छत्तीसगढ़ के औद्योगिक शहर कोरबा में हाल ही में घंटों बिजली गुल रहने से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। शहर के कई प्रमुख इलाकों में लंबे समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रही, जिससे भीषण गर्मी और उमस के बीच नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस अप्रत्याशित बिजली कटौती ने न केवल दैनिक गतिविधियों को बाधित किया, बल्कि पेयजल संकट और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी नकारात्मक असर डाला, जिससे स्थानीय लोगों में बिजली विभाग और प्रशासन के प्रति गहरा रोष व्याप्त है।
क्या हुआ
पिछले कुछ दिनों से कोरबा शहर में बिजली कटौती एक बड़ी समस्या बनकर उभरी है। हाल ही में, शहर के कई हिस्सों में लगभग छह से आठ घंटे तक बिजली गुल रही, जिससे रात का तापमान अधिक होने के कारण लोगों का जीना दूभर हो गया। टीपी नगर, कोसाबाड़ी, मुड़ापार और सीएसईबी कॉलोनी जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बिजली गुल होने से अंधेरा छा गया। बिजली विभाग के सूत्रों के अनुसार, यह समस्या तकनीकी खराबी और अत्यधिक भार (ओवरलोडिंग) के कारण उत्पन्न हुई, लेकिन स्थानीय निवासियों का आरोप है कि बिजली विभाग समय रहते इन समस्याओं का समाधान करने में विफल रहा। इस तरह की लंबी कटौती पिछले कुछ समय से बढ़ गई है, जिससे शहर की बिजली वितरण व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
जनजीवन पर गहरा असर
बिजली कटौती का सीधा असर कोरबा के आम जनजीवन पर पड़ा है। भीषण गर्मी के मौसम में घंटों तक बिजली न होने से घरों में पंखे, कूलर और एयर कंडीशनर बंद हो गए, जिससे बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। पेयजल आपूर्ति भी बाधित हुई, क्योंकि पानी की टंकियों तक पानी पहुंचाने वाले मोटर पंप बिजली के अभाव में काम नहीं कर सके। कई इलाकों में लोगों को पानी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा या दूर से पानी लाना पड़ा। छोटे दुकानदारों और व्यवसायों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा, क्योंकि बिजली न होने से उनके कारोबार ठप पड़ गए। रात के समय अंधेरा छा जाने से सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी बढ़ गईं, जिससे लोग घरों से बाहर निकलने से कतराने लगे। अस्पतालों और क्लीनिकों में भी जेनरेटर पर निर्भरता बढ़ गई, जिससे अतिरिक्त लागत का बोझ बढ़ा।
प्रशासन और बिजली विभाग पर सवाल
लंबे समय तक बिजली गुल रहने से स्थानीय निवासियों में कोरबा विद्युत वितरण कंपनी और जिला प्रशासन के प्रति गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि बिजली विभाग पूर्व सूचना दिए बिना ही घंटों बिजली काट देता है और शिकायत करने पर भी त्वरित समाधान नहीं होता। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त की है और विभाग से जवाबदेही तय करने की मांग की है। नागरिकों ने आरोप लगाया है कि शहर की बढ़ती आबादी और औद्योगिक गतिविधियों के बावजूद बिजली के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है, जिसके कारण आए दिन इस तरह की समस्याएं उत्पन्न होती हैं। यह स्थिति तब है जब छत्तीसगढ़ राज्य को बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भर माना जाता है।
आगे क्या
कोरबा में लगातार हो रही बिजली कटौती के मद्देनजर स्थानीय प्रशासन और बिजली विभाग पर दबाव बढ़ गया है। नागरिकों ने विभाग से जल्द से जल्द स्थायी समाधान निकालने और भविष्य में इस तरह की अघोषित कटौतियों से बचने के लिए उचित कदम उठाने की मांग की है। विभाग ने आश्वासन दिया है कि तकनीकी खामियों को दूर करने और वितरण प्रणाली को मजबूत करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन लोगों को इन आश्वासनों पर तभी भरोसा होगा जब बिजली आपूर्ति सामान्य और विश्वसनीय होगी। यदि स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो आने वाले दिनों में और बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।




