राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आगामी दो महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों की सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर चाक-चौबंद किया गया है। इन आयोजनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और विदेशी मेहमानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की 200 कंपनियां, जिनमें कुल 20 हजार जवान और 500 कमांडो शामिल हैं, दिल्ली में तैनात किए गए हैं। ये जवान दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर सुरक्षा की कमान संभालेंगे, जिससे 31 मई से 2 जून तक चलने वाले इन सम्मेलनों का सफल और सुरक्षित आयोजन सुनिश्चित हो सके।
राजधानी में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था
दिल्ली पुलिस की विशेष अपील के बाद, राजधानी में दो बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के लिए सुरक्षा का जिम्मा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को सौंपा गया है। CAPF की 200 कंपनियां दिल्ली पहुंच चुकी हैं, जिनमें विशेषज्ञ कमांडो भी शामिल हैं। यह तैनाती दिल्ली के इतिहास में सबसे बड़ी सुरक्षा व्यवस्थाओं में से एक मानी जा रही है। इन जवानों को दिल्ली के विभिन्न रणनीतिक स्थानों, सम्मेलन स्थलों, अति महत्वपूर्ण व्यक्तियों (VVIPs) के ठहरने के स्थानों और उनके यात्रा मार्गों पर तैनात किया जाएगा। इनका मुख्य उद्देश्य किसी भी अप्रिय घटना को रोकना, भीड़ को नियंत्रित करना और विदेशी प्रतिनिधियों को निर्बाध आवागमन प्रदान करना है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि दिल्ली की सड़कें, हवाई अड्डे और प्रमुख सार्वजनिक स्थल पूरी तरह से सुरक्षित रहें।
दो महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन

दिल्ली में आगामी दो सप्ताह के दौरान दो प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है, जिनमें बड़ी संख्या में विदेशी मेहमानों और राष्ट्राध्यक्षों की उपस्थिति अपेक्षित है। पहला महत्वपूर्ण आयोजन 31 मई को होने वाला चौथा भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन (आईएएफएस-IV) है। भारत, अफ्रीकी संघ आयोग के सहयोग से इस सम्मेलन की मेजबानी करेगा, जिसका उद्देश्य भारत और अफ्रीकी देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना तथा विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर तलाशना है। इसके ठीक बाद, 1-2 जून को अंतरराष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (आईबीसीए) शिखर सम्मेलन भी नई दिल्ली में आयोजित होगा। इस सम्मेलन की मेजबानी भी भारत करेगा, और यह बड़ी बिल्लियों जैसे बाघ, शेर, तेंदुआ आदि के संरक्षण के वैश्विक प्रयासों पर केंद्रित होगा, जिसमें विभिन्न देशों के विशेषज्ञ और नीति निर्माता भाग लेंगे। इन दोनों सम्मेलनों की वैश्विक महत्ता को देखते हुए सुरक्षा के उच्चतम मानकों का पालन किया जा रहा है।
सुरक्षा चुनौतियों और तैयारी
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों की मेजबानी करना हमेशा सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक बड़ी चुनौती होती है, खासकर जब इसमें कई राष्ट्राध्यक्ष और उच्च स्तरीय प्रतिनिधि शामिल हों। दिल्ली पुलिस और CAPF की संयुक्त टीमें संभावित खतरों का आकलन कर रही हैं और उनके निवारण के लिए विस्तृत योजनाएं तैयार की गई हैं। इसमें खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान, आतंकवाद विरोधी उपाय, साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल और त्वरित प्रतिक्रिया टीमों (QRT) की तैनाती शामिल है। 20 हजार जवानों की तैनाती से न केवल मानवीय निगरानी बढ़ेगी बल्कि आधुनिक तकनीक जैसे ड्रोन, सीसीटीवी कैमरे और उन्नत संचार प्रणालियों का भी व्यापक उपयोग किया जा रहा है ताकि हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा सके। सुरक्षा बलों द्वारा मॉक ड्रिल और अभ्यास भी किए जा रहे हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
आगे की रणनीति और समन्वय
सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए दिल्ली पुलिस और CAPF के बीच गहन समन्वय स्थापित किया गया है। दोनों बल मिलकर संयुक्त गश्त और नाकाबंदी कर रहे हैं। शहर के प्रवेश और निकास बिंदुओं पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है, और संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। विदेशी प्रतिनिधियों के ठहरने वाले होटलों और सम्मेलन स्थलों के आसपास सुरक्षा घेरा मजबूत किया गया है। यातायात प्रबंधन के लिए भी विशेष योजनाएं बनाई गई हैं ताकि वीवीआईपी आवागमन के दौरान आम जनता को कम से कम असुविधा हो। यह सुनिश्चित करने के लिए कि भारत इन महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की सफलतापूर्वक और सुरक्षित रूप से मेजबानी कर सके, सभी सुरक्षा एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं। यह तैनाती भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं और उसकी सुरक्षा क्षमताओं का भी एक मजबूत प्रदर्शन है।










