रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोमवार को नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत राजधानी रायपुर के शैक्षणिक भ्रमण पर आए सुकमा जिले के सुदूरवर्ती ग्राम पंचायतों के 100 स्कूली बच्चों से आत्मीय मुलाकात की। विधानसभा परिसर में हुई इस मुलाकात में मुख्यमंत्री ने बच्चों से बातचीत कर उन्हें रायपुर भ्रमण की शुभकामनाएं दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
मुख्यमंत्री ने बच्चों को बताया “बस्तर के शेर”
मुख्यमंत्री साय ने बच्चों से संवाद के दौरान उन्हें “बस्तर के शेर” कहते हुए मुस्कराते हुए पूछा—”बस्तर के शेर बच्चों ने रायपुर के जंगल सफारी में शेर देखा या नहीं?” इस सवाल पर बच्चों सहित उपस्थित सभी लोगों ने ठहाके लगाकर हँसी जाहिर की। इस आत्मीय क्षण ने मुख्यमंत्री और बच्चों के बीच की दूरी को पाट दिया।
बस्तर के लिए सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता: मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बस्तर अंचल के हर बच्चे का भविष्य उज्ज्वल और सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने दोहराया कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएँ बस्तर के हर कोने तक पहुँचाने का कार्य तेजी से जारी है।
उन्होंने बच्चों से कहा कि रायपुर जैसे बड़े शहर का भ्रमण उन्हें नई सोच, नए अनुभव और नए अवसरों के प्रति प्रेरित करेगा। उन्होंने कहा, “आप सभी बच्चे आने वाले समय में बस्तर की नई दिशा और पहचान तय करेंगे।”
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में खुल रहे विकास के द्वार
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि राज्य सरकार द्वारा नक्सल प्रभावित सुदूर अंचलों में सुरक्षाबलों के कैंप स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे इन क्षेत्रों में अब चौतरफा विकास की शुरुआत हो रही है। उन्होंने कहा कि जहाँ-जहाँ सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हो रही है, वहाँ राशन दुकानों की स्थापना, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, और शिक्षा संस्थानों की सुविधा भी बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री ने यह भी विश्वास जताया कि निकट भविष्य में बस्तर पूरी तरह नक्सल मुक्त होगा और वहां का हर बच्चा निडर होकर शिक्षा व विकास की राह पर आगे बढ़ सकेगा।
आत्मनिर्भर बस्तर की दिशा में पहल
साय ने बताया कि सरकार का उद्देश्य केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि बस्तर के लोगों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना भी है। इसके लिए उन्हें दुग्ध उत्पादन, कृषि आधारित उद्योग, और स्थानीय रोजगार के नए साधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
सरकार चाहती है कि बस्तर के युवा अपनी पढ़ाई पूरी कर, स्थानीय स्तर पर ही रोजगार प्राप्त कर सकें, जिससे उन्हें बड़े शहरों की ओर पलायन न करना पड़े।
नियद नेल्लानार योजना: शैक्षणिक विकास की अनोखी पहल
इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों ने जानकारी दी कि नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत सुकमा जिले की पाँच सुदूर ग्राम पंचायतों — पालाचलमा, पोटकपल्ली, एलमागुंडा, ताड़मेटला और गोलापल्ली — के 100 स्कूली बच्चों को दो दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण के लिए रायपुर लाया गया है।
भ्रमण के दौरान बच्चों ने राज्य मंत्रालय, जंगल सफारी, रेलवे स्टेशन, और एयरपोर्ट जैसी जगहों का अवलोकन किया। यह योजना राज्य के नक्सल प्रभावित पाँच जिलों में चल रही है, जिसके तहत वहां के स्कूली बच्चों को शैक्षणिक व प्रेरणादायक भ्रमण का अवसर दिया जा रहा है।
जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस मुलाकात के दौरान उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, विधायक ईश्वर साहू और सुशांत शुक्ला भी उपस्थित रहे। सभी ने बच्चों को शुभकामनाएँ दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
निष्कर्ष
बस्तर अंचल के बच्चों के शैक्षणिक, मानसिक और सामाजिक विकास की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार का यह प्रयास एक सकारात्मक और दूरदर्शी कदम है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की आत्मीय मुलाकात ने यह संकेत दिया कि सरकार केवल योजनाएं बनाकर नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर बच्चों से जुड़कर उनके भविष्य की बुनियाद मजबूत कर रही है।
बस्तर के लिए शिक्षा और आत्मनिर्भरता की यह यात्रा आने वाले समय में राज्य की सामाजिक और आर्थिक तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभा सकती है।










