बृजमोहन अग्रवाल, पहलगाम बैठक, जम्मू कश्मीर, बैंकिंग सुधार, ऋण वितरण, MSME, स्किल डेवलपमेंट, फूड प्रोसेसिंग, कारीगर, उद्योग
रायपुर। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आयोजित प्राक्कलन समिति (Estimate Committee) की महत्वपूर्ण बैठक में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने राज्य के आर्थिक विकास, बैंकिंग प्रणाली और रोजगार सृजन को लेकर कई अहम मुद्दे उठाए। बैठक में उन्होंने विशेष रूप से ऋण वितरण में आई गिरावट, योजनाओं के कमजोर क्रियान्वयन और पारंपरिक कारीगरी के संरक्षण पर चिंता जताई।
यह बैठक “एमएसएमई और भारी उद्योग क्षेत्र के संवर्धन में बैंकों की भूमिका” विषय पर आयोजित की गई थी, जिसमें भारतीय स्टेट बैंक (SBI), जम्मू एवं कश्मीर बैंक, वित्त मंत्रालय, MSME मंत्रालय और स्थानीय प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे

यह बैठक “एमएसएमई और भारी उद्योग क्षेत्र के संवर्धन में बैंकों की भूमिका” विषय पर आयोजित की गई थी, जिसमें भारतीय स्टेट बैंक (SBI), जम्मू एवं कश्मीर बैंक, वित्त मंत्रालय, MSME मंत्रालय और स्थानीय प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैंकिंग डिस्पर्समेंट में गिरावट पर सवाल
बैठक के दौरान सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने वर्ष 2023-24 की तुलना में 2025-26 में ऋण वितरण (Loan Disbursement) में कमी आने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने बैंकों से स्पष्ट जवाब मांगते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं में पंजीकरण तो हो रहा है, लेकिन वास्तविक लाभार्थियों तक धन पहुंचने की गति बेहद धीमी है।
उन्होंने विशेष रूप से मुद्रा और स्वनिधि योजनाओं का जिक्र करते हुए ₹5 लाख, ₹10 लाख और ₹20 लाख तक के ऋण वितरण का विस्तृत डेटा मांगा। उनका कहना था कि इससे यह स्पष्ट होगा कि योजनाओं का लाभ वास्तव में कितने लोगों तक पहुंच रहा है।
कौशल विकास और कारीगरों की चिंता
सांसद अग्रवाल ने स्थानीय युवाओं और महिलाओं के कौशल विकास (Skill Development) पर जोर देते हुए कहा कि पारंपरिक कारीगरी धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है। उन्होंने कहा कि बड़े कारोबारी इस क्षेत्र में हावी हो रहे हैं, जिससे छोटे कारीगरों को नुकसान हो रहा है।
उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि पारंपरिक कला और शिल्प को बचाने के लिए क्या नई योजनाएं बनाई जा रही हैं और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौन से ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

फूड प्रोसेसिंग और उद्योग विकास पर जोर
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि केवल कृषि आधारित अर्थव्यवस्था से जम्मू-कश्मीर की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि राज्य में फलों और सब्जियों की प्रचुरता है, लेकिन फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स की कमी के कारण किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता।
उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक और जम्मू एवं कश्मीर बैंक सहित संबंधित विभागों से पूछा कि वे वैल्यू एडिशन और प्रोसेसिंग के लिए क्या ठोस कदम उठा रहे हैं।
धारा 370 के बाद विकास और रोजगार पर फोकस
बैठक में सांसद ने अनुच्छेद 370 का निरसन के बाद की स्थिति का भी विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद पर नियंत्रण के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती जम्मू-कश्मीर के लोगों को मुख्यधारा से जोड़ना है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे ऐसी योजनाएं तैयार करें जिससे स्थानीय युवाओं और महिलाओं को रोजगार के अवसर मिल सकें। साथ ही, हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर बड़े हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स और औद्योगिक इकाइयों की स्थापना पर भी जोर दिया।
पीएम विश्वकर्मा योजना और MSME रोडमैप
सांसद ने पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत 13,000 से अधिक रजिस्ट्रेशन होने के बावजूद कम वितरण पर नाराजगी जताई। उन्होंने समिति के अध्यक्ष के सामने प्रस्ताव रखा कि MSME के माध्यम से जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए एक विशेष रोडमैप तैयार किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बैंकिंग संस्थानों और सरकारी विभागों को मिलकर काम करना होगा ताकि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। “जब तक युवाओं को कौशल और रोजगार से नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक विकास अधूरा रहेगा,” उन्होंने कहा।
निष्कर्ष
पहलगाम में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक ने जम्मू-कश्मीर के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं को सामने रखा। सांसद बृजमोहन अग्रवाल के सुझावों ने यह स्पष्ट किया कि राज्य में बैंकिंग प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने, उद्योगों को बढ़ावा देने और युवाओं को रोजगार से जोड़ने की दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
यदि इन सुझावों को प्रभावी रूप से लागू किया जाता है, तो जम्मू-कश्मीर न केवल आर्थिक रूप से मजबूत होगा, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ेगा।










