धान उपार्जन समितियों की पारदर्शी व्यवस्था से किसान संतुष्ट हैं। तौल, भुगतान और डिजिटल प्रक्रियाओं में सुधार ने खरीदी व्यवस्था को सुचारू बनाया और शिकायतें कम हुईं।
रायपुर । रायपुर सहित प्रदेशभर में धान उपार्जन का कार्य इस वर्ष सुचारू रूप से जारी है, और किसान समितियों की पारदर्शी व्यवस्था से पूरी तरह संतुष्ट दिखाई दे रहे हैं। उपार्जन केंद्रों पर सुविधाओं में सुधार, डिजिटल व्यवस्था, कतार प्रबंधन, तौल प्रक्रिया और भुगतान प्रणाली में तेजी ने किसानों का विश्वास बढ़ाया है। कृषि विभाग और स्थानीय समितियों के अनुसार इस बार शिकायतों की संख्या बेहद कम रही है, जो व्यवस्था की पारदर्शिता और दक्षता को दर्शाता है।
धान खरीदी की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा समय पर उठाए गए प्रबंधनात्मक कदमों और तकनीकी व्यवस्था ने उपार्जन केंद्रों को और अधिक सक्षम बनाया है। किसानों ने भी कहा कि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार प्रक्रियाएँ सहज, तेज और सुविधाजनक हैं।
किसानों ने कहा— “तौल में पारदर्शिता, भुगतान भी समय पर”
कई किसानों ने उपार्जन केंद्रों में किए गए बदलावों की सराहना की। उन्होंने बताया कि—
- तौल मशीनें ठीक तरीके से कैलिब्रेटेड
- तौलकर्मी पारदर्शी और सटीक तौल
- प्रतीक्षा समय कम
- टोकन प्रणाली व्यवस्थित
- शिकायतों का तुरंत समाधान
- भुगतान समय पर बैंक खाते में जमा
इन सुधारों के कारण किसानों में संतोष और विश्वास बढ़ा है।
कुछ किसानों ने कहा—
“इस बार केंद्रों में भीड़ कम है, तौल में पारदर्शिता है और किसी तरह की परेशानी नहीं हो रही।”
डिजिटल प्रबंधन से बढ़ी सुविधा
धान उपार्जन समितियों ने इस वर्ष डिजिटल प्रबंधन को और मजबूत किया है।
प्रमुख सुविधाओं में शामिल हैं—
- ऑनलाइन पंजीयन
- टोकन जनरेशन प्रणाली
- मोबाइल पर सूचना
- डिजिटल रिकॉर्ड
- भुगतान ट्रैकिंग
किसानों ने कहा कि डिजिटल व्यवस्था से पहले की तरह कागजी प्रक्रिया में समय बर्बाद नहीं होता और बिना किसी भ्रम के काम तेज गति से पूरा हो जाता है।
उपार्जन केंद्रों में बेहतर सुविधाएँ
सरकार और समितियों ने केंद्रों में मूलभूत सुविधाओं को भी बेहतर किया है—
- छाया शेड
- पेयजल
- बैठने की व्यवस्था
- सुरक्षा व्यवस्था
- ट्रॉलियों के लिए अलग पार्किंग
- सफाई और स्वच्छता
इस कारण किसानों को लंबी प्रतीक्षा के दौरान भी असुविधा नहीं हो रही है।
अधिकारियों की लगातार निगरानी
कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, तहसीलदारों और निरीक्षकों द्वारा उपार्जन केंद्रों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है।
वे—
- तौल प्रक्रिया
- खरीदी की गुणवत्ता
- भंडारण व्यवस्था
- शिकायत निवारण
जैसे बिंदुओं की समीक्षा करके तुरंत सुधारात्मक कदम उठा रहे हैं।
समितियों की कार्यशैली से बढ़ा भरोसा
धान उपार्जन समितियों ने इस बार टीम वर्क दिखाया है।
समिति सदस्य किसानों का सहयोग कर रहे हैं—
- तौल में मदद
- दस्तावेज़ों की जांच
- गाड़ियों की सुचारू आवाजाही
- टोकन के नियमानुसार वितरण
किसानों ने कहा कि समितियों का रवैया सहयोगी और सकारात्मक है, जिससे काम जल्दी निपट रहा है।
भुगतान व्यवस्था की गति में भी सुधार
इस वर्ष भुगतान प्रक्रिया और अधिक तेज हो गई है।
किसानों के अनुसार—
- तौल के 24–48 घंटे में राशि खाते में जमा
- एसएमएस से अपडेट
- सत्यापन में तेजी
कई किसानों ने कहा कि समय पर भुगतान होने से रबी फसल की तैयारी में आसानी हो रही है।
किसान-हितैषी नीतियों का असर
धान खरीदी प्रक्रिया में सुधार राज्य सरकार की किसान-हितैषी नीतियों का परिणाम है।
सरकार ने—
- समर्थन मूल्य
- टोकन प्रबंधन
- तौल मशीनों का परीक्षण
- समिति प्रशिक्षण
- धान परिवहन की व्यवस्था
- भंडारण क्षमता में वृद्धि
पर विशेष ध्यान दिया है।
इन प्रयासों का असर सीधे किसानों की संतुष्टि में दिखाई दे रहा है।
कई जिलों से सकारात्मक प्रतिक्रिया
रायपुर, बलौदाबाजार, राजनांदगांव, धमतरी, महासमुंद और बस्तर क्षेत्र से लगातार सकारात्मक फीडबैक मिल रहा है।
किसानों ने कहा कि—
- इस बार निरीक्षण अधिक
- अधिकारी उपलब्ध
- प्रक्रिया सरल
- परिवहन में देरी नहीं
इन कारणों से उपार्जन की गति बेहतर और संतुलित बनी हुई है।
धान उपार्जन केंद्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था का केंद्र बने
उपार्जन सीज़न के दौरान गाँवों में चहल-पहल और आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि देखी जा रही है।
किसान, ट्रांसपोर्टर, मजदूर, व्यापारी और समितियाँ सभी सक्रिय हैं।
इससे स्थानीय बाजारों में भी तेजी आई है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान पड़ी है।








