विश्व पशु चिकित्सा दिवस पर रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में पशु संरक्षण, जैविक खेती, पशु स्वास्थ्य और मानव स्वास्थ्य के संबंध पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने जोर दिया
रायपुर, 25 अप्रैल।
विश्व पशु चिकित्सा दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में पशुधन संरक्षण, जैविक खेती और मानव स्वास्थ्य के बीच संतुलन के महत्व पर जोर दिया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि पशुओं का संरक्षण केवल कृषि या अर्थव्यवस्था से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और मानव जीवन के संतुलन का मूल आधार है।
कार्यक्रम का आयोजन छत्तीसगढ़ पशु चिकित्सा अधिकारी संघ द्वारा किया गया, जिसमें “पशु चिकित्सकों का मानव स्वास्थ्य एवं पोषण आहार पूर्ति में विशेष योगदान” विषय पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पशु चिकित्सकों, किसानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

पशुधन: समृद्धि और संतुलन का प्रतीक
अपने संबोधन में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि एक समय ऐसा था जब देश में समृद्धि का आकलन पशुधन के आधार पर किया जाता था। उन्होंने कहा कि आज परिस्थितियां बदल गई हैं और पशुओं के प्रति संवेदनशीलता में कमी आई है।
उन्होंने चिंता जताई कि वर्तमान में केवल लगभग 10 प्रतिशत किसानों के पास ही पशुधन बचा है, जिसका मुख्य कारण चारे की समस्या और जागरूकता की कमी है। उन्होंने कहा कि पशुधन केवल आर्थिक संसाधन नहीं, बल्कि पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।

सड़कों पर पशु और बढ़ती दुर्घटनाएं
सांसद ने सड़कों पर पशुओं की बढ़ती संख्या और उनसे होने वाली दुर्घटनाओं पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पशुओं के प्रति संवेदनशीलता में कमी के कारण उन्हें सड़कों पर छोड़ दिया जाता है, जहां वे दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि चारे की कमी के कारण कई पशु कचरे के ढेर में प्लास्टिक खाने को मजबूर होते हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। उन्होंने सुझाव दिया कि हर जिले और ब्लॉक स्तर पर पशु एम्बुलेंस की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए ताकि घायल पशुओं का समय पर उपचार हो सके।
जैविक खेती: स्वास्थ्य और पर्यावरण का आधार
कार्यक्रम के दौरान बृजमोहन अग्रवाल ने जैविक खेती के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके खेतों में बड़ी संख्या में गायें हैं, जिनका उपयोग दूध उत्पादन के बजाय खेती के लिए किया जाता है।
उन्होंने कहा कि गोबर और गौमूत्र आधारित खेती से उगाए गए अनाज और सब्जियां न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित हैं। उन्होंने बताया कि उनके घर में उपयोग होने वाले खाद्य पदार्थ पूरी तरह ऑर्गेनिक पद्धति से तैयार होते हैं।
पशु चिकित्सा और मानव स्वास्थ्य का संबंध
कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर दिया गया कि पशु स्वास्थ्य और मानव स्वास्थ्य एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। विश्व पशु चिकित्सा दिवस के इस अवसर पर विशेषज्ञों ने बताया कि पशुओं की देखभाल से न केवल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होती है, बल्कि बीमारियों की रोकथाम में भी मदद मिलती है।
सांसद ने पशु चिकित्सकों से आह्वान किया कि वे समाज में जागरूकता बढ़ाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं और लोगों को पशु संरक्षण के प्रति प्रेरित करें।

सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं का भी उल्लेख किया, जिनमें ‘बरसीम घास’ जैसी योजनाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि पशुपालन को बढ़ावा मिल सके।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि पशुओं की संख्या में कमी आती है, तो इसका सीधा असर पर्यावरण संतुलन पर पड़ेगा और प्राकृतिक आपदाओं की संभावना बढ़ सकती है।
निष्कर्ष
रायपुर में आयोजित यह कार्यक्रम पशु संरक्षण, जैविक खेती और मानव स्वास्थ्य के बीच संबंध को समझने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ। सांसद बृजमोहन अग्रवाल के विचारों ने यह स्पष्ट किया कि पशुधन केवल कृषि का हिस्सा नहीं, बल्कि जीवन और प्रकृति के संतुलन का आधार है।
यह कार्यक्रम इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि पशुओं के प्रति संवेदनशीलता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जागरूकता के माध्यम से ही एक स्वस्थ समाज और संतुलित पर्यावरण का निर्माण संभव है।







