतिरिक्त शैक्षिक सामग्री उपलब्ध कराने में मदद की है।

भविष्य की दिशा

शिक्षकों का कहना है कि अब उनका लक्ष्य बच्चों को उच्च स्तर की शिक्षा दिलाना है, ताकि वे आगे जाकर प्रतियोगी परीक्षाओं और करियर की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें।

निष्कर्ष

नानदमाली शाला में शिक्षकों की पदस्थापना ने बच्चों की पढ़ाई की दिशा बदल दी है। यह उदाहरण साबित करता है कि शिक्षक ही शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं। समय पर योग्य शिक्षकों की उपलब्धता से ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था मजबूत होती है और बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बनता है।

Heshma lahre
लेखक: Heshma lahre

Heshma lahre is a dedicated journalist at Dabang Awaz, known for her comprehensive coverage across all news categories, delivering accurate and timely reports with integrity.