देशभर के Indane, भारत पेट्रोलियम और भारत गैस के लाखों LPG उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण खबर है, क्योंकि 1 जुलाई 2026 से रसोई गैस सिलेंडर (LPG) और पाइप से आने वाली गैस (PNG) से संबंधित कई बड़े नियम बदलने जा रहे हैं। इन नए नियमों का पालन न करने पर उपभोक्ताओं का गैस कनेक्शन कट भी सकता है। केंद्र सरकार ने गैस आपूर्ति को सुव्यवस्थित करने और पाइपलाइन गैस के उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ये बदलाव किए हैं, जिसका सीधा असर सिलेंडर बुकिंग से लेकर डिलीवरी और मौजूदा कनेक्शन की स्थिति पर पड़ेगा।
बुकिंग और डिलीवरी के नए नियम
नए नियमों के तहत, LPG सिलेंडर की बुकिंग और डिलीवरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब गैस सिलेंडर की बुकिंग पर सख्ती बढ़ा दी गई है। शहरी क्षेत्रों के ग्राहक अब एक सिलेंडर लेने के 25 दिन बाद ही दूसरा सिलेंडर बुक कर पाएंगे, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के ग्राहकों के लिए यह अवधि बढ़ाकर 45 दिन कर दी गई है। यह नियम सिलेंडर के दुरुपयोग को रोकने और यह सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है कि उपभोक्ता अपनी वास्तविक आवश्यकता के अनुसार ही गैस सिलेंडर बुक करें। इसके अतिरिक्त, गैस डिलीवरी के समय OTP (वन टाइम पासवर्ड) देना अनिवार्य कर दिया गया है। इसका अर्थ है कि सिलेंडर की डिलीवरी से पहले आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक OTP आएगा और उसी के सत्यापन के बाद ही डिलीवरी पूरी मानी जाएगी। यह कदम डिलीवरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और अनधिकृत डिलीवरी को रोकने के लिए उठाया गया है।
PNG कनेक्शन धारकों पर असर
सरकार का एक प्रमुख उद्देश्य देश में पाइपलाइन के माध्यम से गैस (PNG) की आपूर्ति को बढ़ावा देना है, जो LPG की तुलना में अधिक सुरक्षित और लागत प्रभावी मानी जाती है। इसी कड़ी में, नए नियमों के तहत उन उपभोक्ताओं पर सीधा असर पड़ेगा जिनके पास पहले से ही PNG कनेक्शन मौजूद है या जिनके क्षेत्र में PNG का बुनियादी ढांचा उपलब्ध है। जिन ग्राहकों के पास पहले से PNG कनेक्शन है, उनका HP, Indane या भारत गैस का LPG कनेक्शन एक महीने के भीतर स्वतः काट दिया जाएगा। वहीं, जिन क्षेत्रों में पाइपलाइन के जरिए गैस पहुंचाने का बुनियादी ढांचा मौजूद है, वहां LPG उपभोक्ताओं को तीन महीने के भीतर PNG सिस्टम में बदलना अनिवार्य होगा। इस बदलाव के लिए सरकार ने जून 2026 की समय सीमा तय की है, जिसके बाद ऐसे क्षेत्रों में LPG कनेक्शन काट दिए जाएंगे। यह कदम सरकार की ऊर्जा नीति का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य स्वच्छ ईंधन विकल्पों को बढ़ावा देना और LPG पर निर्भरता कम करना है।
ई-केवाईसी और कनेक्शन सरेंडर
उपभोक्ताओं के लिए एक और महत्वपूर्ण निर्देश ई-केवाईसी (e-KYC) सत्यापन से संबंधित है। सभी एलपीजी कनेक्शन धारकों के लिए अपना ई-केवाईसी करवाना अनिवार्य है, जिसकी अंतिम तिथि 30 जून (वर्तमान वर्ष के लिए) निर्धारित की गई है। ई-केवाईसी प्रक्रिया का उद्देश्य उपभोक्ता डेटा को अपडेट करना, पारदर्शिता बढ़ाना और डुप्लीकेट या फर्जी कनेक्शनों को रोकना है। यदि कोई उपभोक्ता अपनी मर्जी से LPG कनेक्शन सरेंडर करता है, तो उसे एक कूपन मिलेगा। इस कूपन का उपयोग भविष्य में जरूरत पड़ने पर वे अपना एलपीजी कनेक्शन फिर से सक्रिय कराने के लिए कर सकेंगे। यह सुविधा उन लोगों के लिए है जो अस्थायी रूप से LPG का उपयोग बंद करना चाहते हैं, लेकिन भविष्य में इसे फिर से शुरू करने की संभावना रखते हैं।
उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण संदेश
ये सभी नियम उपभोक्ताओं के लिए जानना और उनका पालन करना बेहद जरूरी है, क्योंकि इनका सीधा संबंध उनकी रसोई गैस की उपलब्धता से है। सरकार का सख्त निर्देश है कि यदि इन बदले हुए नियमों के मुताबिक उपभोक्ताओं ने आवश्यक बदलाव नहीं किए, तो उनका गैस कनेक्शन काट दिया जाएगा। यह उपभोक्ताओं के लिए एक चेतावनी है कि वे समय रहते अपने कनेक्शन की स्थिति की जांच करें और सभी अनिवार्य प्रक्रियाओं को पूरा करें। LPG वितरकों और गैस कंपनियों को भी इन नियमों को लागू करने और उपभोक्ताओं को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं। उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने संबंधित गैस प्रदाता से संपर्क करके इन नए नियमों के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करें और 30 जून तक ई-केवाईसी जैसी सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा कर लें, ताकि 1 जुलाई 2026 से लागू होने वाले बड़े बदलावों से पहले वे पूरी तरह तैयार रहें और किसी भी असुविधा से बच सकें।




