रायपुर में श्रम मंत्री देवांगन ने निर्देश दिए कि सभी श्रमिक कल्याण योजनाओं का लाभ समय पर मिले और भुगतान, पंजीयन व सत्यापन प्रक्रियाओं में तेजी लाई जाए।
रायपुर। रायपुर में आयोजित श्रमिक कल्याण समीक्षा बैठक में श्रम मंत्री श्री देवांगन ने स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य की सभी श्रमिक कल्याण योजनाओं का लाभ पात्र मजदूरों को समय पर और बिना देरी मिले। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य श्रमिकों की आर्थिक सुरक्षा, सामाजिक सम्मान और जीवन स्तर में सुधार लाना है, इसलिए योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, तकनीक का उपयोग और प्रशासनिक जिम्मेदारी अत्यंत आवश्यक है।
बैठक में श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक बोर्ड के सदस्य, जिला कलेक्टरों के प्रतिनिधि, श्रमिक संगठनों के पदाधिकारी और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में विभाग द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों की प्रगति, चुनौतियों और नए सुधारों पर विस्तार से चर्चा की गई।
मंत्री देवांगन का निर्देश—“श्रमिकों को लाभ में देरी बर्दाश्त नहीं”
श्रम मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने श्रमिकों के लिए अनेक महत्वपूर्ण योजनाएँ शुरू की हैं, जिनमें—
- स्वास्थ्य सहायता
- प्रसूति लाभ
- शिक्षा सहायता
- मृत्यु सहायता
- दुर्घटना सहायता
- श्रमिक पंजीयन
- निर्माण श्रमिक कल्याण योजनाएँ
—महत्वपूर्ण रूप से शामिल हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि कई जिलों में फाइलों की धीमी प्रगति और भुगतान में देरी की शिकायतें मिल रही थीं, जिन्हें अब तुरंत सुधारा जाएगा।
कलेक्टरों को दिए कड़े निर्देश
मंत्री देवांगन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिलों को निर्देशित किया कि—
- पंजीकृत श्रमिकों का डेटा 100% अपडेट किया जाए
- योजना लाभ का भुगतान 15 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाए
- अपूर्ण आवेदनों को तेजी से पूरा कराया जाए
- मजदूरों की समस्याओं के समाधान के लिए हर जिले में साप्ताहिक समीक्षा बैठक आयोजित की जाए
उन्होंने कहा कि श्रमिक राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, और उनकी योजनाओं के क्रियान्वयन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
तकनीक आधारित समाधान—डिजिटल वेरिफिकेशन और मोबाइल ऐप्स
बैठक में बताया गया कि जल्द ही राज्य में श्रमिक डिजिटल वेरिफिकेशन सिस्टम लागू किया जाएगा। इससे—
- योजनाओं में फर्जी पंजीयन पर रोक लगेगी
- वास्तविक लाभार्थी की पहचान होगी
- भुगतान प्रक्रिया ऑनलाइन और तेज़ होगी
इसके साथ ही श्रमिक कल्याण योजनाओं की निगरानी के लिए मोबाइल ऐप विकसित किया जा रहा है, जिससे मजदूर अपने आवेदन की स्थिति, योजना लाभ और भुगतान विवरण तुरंत देख सकेंगे।
निर्माण श्रमिकों के लिए नई घोषणाएँ
श्रम विभाग ने बैठक में कुछ नई पहलों की भी जानकारी दी—
1. महिला श्रमिकों के लिए विशेष सहायता
- प्रसूति लाभ राशि बढ़ाने का प्रस्ताव
- कार्यस्थलों पर शौचालय और पेयजल सुविधा अनिवार्य
2. युवाओं के लिए कौशल विकास कार्यक्रम
- 20,000 निर्माण श्रमिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण
- प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन, मशीन ऑपरेटर और फिटर जैसे कोर्स शामिल
3. हेल्थ स्क्रीनिंग कैंप
राज्यभर में मासिक स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे।
श्रमिकों की समस्याएँ—बैठक में हुई खुलकर चर्चा
बैठक में श्रमिकों ने बताया कि कई बार—
- ऑनलाइन आवेदन में तकनीकी दिक्कतें
- दस्तावेज़ अपडेट की समस्या
- भुगतान में देरी
- पंचायत स्तर पर जानकारी का अभाव
जैसी समस्याएँ सामने आती हैं।
मंत्री देवांगन ने सभी मुद्दों को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि विभाग जल्द ही श्रमिक सहायता केंद्र खोलने जा रहा है, ताकि मजदूरों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो।
रायपुर मॉडल—अन्य जिलों में भी लागू होगा
बैठक में रायपुर जिले द्वारा लागू फास्ट-ट्रैक श्रमिक भुगतान मॉडल की प्रस्तुतिकरण किया गया।
इस मॉडल में—
- श्रमिक आवेदन 48 घंटों में सत्यापित
- 7 दिनों में भुगतान
- अपूर्ण आवेदनों के लिए हेल्पलाइन टीम
—जैसी व्यवस्था शामिल है।
श्रम मंत्री ने निर्देश दिया कि यह मॉडल सभी जिलों में अपनाया जाए।
श्रमिकों के बीच जागरूकता बढ़ाने पर जोर
मंत्री ने कहा कि अभी भी कई श्रमिक उन योजनाओं से अनजान हैं जो उनके लिए बनी हैं।
इसके लिए—
- जन-जागृति रथ
- स्ट्रीट प्ले
- पंचायत सभाएँ
- मोबाइल सूचना वाहन
—चालू किए जाएंगे।
साथ ही निर्माण स्थलों पर श्रमिक सूचना बोर्ड भी लगाए जाएंगे।
श्रमिक परिवारों को मिलेगा सामाजिक सुरक्षा कवच
बैठक में प्रस्तावित योजनाओं के अनुसार—
- बच्चों की शिक्षा सहायता
- श्रमिक आवास योजनाएँ
- दुर्घटना बीमा
- पेंशन लाभ
—को मजबूत बनाया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि कामगारों की सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि है और सरकार उन्हें “सामाजिक सुरक्षा कवच” प्रदान करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है।
समापन—तेज़, पारदर्शी और श्रमिक-केंद्रित व्यवस्था की दिशा में प्रयास
रायपुर में हुई यह बैठक श्रमिक कल्याण योजनाओं की समीक्षा और सुधार का महत्वपूर्ण चरण साबित हुई।
श्रम मंत्री देवांगन का स्पष्ट संदेश था—
“श्रमिकों के हित में कोई देरी स्वीकार नहीं।”
इस निर्देश के बाद उम्मीद है कि छत्तीसगढ़ में श्रमिक कल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन की गति और गुणवत्ता दोनों में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।








