बाज़ार
लाइव भाव लोड हो रहे हैं…
देश

मिल गया अलादीन का चिराग! 50 अरब का काम 90 करोड़ में, भारत 700 साल तक रहेगा चकाचक

बेंगलुरु 

ईरान जंग की वजह से पूरी दुनिया में बेचैनी है. कच्चे तेल के दाम बढ़ने से हर तरफ महंगाई बढ़ रही है. अमेरिका से लेकर नेपाल तक हर मुल्क की जनता परेशान है. भारत भी इस जंग के असर से अछूता नहीं है. लेकिन, इस भारत के हाथ अलादीन का चिराग लग गया है. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी घोषणा की है. अगर सब कुछ ठीक रहा तो इस अलादीन के चिराग के दम पर भविष्य में भारत एक जगमगाता सितारा बन जाएगा. भारत को अरब देशों या रूस से तेल पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। 

दरअसल, हम बात कर रहे हैं फास्ट ब्रीडर न्यूक्लियर रिएक्टर की. कल्पक्कम में सोमवार को भारत ने इस टेक्नोलॉजी को हासिल करने की आधिकारिक घोषणा कर दी. फास्ट ब्रीडर न्यूक्लियर रिएक्टर एक बेहद जटिल टेक्नोलॉजी है. पश्चिमी देश इस तकनीक को हासिल करने में नाकाम रहे हैं. इस तकनीक वाले न्यूक्लियर रिएक्टर में यूरेनियम की जगह थोरियम का इस्तेमाल किया जाता है. और दुनिया के थोरियम भंडार का 25 फीसदी हिस्सा भारत में है. यानी इस तकनीक की बदौलत परमाणु बिजली के क्षेत्र में भारत की यूरेनियम पर निर्भरता खत्म हो जाएगी. भारत में यूरेनियम भंडार बहुत नगण्य है. इसके लिए भारत को रूस और ऑस्ट्रेलिया पर निर्भर रहना पड़ता है। 

फास्ट ब्रीडर न्यूक्लियर रिएक्टर और भारत का सफर
भारत ने फास्ट ब्रीडर न्यूक्लियर रिएक्टर की कल्पना 70 साल पहले की थी. जानेमाने वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा ने इस दिशा में काम शुरू किया था. तब से भारत इस तकनीक को हासिल करने में लगा था. दरअसल, दुनिया के सबसे अमीर छह देशों ने फास्ट ब्रीडर न्यूक्लियर रिएक्टर्स तकनीक हासिल करने पर 50 बिलियन डॉलर (लगभग 4.25 लाख करोड़ रुपये) खर्च कर चुके हैं. लेकिन, असफलता के कारण एक-एक करके सभी ने प्रोजेक्ट छोड़ दिए. इस तकनीक को विकसित करने के लिए अमेरिका ने 15 बिलियन, जापान ने 12 बिलियन, ब्रिटेन ने 8 बिलियन, जर्मनी ने 6 बिलियन डॉलर खर्च कर दिए. फ्रांस और इटली भी भाग खड़े हुए. सबने कहा कि यह तकनीक हासिल करना बहुत मुश्किल और बहुत महंगा है। 

विज्ञापन
Advertisement

लेकिन, भारत ने सिर्फ 90 करोड़ डॉलर (लगभग 7,700 करोड़ रुपये) में अपना पहला कमर्शियली वायबल प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर विकसित कर लिया. ऐसा करने वाला भारत, रूस और चीन के बाद तीसरा देश है. वर्ष 2004 में यह प्रोजेक्ट शुरू हुआ प्रोजेक्ट था. शुरुआती बजट 42 करोड़ डॉलर का था. अब 22 साल बाद दर्जनों बार डेडलाइन खत्म होने और लागत दोगुनी होने के बाद भारत के हाथ सफलता लगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे सिविल न्यूक्लियर के सफर में एक अहम कदम बताया है। 

भारत क्यों नहीं छोड़ा ये प्रोजेक्ट?
कारण बहुत सीधा है. भारत के पास दुनिया के यूरेनियम रिजर्व का सिर्फ 1-2 फीसदी भंडार है. ऐसे में 1.4 अरब लोगों वाले देश के लिए पारंपरिक न्यूक्लियर फ्यूल पर निर्भर रहना खुदकुशी करने जैसा है. दूसरी तरफ भारत के पास दुनिया के थोरियम रिजर्व का 25 फीसदी हिस्सा है. पृथ्वी पर किसी भी एक देश के पास इतना बड़ा भंडार नहीं है. परमाणु ऊर्जा विभाग के अनुसार, भारत में करीब एक करोड़ टन मोनाजाइट है, जिसमें 9,63,000 टन थोरियम ऑक्साइड भरा हुआ है. समस्या यह है कि थोरियम को यूरेनियम की तरह सीधे नहीं जलाया जा सकता. 1950 के दशक में डॉ. होमी भाभा ने इसी समस्या का हल निकाला. उन्होंने तीन चरणों वाला न्यूक्लियर प्रोग्राम बनाया। 

