लखनपुर के पीएम श्री स्कूल में पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने ड्रोन प्रशिक्षण का शुभारंभ किया। 30 घंटे के विशेष कोर्स से विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक का ज्ञान मिलेगा।
अम्बिकापुर । छत्तीसगढ़ सरकार अब दूरस्थ अंचलों के विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। इसी पहल के तहत पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने लखनपुर स्थित पीएम श्री स्कूल में ड्रोन संचालन प्रशिक्षण का शुभारंभ किया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विद्यार्थियों को 30 घंटे का विशेष एडवांस्ड ड्रोन टेक्नोलॉजी कोर्स कराया जाएगा।
आधुनिक शिक्षा की ओर बढ़ता कदम
आज के समय में ड्रोन केवल एक उपकरण नहीं बल्कि कृषि, रक्षा, आपदा प्रबंधन, फोटोग्राफी, पर्यटन और उद्योग जैसे कई क्षेत्रों में अहम भूमिका निभा रहे हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को ऐसी तकनीक से परिचित कराना है जो उनके भविष्य में रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर खोले।
मंत्री का संबोधन
शुभारंभ अवसर पर पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा,
“सरकार चाहती है कि सरगुजा जैसे दूरस्थ अंचल के बच्चे भी आधुनिक तकनीक में पीछे न रहें। ड्रोन प्रशिक्षण से वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे।”
उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में ड्रोन टेक्नोलॉजी से पर्यटन और सांस्कृतिक संरक्षण को भी नई दिशा मिलेगी।
प्रशिक्षण का स्वरूप
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की विशेषताएँ:
- अवधि – 30 घंटे का कोर्स।
- विषयवस्तु – ड्रोन संचालन, मरम्मत, सुरक्षा नियम, एरियल फोटोग्राफी।
- प्रैक्टिकल सेशन – विद्यार्थियों को ड्रोन उड़ाने का प्रत्यक्ष अनुभव।
- उद्देश्य – तकनीकी ज्ञान, नवाचार और रोजगार के अवसर बढ़ाना।
विद्यार्थियों का उत्साह
प्रशिक्षण की शुरुआत से ही विद्यार्थियों में खासा उत्साह देखने को मिला। कई छात्रों ने कहा कि उन्हें पहली बार ड्रोन जैसी तकनीक को नजदीक से जानने और चलाने का अवसर मिल रहा है। एक छात्र ने कहा, “हम जैसे ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों के लिए यह बड़ा मौका है। हम भविष्य में कृषि और व्यवसाय में भी ड्रोन का उपयोग करना चाहेंगे।”
रोजगार और भविष्य की संभावनाएँ
ड्रोन टेक्नोलॉजी आज की दुनिया में तेजी से करियर और स्टार्टअप का नया क्षेत्र बनकर उभर रही है। कृषि क्षेत्र में फसल की निगरानी, औद्योगिक सर्वेक्षण, पर्यटन स्थलों की डिजिटल मैपिंग और फिल्म उद्योग में इसका व्यापक उपयोग हो रहा है। प्रशिक्षण से बच्चों को इन क्षेत्रों में रोजगार और स्वयं का व्यवसाय शुरू करने की दिशा में मदद मिलेगी।
सरकार की पहल और दृष्टिकोण
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक शुरुआत है। भविष्य में अन्य जिलों के स्कूलों में भी इस तरह के एडवांस्ड टेक्नोलॉजी ट्रेनिंग सेंटर खोले जाएंगे।
- डिजिटल शिक्षा का विस्तार – ग्रामीण विद्यार्थियों को आईटी और आधुनिक तकनीक तक पहुंच।
- तकनीकी आत्मनिर्भरता – युवाओं को ‘मेक इन इंडिया’ और ‘स्टार्टअप इंडिया’ से जोड़ना।
- नवाचार को बढ़ावा – स्थानीय समस्याओं का समाधान तकनीकी साधनों से करना।
समाज और अभिभावकों की प्रतिक्रिया
अभिभावकों ने सरकार के इस कदम की सराहना की। उनका मानना है कि अब बच्चों को बड़ी शहरों में पढ़ाई के लिए भेजने की आवश्यकता कम होगी। वहीं शिक्षकों का कहना है कि यह पहल विद्यार्थियों की व्यावहारिक शिक्षा को मजबूत करेगी और उन्हें रोजगारमुखी बनाएगी।
निष्कर्ष
लखनपुर के पीएम श्री स्कूल में शुरू हुआ ड्रोन प्रशिक्षण कार्यक्रम छत्तीसगढ़ के शैक्षणिक और तकनीकी भविष्य की दिशा तय करने वाला कदम है। यह पहल न केवल विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ेगी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और रोजगारोन्मुख भी बनाएगी।








