राजभवन रायपुर में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने पर सामूहिक गायन का आयोजन हुआ, जहां राज्यपाल श्री रमेन डेका सहित नागरिकों ने मां भारती को नमन किया।
रायपुर। देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव से ओतप्रोत वातावरण में छत्तीसगढ़ के राजभवन में गुरुवार को ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विशेष सामूहिक गायन का आयोजन किया गया। यह आयोजन न केवल संगीत का कार्यक्रम था, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा और राष्ट्रीय एकता का जीवंत प्रतीक भी बना।
राज्यपाल श्री रमेन डेका के नेतृत्व में हुए इस आयोजन में मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों, छात्रों और आम नागरिकों ने एक साथ स्वर मिलाकर “वंदे मातरम्” गाया। राजभवन का पूरा प्रांगण “मां भारती” के जयकारों और देशभक्ति की लहर से गूंज उठा। इस अवसर पर उपस्थित सभी लोगों ने देश के प्रति अपने समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा का संकल्प भी दोहराया।
राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि “वंदे मातरम्” केवल एक गीत नहीं, बल्कि यह भारत की आत्मा का स्वर है। यह गीत उस मातृभूमि के प्रति हमारी श्रद्धा का प्रतीक है जिसने हमें जीवन, संस्कृति और पहचान दी। उन्होंने कहा कि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लाखों भारतीयों की प्रेरणा बना। आज भी यह गीत हमें एकता, अनुशासन और समर्पण की राह दिखाता है।
उन्होंने आगे कहा कि जब हम “वंदे मातरम्” गाते हैं, तो वह केवल संगीत नहीं होता — वह राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना का स्पंदन होता है। इस गीत ने भारत को एक सूत्र में बाँधा है और हर पीढ़ी को यह संदेश दिया है कि भारत की शक्ति उसकी विविधता और एकता में निहित है।
राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि 150 वर्ष पूर्व रचित यह गीत आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना स्वतंत्रता संग्राम के समय था। इस गीत की पंक्तियों में मातृभूमि के प्रति प्रेम, श्रद्धा और कृतज्ञता की भावना समाहित है। यह केवल एक सांस्कृतिक धरोहर नहीं, बल्कि भारत की चेतना का अमर प्रतीक है।
कार्यक्रम के दौरान राजभवन परिसर को तिरंगे रंगों की सजावट से सुसज्जित किया गया था। मंच पर स्थानीय कलाकारों ने भी “वंदे मातरम्” की विभिन्न शास्त्रीय शैलियों में प्रस्तुति दी, जिससे कार्यक्रम का माहौल और भी भावपूर्ण बन गया।
राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि यह आयोजन हमें यह स्मरण कराता है कि हमें अपने देश के प्रति हमेशा कृतज्ञ रहना चाहिए। उन्होंने कहा, “भारत की महानता केवल उसकी ऐतिहासिक विरासत में नहीं, बल्कि उसके नागरिकों के कर्म और संकल्प में है।”
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे “वंदे मातरम्” के भाव को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। शिक्षा, सेवा, विज्ञान, कला या कृषि — किसी भी क्षेत्र में कार्य करते हुए यदि हम मातृभूमि के प्रति प्रेम को जीवित रखते हैं, तो वही सच्ची देशभक्ति है।
राज्यपाल ने यह भी कहा कि आज जब भारत ‘विकसित राष्ट्र’ बनने की दिशा में अग्रसर है, तब “वंदे मातरम्” का भाव हमें यह याद दिलाता है कि हमारी प्रगति तभी सार्थक है जब वह समाज के हर वर्ग तक पहुँचे।
कार्यक्रम में राजभवन सचिवालय के अधिकारी-कर्मचारी, शैक्षणिक संस्थानों के छात्र-छात्राएँ, सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रतिनिधि और मीडिया कर्मी भी उपस्थित थे। सभी ने एक साथ स्वर मिलाकर “वंदे मातरम्” गाया और देशभक्ति का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया।
राजभवन के उद्यान में आयोजित इस समारोह में सामूहिक गायन के साथ दीप प्रज्वलन भी किया गया। कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रगान के साथ वातावरण देशभक्ति के भावों से भर उठा। राज्यपाल ने उपस्थित सभी नागरिकों को बधाई देते हुए कहा कि इस आयोजन से पूरे प्रदेश में एकता और सद्भाव का संदेश प्रसारित हुआ है।
कार्यक्रम में कहा गया कि आने वाले समय में “वंदे मातरम्” के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में पूरे छत्तीसगढ़ में इसी प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इससे नई पीढ़ी को अपने इतिहास, संस्कृति और देशभक्ति के मूल्यों से परिचित कराया जाएगा।
राज्यपाल श्री डेका ने अंत में कहा —
“‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, यह हमारी मातृभूमि का प्रणाम है। जब तक भारत का अस्तित्व है, यह गीत हमारी आत्मा में गूंजता रहेगा।”








