मीराबाई चानू ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स उद्घाटन में कहा कि एशियन गेम्स पदक जीतना उनका अधूरा सपना है और खिलाड़ियों को प्रेरित किया।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में आयोजित ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026’ (KITG) के भव्य उद्घाटन समारोह में ओलंपिक पदक विजेता भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि एशियन गेम्स में पदक जीतना उनका अभी भी अधूरा सपना है। उनके इस वक्तव्य ने उपस्थित खिलाड़ियों और दर्शकों को प्रेरित किया।
मीराबाई चानू ने अपने संघर्ष, मेहनत और खेल जीवन की यात्रा को साझा करते हुए युवाओं को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने की प्रेरणा दी।
खिलाड़ियों को दिया प्रेरणादायक संदेश
मीराबाई चानू ने कहा कि खेल में सफलता पाने के लिए निरंतर अभ्यास, अनुशासन और आत्मविश्वास बेहद जरूरी है।
उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि वे अपने लक्ष्य पर फोकस रखें और कठिनाइयों से घबराएं नहीं।
संघर्ष और मेहनत की कहानी साझा की
उन्होंने अपने शुरुआती दिनों के संघर्षों को याद करते हुए बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को नहीं छोड़ा।
लगातार मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया।
एशियन गेम्स पदक का सपना अभी बाकी
मीराबाई चानू ने कहा कि उनके करियर में कई उपलब्धियां हैं, लेकिन एशियन गेम्स में पदक जीतना अभी भी एक अधूरा सपना है, जिसे वे पूरा करना चाहती हैं।
उनका यह बयान दर्शाता है कि एक सफल खिलाड़ी भी अपने लक्ष्य के प्रति निरंतर समर्पित रहता है।
युवाओं के लिए बनीं प्रेरणा
उनकी उपस्थिति और विचारों ने कार्यक्रम में मौजूद युवाओं को काफी प्रेरित किया।
उन्होंने खिलाड़ियों को यह विश्वास दिलाया कि मेहनत और लगन से हर सपना पूरा किया जा सकता है।
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का महत्व
इस अवसर पर उन्होंने ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ की सराहना करते हुए कहा कि यह आयोजन जनजातीय प्रतिभाओं को आगे लाने का शानदार मंच है।
इससे देशभर के युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल रहा है।
छत्तीसगढ़ की मेजबानी की सराहना
मीराबाई चानू ने आयोजन की व्यवस्थाओं और छत्तीसगढ़ की मेजबानी की भी सराहना की।
उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन खेलों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
निष्कर्ष
मीराबाई चानू का प्रेरणादायक संबोधन ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026’ के उद्घाटन समारोह की खास झलक रहा। उनका संघर्ष और लक्ष्य के प्रति समर्पण युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना।








