रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आईआईएसडी–स्वनिति इनिशिएटिव की ऊर्जा संक्रमण रिपोर्ट का विमोचन किया, जो छत्तीसगढ़ की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता और भविष्य की रणनीति प्रस्तुत करती है।
रायपुर। रायपुर में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आईआईएसडी–स्वनिति इनिशिएटिव द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट ‘मैपिंग इंडियाज स्टेट लेवल एनर्जी ट्रांज़िशन: छत्तीसगढ़’ का औपचारिक विमोचन किया। यह रिपोर्ट छत्तीसगढ़ में ऊर्जा परिवर्तन की मौजूदा स्थिति, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करती है। राज्य सरकार के लिए यह दस्तावेज ऊर्जा नीति को मजबूत करने और सतत विकास को गति देने में अहम साबित हो सकता है।
ऊर्जा परिवर्तन की दिशा में छत्तीसगढ़ की प्रगति
रिपोर्ट में बताया गया है कि छत्तीसगढ़ न केवल देश का ऊर्जा–समृद्ध राज्य है बल्कि बिजली उत्पादन में अग्रणी स्थान रखता है। हालांकि वैश्विक स्तर पर हो रहे ऊर्जा बदलावों के अनुरूप राज्य को कोयले पर निर्भरता कम करते हुए नवीकरणीय ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ने की आवश्यकता है।
आईआईएसडी और स्वनिति द्वारा जारी यह रिपोर्ट राज्य में सौर, जल और अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की वर्तमान क्षमता, निवेश अवसरों और नीति सुधारों की दिशा पर महत्वपूर्ण सुझाव देती है।
मुख्यमंत्री ने दी ऊर्जा क्षेत्र में सुधार की दिशा
विमोचन के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ऊर्जा उत्पादन का केंद्र होने के साथ-साथ अब स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भी नए मापदंड स्थापित कर रहा है। राज्य सरकार उद्योगों और ऊर्जा कंपनियों के साथ मिलकर ऐसी नीतियां बना रही है, जो पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए आर्थिक विकास को भी गति दें।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव समय की मांग है, और छत्तीसगढ़ इस परिवर्तन को अवसर के रूप में देख रहा है।
रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु
रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ के ऊर्जा ढांचे से जुड़े कई अहम पहलुओं का उल्लेख है—
- राज्य की बिजली मांग और आपूर्ति क्षमता
- नवीकरणीय ऊर्जा में बढ़ती संभावनाएं
- कोयले पर निर्भरता और उससे जुड़े पर्यावरणीय प्रभाव
- ऊर्जा दक्षता बढ़ाने की दिशा में किए जा रहे प्रयास
- नीति सुधारों और निवेश के लिए आवश्यक कदम
रिपोर्ट के अनुसार, यदि राज्य नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में रणनीतिक निवेश करता है, तो 2030 तक छत्तीसगढ़ ग्रीन एनर्जी का अग्रणी राज्य बन सकता है।
आईआईएसडी–स्वनिति इनिशिएटिव की भूमिका
इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट (IISD) और स्वनिति इनिशिएटिव ने यह संयुक्त अध्ययन भारत के विभिन्न राज्यों में ऊर्जा संक्रमण की वास्तविक स्थिति को दस्तावेज़ रूप में प्रस्तुत करने के लिए किया है।
छत्तीसगढ़ संस्करण में राज्य की विशेष परिस्थितियों, औद्योगिक जरूरतों और ग्रामीण क्षेत्रों की ऊर्जा खपत का विस्तृत अध्ययन शामिल है।
विमोचन कार्यक्रम में शामिल विशेषज्ञों के विचार
कार्यक्रम में मौजूद ऊर्जा विशेषज्ञों, पर्यावरणविदों और नीति निर्माताओं ने छत्तीसगढ़ को ऊर्जा बदलाव के लिए तैयार बताते हुए कहा कि राज्य के पास प्राकृतिक संसाधन, औद्योगिक आधार और तकनीकी क्षमता है, जिनके उपयोग से स्वच्छ ऊर्जा निवेश को बढ़ावा दिया जा सकता है।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि रिपोर्ट भविष्य की ऊर्जा नीति के लिए एक मजबूत रूपरेखा प्रदान करती है।
नवीकरणीय ऊर्जा पर राज्य सरकार का फोकस
छत्तीसगढ़ सरकार पहले से ही सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में कई योजनाओं पर कार्य कर रही है।
छतों पर सोलर पैनल लगाने, ग्रामीण सोलर पंप, सोलर पार्क विकास और औद्योगिक संस्थानों को ग्रीन एनर्जी अपनाने के लिए प्रोत्साहन जैसे कदम राज्य की ऊर्जा रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
उद्योग जगत में उत्साह
रिपोर्ट के विमोचन के बाद उद्योग जगत में भी सकारात्मक माहौल देखा गया। कई कंपनियों ने संकेत दिया कि छत्तीसगढ़ में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की क्षमता काफी अधिक है।
विशेष रूप से सोलर और बैटरी स्टोरेज क्षेत्र में कंपनियों ने नए परियोजनाओं की संभावना पर चर्चा की।
जलवायु परिवर्तन से मुकाबले में मिलेगा लाभ
भारत ने 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने का जो वादा किया है, उसकी दिशा में छत्तीसगढ़ जैसे ऊर्जा–समृद्ध राज्यों की भूमिका बेहद अहम है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि राज्य ऊर्जा परिवर्तन की गति बढ़ाता है, तो वह न केवल पर्यावरणीय लाभ हासिल करेगा बल्कि आर्थिक रूप से भी मजबूत बनेगा।
एनर्जी ट्रांज़िशन से ग्रामीण क्षेत्रों को बड़ा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ेगा, बिजली आपूर्ति स्थिर होगी और किसानों को सौर ऊर्जा आधारित कृषि सुविधाएं मिलेंगी।
रिपोर्ट इस क्षेत्र में विशेष रणनीतियों को अपनाने की सिफारिश करती है।
आगे की रणनीति
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि रिपोर्ट में दिए गए सुझावों का गहन अध्ययन कर उन्हें राज्य की ऊर्जा नीति में शामिल करने की संभावनाएं तलाशें।
अगर रणनीतियों का सही तरीके से पालन किया जाता है, तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ ऊर्जा परिवर्तन का मॉडल राज्य बन सकता है।








