वन मंत्री केदार कश्यप ने नंदनवन-नंदन पक्षी विहार का निरीक्षण कर प्रबंधन, पशु-पक्षी संरक्षण और पर्यटक सुविधाओं की समीक्षा की और सुधार के निर्देश दिए।
रायपुर । रायपुर के प्रसिद्ध नंदनवन-नंदन पक्षी विहार का वन मंत्री केदार कश्यप ने आज निरीक्षण किया। उन्होंने पार्क में पशु-पक्षियों की देखरेख, स्वच्छता, सुरक्षा, बुनियादी प्रबंधन और पर्यटकों के लिए सुविधाओं की विस्तार से समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान वरिष्ठ वन अधिकारियों, प्राणीपालकों और पार्क प्रबंधन टीम ने उन्हें विस्तृत जानकारी दी।
नंदनवन छत्तीसगढ़ की राजधानी के प्रमुख पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण स्थलों में से एक है, जहां विभिन्न प्रजातियों के पक्षी और वन्य प्राणी संरक्षित वातावरण में रखे जाते हैं। मंत्री का यह दौरा पार्क के संरक्षण और विकास कार्यों को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
“वन्य जीवन संरक्षण हमारी जिम्मेदारी, नंदनवन को और समृद्ध बनाएंगे”— वन मंत्री
निरीक्षण के बाद मंत्री केदार कश्यप ने कहा—
“नंदनवन न केवल रायपुर का आकर्षण है, बल्कि जैव विविधता संरक्षण का महत्वपूर्ण केंद्र भी है। वन्य जीवन को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण देना हमारी जिम्मेदारी है।”
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पार्क में—
- स्वच्छता
- पशु-पक्षियों की स्वास्थ्य जांच
- समय पर भोजन
- तापमान नियंत्रण
- सुरक्षा व्यवस्था
जैसी मूलभूत सुविधाओं में कोई कमी नहीं होनी चाहिए।
पक्षी विहार में दुर्लभ पक्षियों का हाल जाना
मंत्री कश्यप ने नंदन पक्षी विहार में मौजूद विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों का निरीक्षण किया।
उन्हें बताया गया कि विहार में—
- मोर
- तीतर
- तोता
- हॉर्नबिल
- जलपक्षी
- अन्य दुर्लभ प्रजातियाँ
की देखरेख की जा रही है।
मंत्री ने पक्षियों के लिए बनाए गए प्राकृतिक आवास, चारा व्यवस्था और सुरक्षा पर संतोष व्यक्त किया।
वन्य प्राणियों के लिए बनाए गए बाड़ों का निरीक्षण
निरीक्षण के दौरान उन्होंने हिरण, सांभर, चीतल और अन्य प्राणियों के बाड़ों का जायजा लिया।
उन्होंने पाया कि—
- बाड़े साफ-सुथरे
- पशु स्वस्थ
- निगरानी टीम सक्रिय
- पानी और चारे की व्यवस्था पर्याप्त
अधिकारियों ने बताया कि गर्मी के मौसम के लिए विशेष पानी टैंक और शेड की व्यवस्था की गई है।
पर्यटकों के लिए सुविधाएँ बढ़ाने पर जोर
वन मंत्री ने कहा कि नंदनवन पर्यटकों के लिए एक आकर्षण स्थल है, इसलिए सुविधाओं को और उन्नत करना जरूरी है।
उन्होंने सुझाव दिया—
- पार्किंग और प्रवेश व्यवस्था बेहतर हो
- पर्यटकों को जानकारी देने वाले बोर्ड बढ़ाए जाएँ
- बच्चों के लिए नेचर लर्निंग कॉर्नर विकसित हो
- हरित क्षेत्रों में बैठने की व्यवस्था बढ़े
- आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया टीम रहे
उन्होंने कहा कि प्रकृति शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए नंदनवन स्कूलों के लिए एक शैक्षणिक केंद्र की तरह कार्य कर सकता है।
पशु-पक्षियों की चिकित्सा सुविधा पर निर्देश
मंत्री ने पार्क में उपलब्ध पशु चिकित्सा सेवाओं की भी समीक्षा की।
उन्होंने कहा—
- नियमित स्वास्थ्य जांच अनिवार्य
- बीमारी के लक्षण दिखने पर तुरंत कार्रवाई
- पशु आहार की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान
- चिकित्सा उपकरणों को अपडेट किया जाए
उन्होंने प्राणि चिकित्सकों से आग्रह किया कि वे आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धतियों का उपयोग कर वन्य प्राणियों की देखरेख को और बेहतर करें।
पार्क प्रबंधन से माँगा सुझाव
वन मंत्री ने प्रबंधन टीम से पार्क के विकास और संरक्षण से जुड़े सुझाव भी मांगे।
प्रबंधन टीम ने—
- नए बाड़ों का निर्माण
- पक्षियों की नई प्रजातियों का संरक्षण
- ग्रीन वॉक पाथ
- विस्तारित प्राकृतिक क्षेत्र
जैसी योजनाएँ प्रस्तुत कीं।
मंत्री ने इन प्रस्तावों का अध्ययन कर उनके कार्यान्वयन पर विचार करने का आश्वासन दिया।
बच्चों और युवाओं में प्रकृति जागरूकता बढ़ाने की योजना
वन मंत्री कश्यप ने कहा कि नंदनवन को प्रकृति शिक्षा का केंद्र बनाना चाहिए, ताकि—
- छात्र
- शोधकर्ता
- पर्यावरण प्रेमी
पार्क में आकर जैव विविधता और वन्य जीवन संरक्षण के बारे में प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर सकें।
उन्होंने कहा कि अगले महीनों में “नेचर अवेयरनेस प्रोग्राम” शुरू किए जाएंगे।
स्थानीय लोगों ने बताया— “नंदनवन परिवारों के लिए पसंदीदा स्थल”
स्थानीय आगंतुकों और परिवारों ने बताया कि नंदनवन में—
- साफ-सफाई
- प्राकृतिक वातावरण
- सुरक्षित वातावरण
- बच्चों के लिए आकर्षक स्थान
जैसी सुविधाएँ हैं, इसलिए यह परिवारों के लिए एक पसंदीदा वीकेंड डेस्टिनेशन बन गया है।
निरीक्षण के बाद अधिकारियों को मिले आवश्यक निर्देश
दौरे के अंत में वन मंत्री ने कहा कि नंदनवन और नंदन पक्षी विहार को और विकसित किया जाएगा।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया—
- रखरखाव में लापरवाही न हो
- हर महीने निगरानी रिपोर्ट दें
- पार्क के विस्तार प्रस्ताव तैयार करें
- पर्यटक सुविधा केंद्र स्थापित किया जाए








