मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रायपुर में आयोजित दही हांडी प्रतियोगिता में शामिल हुए। युवाओं के जोश, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और परंपरा ने जन्माष्टमी उत्सव को यादगार बना दिया।
रायपुर। जन्माष्टमी के पावन अवसर पर राजधानी में आयोजित भव्य ‘दही हांडी प्रतियोगिता’ में इस बार खास आकर्षण रहा – मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का शामिल होना। आयोजन स्थल पर पहुंचते ही मुख्यमंत्री का जोरदार स्वागत हुआ। उत्साह से भरे युवाओं और श्रद्धालुओं ने पारंपरिक अंदाज़ में ‘गोविंदा आला रे’ के नारों से वातावरण को गुंजायमान कर दिया।
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परंपरा और उल्लास का संगम
दही हांडी प्रतियोगिता सिर्फ एक खेल नहीं बल्कि परंपरा, आस्था और सामूहिकता का प्रतीक मानी जाती है। कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर हर साल शहरों और गांवों में इसका आयोजन किया जाता है। इस परंपरा में युवाओं की टोली ‘गोविंदा पथक’ बनाकर ऊंचाई पर लटकी दही हांडी को फोड़ने का प्रयास करती है।
इस बार रायपुर में आयोजित प्रतियोगिता में मुख्यमंत्री के शामिल होने से लोगों में उत्साह कई गुना बढ़ गया।
मुख्यमंत्री का संबोधन
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस मौके पर युवाओं को संबोधित करते हुए कहा –
“दही हांडी प्रतियोगिता भाईचारे, एकजुटता और टीमवर्क की सीख देती है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने बालपन में जो ऊर्जा और उमंग दिखाई, वही आज युवाओं में देखने को मिलती है। हमारी संस्कृति की यही खूबसूरती है कि हम हर त्योहार को उत्साह और सामूहिकता के साथ मनाते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि युवाओं को अपनी ऊर्जा सही दिशा में लगाकर समाज और राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए।
प्रतियोगिता की झलकियां
- इस बार दही हांडी लगभग 25 फीट की ऊंचाई पर बांधी गई थी।
- दर्जनों युवाओं की टोली ने मानवीय पिरामिड बनाकर हांडी फोड़ने का प्रयास किया।
- कई बार असफल होने के बाद अंततः एक टीम ने सफलतापूर्वक दही हांडी फोड़ दी।
- जैसे ही हांडी टूटी, दही और मिठाइयां युवाओं पर बरस गईं और माहौल जयकारों से गूंज उठा।
महिलाओं और बच्चों की भागीदारी
आयोजन में महिलाओं और बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। महिलाओं ने भजन-कीर्तन गाए और बच्चों ने भगवान कृष्ण और राधा की झांकियों को प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम
मुख्यमंत्री के आगमन से पहले सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। स्थानीय कलाकारों ने छत्तीसगढ़ी लोकगीत और नृत्य प्रस्तुत किए। साथ ही कृष्ण जन्म की लीलाओं पर आधारित नाटिका ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सुरक्षा और प्रबंधन
दही हांडी प्रतियोगिता के दौरान प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। पुलिस और एनडीआरएफ की टीम मौके पर तैनात रही ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना को रोका जा सके।
राजनीतिक और सामाजिक संदेश
मुख्यमंत्री का इस आयोजन में शामिल होना केवल धार्मिक पहलू तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने युवाओं से नशामुक्त समाज बनाने और शिक्षा पर ध्यान देने का आह्वान भी किया। साथ ही, उन्होंने कहा कि ऐसे त्योहार हमें सामाजिक सौहार्द और एकजुटता का संदेश देते हैं।
जनता की प्रतिक्रिया
लोगों का कहना था कि मुख्यमंत्री का इस तरह आम जनता के बीच आना और त्योहारों में शामिल होना, जनता और नेतृत्व के बीच की दूरी को कम करता है। एक श्रद्धालु ने कहा – “मुख्यमंत्री जी को हमारे बीच देखकर बहुत खुशी हुई। यह त्योहार और भी यादगार बन गया।”
भविष्य की दृष्टि
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य सरकार आने वाले समय में इस तरह के सांस्कृतिक आयोजनों को बढ़ावा देगी और युवाओं को खेल व संस्कृति दोनों में प्रोत्साहित किया जाएगा।







