रायपुर से डोंगरगढ़ तक 24 मार्च से क्रूसमार्ग पदयात्रा निकलेगी, जिसमें श्रद्धालु विश्व शांति, मानव कल्याण और भाईचारे का संदेश देंगे।
रायपुर। विश्व शांति, मानव कल्याण और देश-प्रदेश में सुख-समृद्धि व आपसी भाईचारे के उद्देश्य से रायपुर से डोंगरगढ़ तक क्रूसमार्ग पदयात्रा का आयोजन 24 मार्च से किया जाएगा। यह चार दिवसीय पदयात्रा संत जोसेफ महा गिरजाघर, बैनर बाजार रायपुर से शुरू होकर कलवारी पहाड़, डोंगरगढ़ तक पहुंचेगी।
इस पदयात्रा का आयोजन क्रूसमार्ग पदयात्रा आयोजन समिति द्वारा पिछले 10 वर्षों से लगातार किया जा रहा है, जो अब सामाजिक और धार्मिक समरसता का प्रतीक बन चुका है।
हर वर्ष सैकड़ों श्रद्धालु होते हैं शामिल
आयोजन समिति के अनुसार इस पदयात्रा में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से लगभग 350 ईसाई समुदाय के सदस्य शामिल होंगे। श्रद्धालु चार दिनों तक पैदल यात्रा करते हुए प्रार्थना और रोजरी विनती के माध्यम से शांति और सद्भाव का संदेश देंगे।
यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि समाज में एकता और भाईचारे को मजबूत करने का भी माध्यम बन रही है।
मानव सेवा ही ईश्वर सेवा का संदेश
क्रूसमार्ग पदयात्रा आयोजन समिति के संयोजक एवं संस्थापक गुरविंदर सिंह चडडा, विजय रविकांत रुंडा और प्रणब शरद टोप्पो ने बताया कि सभी धर्मों के पवित्र ग्रंथों में मानव सेवा को सर्वोच्च स्थान दिया गया है।
उन्होंने कहा कि इसी विचार को आत्मसात करते हुए यह पदयात्रा निकाली जाती है, जिसमें प्रभु यीशु मसीह के क्रूस बलिदान की स्मृति में प्रार्थना की जाती है।
गुड फ्राइडे से पूर्व आयोजित होती है यात्रा
यह पदयात्रा हर वर्ष गुड फ्राइडे से एक सप्ताह पूर्व आयोजित की जाती है। श्रद्धालु पूरे मार्ग में प्रार्थना करते हुए विश्व शांति, मानव कल्याण और समाज में प्रेम एवं सद्भाव की कामना करते हैं।
आयोजकों का मानना है कि इस तरह के आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और लोगों को एकजुट करते हैं।
सर्व धर्म समभाव का संदेश
पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सर्व धर्म समभाव और राष्ट्रीय एकता का संदेश भी देती है।
आयोजकों ने कहा कि “सर्व धर्म ही राष्ट्र का श्रृंगार है,” और इसी सोच के साथ यह यात्रा वर्षों से लगातार आयोजित की जा रही है।
समाज में बढ़ रहा है प्रभाव
पिछले एक दशक से आयोजित हो रही इस पदयात्रा का प्रभाव अब व्यापक स्तर पर देखने को मिल रहा है। विभिन्न समुदायों के लोग इस पहल की सराहना कर रहे हैं और इसे सामाजिक सौहार्द का एक मजबूत उदाहरण मान रहे हैं।
शांति और एकता की अनूठी पहल
यह पदयात्रा न केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि यह समाज को जोड़ने और सकारात्मक संदेश देने का भी माध्यम है।
रायपुर से डोंगरगढ़ तक की यह यात्रा प्रदेश में शांति, एकता और भाईचारे को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
निष्कर्ष
क्रूसमार्ग पदयात्रा विश्व शांति और मानव कल्याण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम बन चुकी है। यह पहल समाज में एकता, सद्भाव और सहयोग की भावना को मजबूत करती है।







