LIVE गुरुवार, 14 मई 2026
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छत्तीसगढ़

राज्योत्सव में सीताफल से पल्प और आइसक्रीम बनाने का अनोखा प्रदर्शन, लोगों ने खूब सराहा


राज्योत्सव में सीताफल से पल्प और आइसक्रीम तैयार करने की तकनीक ने आकर्षित किया ध्यान। स्थानीय उत्पादों से उद्योग और स्वरोजगार की नई संभावनाएं उजागर हुईं।

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2025 में इस बार कुछ नया और स्वादिष्ट देखने को मिला। राजधानी रायपुर के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के स्टॉल पर सीताफल से पल्प और आइसक्रीम बनाने का लाइव प्रदर्शन किया गया, जिसने आगंतुकों का खूब ध्यान खींचा।
लोगों ने न केवल इस प्रदर्शन को देखा बल्कि तैयार आइसक्रीम का स्वाद भी लिया। इस मौके पर स्थानीय उत्पादों को मूल्य संवर्धन से जोड़ने की दिशा में सरकार के प्रयासों को सराहा गया।


🍈 सीताफल का स्वाद बना आकर्षण का केंद्र

राज्योत्सव के दूसरे दिन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और कृषि महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में सीताफल (कस्टर्ड एप्पल) पर आधारित उत्पादों का प्रदर्शन आयोजित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि सीताफल से पल्प, आइसक्रीम, शेक, जैम और कन्फेक्शनरी उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं, जिससे स्थानीय किसानों को अतिरिक्त आमदनी प्राप्त हो सकती है।

प्रदर्शन स्थल पर आगंतुकों की भीड़ लगी रही। बच्चे और बुजुर्ग सभी ने सीताफल आइसक्रीम का स्वाद लेकर इसकी सराहना की।
कई लोगों ने इसे “स्थानीय स्वाद को आधुनिक रूप में प्रस्तुत करने का बेहतरीन उदाहरण” बताया।


👩‍🔬 स्थानीय उत्पादों से उद्योग की दिशा

इस अवसर पर विभागीय अधिकारियों ने बताया कि राज्य में सीताफल उत्पादन विशेष रूप से बस्तर, कबीरधाम, राजनांदगांव और रायपुर जिलों में बड़े पैमाने पर होता है।
अब वैज्ञानिक तरीके से इसके संरक्षण और प्रसंस्करण की तकनीक विकसित की जा रही है ताकि किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिल सके।

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“हमारा उद्देश्य है कि छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक और कृषि उत्पादों को ब्रांड के रूप में पहचान मिले।”
— विभागीय अधिकारी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग

उन्होंने बताया कि फूड प्रोसेसिंग तकनीक के जरिए सीताफल पल्प को 6 से 8 महीने तक संरक्षित किया जा सकता है। इससे आइसक्रीम उद्योग और स्थानीय इकाइयों को वर्षभर कच्चा माल उपलब्ध रहेगा।


🏭 स्वरोजगार और स्टार्टअप की संभावनाएं

राज्योत्सव के इस कार्यक्रम ने युवाओं और महिला स्व-सहायता समूहों के लिए नई दिशा दिखाई।
विशेषज्ञों ने कहा कि सीताफल प्रसंस्करण के जरिए छोटे उद्योगों और स्टार्टअप्स को बढ़ावा मिल सकता है।
एक किलोग्राम सीताफल से लगभग 400 से 500 मिलीलीटर पल्प तैयार किया जा सकता है, जिससे आइसक्रीम और पेय उत्पाद बनाए जा सकते हैं।

महिला स्व-सहायता समूहों ने इस तकनीक में रुचि दिखाई और इसे “रोजगार सृजन का सरल और लाभकारी माध्यम” बताया।
राज्य सरकार भी इस दिशा में प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता योजनाएं लागू करने पर विचार कर रही है।


🌿 “वोकल फॉर लोकल” का सफल उदाहरण

राज्योत्सव में यह प्रदर्शन “वोकल फॉर लोकल” अभियान की भावना को भी मजबूत करता दिखा।
स्थानीय उत्पादों से तैयार आधुनिक खाद्य वस्तुएं यह दर्शाती हैं कि छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक संसाधन अब औद्योगिक और आर्थिक विकास के केंद्र बन सकते हैं।

इस अवसर पर उपस्थित आगंतुकों ने कहा कि “सीताफल जैसे पारंपरिक फलों का उपयोग अब सिर्फ खाने तक सीमित नहीं, बल्कि यह रोजगार और नवाचार का साधन बन रहा है।”


🧊 लाइव डेमो में दिखाया गया पूरा प्रोसेस

स्टॉल पर उपस्थित तकनीकी विशेषज्ञों ने सीताफल को पल्प में बदलने की प्रक्रिया लाइव प्रदर्शित की।
उन्होंने बताया कि पहले फलों को साफ करके बीजों से अलग किया जाता है, फिर उन्हें पल्पिंग मशीन में डालकर गाढ़ा पल्प तैयार किया जाता है।
उसके बाद इसमें प्राकृतिक स्वाद और शुगर बैलेंस जोड़कर फ्रीजिंग प्रक्रिया से आइसक्रीम बनाई जाती है।

आइसक्रीम तैयार होने के बाद आगंतुकों को इसका स्वाद चखाया गया।
लोगों ने कहा कि यह स्वाद किसी भी बड़े ब्रांड की आइसक्रीम से कम नहीं था।


🧑‍🌾 किसानों के लिए बड़ा अवसर

सीताफल प्रसंस्करण तकनीक के प्रसार से किसानों को फसल की बर्बादी रोकने और अधिक मूल्य प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
आमतौर पर सीताफल एक मौसमी फल है, जो कुछ ही महीनों में बाजार से गायब हो जाता है।
लेकिन पल्पिंग तकनीक के जरिए अब इसे सालभर उपयोग में लाया जा सकता है।

विभागीय अधिकारियों ने बताया कि आने वाले समय में राज्य सरकार कलेक्शन सेंटर और मिनी प्रोसेसिंग यूनिट्स स्थापित करेगी, ताकि किसानों से सीधा खरीद कर पल्प तैयार किया जा सके।


🏅 आगंतुकों ने की सराहना

राज्योत्सव के आगंतुकों ने कहा कि ऐसे प्रदर्शन स्थानीय नवाचार और ग्रामीण विकास को प्रोत्साहित करते हैं।
कई छात्रों और युवाओं ने तकनीकी जानकारी नोट की और भविष्य में इससे जुड़ने की इच्छा जताई।

“यह पहल राज्य की पहचान बदल देगी। सीताफल अब सिर्फ फल नहीं, बल्कि उद्योग का हिस्सा बनेगा।”
— स्थानीय उद्यमी, रायपुर


🌟 निष्कर्ष : स्वाद और स्वावलंबन का संगम

राज्योत्सव में सीताफल से पल्प और आइसक्रीम बनाने का प्रदर्शन सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं रहा।
यह छत्तीसगढ़ की आर्थिक आत्मनिर्भरता और नवाचार की भावना का प्रतीक बन गया।
राज्य सरकार की पहल और जनता की सहभागिता से आने वाले वर्षों में यह उद्योग छत्तीसगढ़ की नई पहचान बन सकता है।

Heshma lahre
लेखक: Heshma lahre

Heshma lahre is a dedicated journalist at Dabang Awaz, known for her comprehensive coverage across all news categories, delivering accurate and timely reports with integrity.