    पहला चरण: नेचुरल यूरेनियम को हेवी वाटर रिएक्टर्स में जलाओ, बाईप्रोडक्ट में प्लूटोनियम इकट्ठा करो। 

    दूसरा चरण: उस प्लूटोनियम को फास्ट ब्रीडर रिएक्टर में डालो. यहां रिएक्टर न सिर्फ ज्यादा प्लूटोनियम पैदा करेगा, बल्कि थोरियम को फिसाइल यूरेनियम-233 में बदल देगा। 

    तीसरा चरण: थोरियम को बड़े पैमाने पर जलाओ। 

कल्पक्कम का फास्ट ब्रीडर न्यूक्लियर रिएक्टर भारत को स्टेज-2 में ले आया है. भाभा के कागज पर बने प्लान के 70 साल बाद यह उपलब्धि हासिल हुई है। 

थोरियम का गणित
वर्तमान ऊर्जा खपत की दर से भारत के थोरियम रिजर्व देश को 700 साल से ज्यादा बिजली दे सकते हैं. जबकि ज्यादातर न्यूक्लियर देश यूरेनियम पर खेल रहे हैं, जिनके पास सिर्फ 80-100 साल का ईंधन बचा है. भारत पूरी तरह अलग गेम खेल रहा है. पश्चिमी देश इसलिए भागे क्योंकि यूरेनियम सस्ता मिलता रहा और सोडियम कूलेंट बहुत खतरनाक है. यह हवा के संपर्क में आते ही आग पकड़ लेता है और पानी के संपर्क में आते ही विस्फोट कर देता है. रूस के BN-600 में 1980-1997 के बीच 27 सोडियम लीक और 14 आग की घटनाएं घटीं. फिर भी रूस ने इसे नहीं छोड़ा. भारत ने सब देखा और आगे बढ़ता रहा. जब आपके पास यूरेनियम सिर्फ एक फीसदी हो और थोरियम 25 फीसदी तब इंजीनियरिंग की मुश्किलों का बहाना नहीं बना सकते है. यही बात भारत पर लागू होती है. इस प्रयोग में भारत को 700 साल की ऊर्जा सुरक्षा दिख रही है। 

चीन कहां है?
चीन भी थोरियम पर काम कर रहा है. उसने गोबी डेजर्ट में दो मेगावाट थोरियम मॉल्टन सॉल्ट रिएक्टर (TMSR-LF1) लगाया है. उसने 2023 में यह सफलता हासिल की. 2024 में थोरियम फ्यूल लोड किया और 2025 में थोरियम से यूरेनियम-233 ब्रिडिंग की सफलता हासिल की. चीन का लक्ष्य 2035 तक 100 मेगावाट डेमो रिएक्टर और 2040 तक कमर्शियल थोरियम रिएक्टर बनाने की है. लेकिन चीन अभी प्रयोगात्मक स्तर पर है, जबकि भारत ने 500 मेगावाट प्रोटोटाइप को विकसित कर लिया है. अगर चीन की तकनीक आगे बढ़ी तो भारत को फायदा होगा क्योंकि थोरियम की तकनीक में हम पहले से मजबूत हैं. लेकिन फिलहाल भारत ने स्टेज-2 में कदम रखकर दुनिया को दिखा दिया कि हम थोरियम के असली गेम प्लेयर हैं। 

आगे क्या?

 

Rana Sikander
लेखक / Author

Versatile journalist with experience in conducting in-depth interviews, analyzing complex data, and producing compelling narratives.

📱 वेब स्टोरीज़

सभी देखें →
पंकज त्रिपाठी: 'बीज बोने में लगा समय', 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' से पहले का सफर ▶ STORY पंकज त्रिपाठी: 'बीज बोने में लगा समय', 'गैंग्स ऑफ वासेपुर'… छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा क्रांति: CM साय के नेतृत्व में बदलती तस्वीर ▶ STORY छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा क्रांति: CM साय के नेतृत्व में… मुख्यमंत्री साय का फोकस— हर पात्र हितग्राही तक पहुंचे शासन की योजनाओं का लाभ ▶ STORY मुख्यमंत्री साय का फोकस— हर पात्र हितग्राही तक पहुंचे शासन… मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरगुजा की स्वास्थ्य सेवाओं को मिली नई मजबूती ▶ STORY मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरगुजा की स्वास्थ्य सेवाओं… जनकल्याणकारी योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करें : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ▶ STORY जनकल्याणकारी योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करें : मुख्यमंत्री विष्णुदेव… एमजीएम स्कूल में छात्रसंघ ने ली शपथ, पौधारोपण और सड़क सुरक्षा का दिया संदेश ▶ STORY एमजीएम स्कूल में छात्रसंघ ने ली शपथ, पौधारोपण और सड़क… इंदौर के सुमेध श्रीवास्तव ने वर्ल्ड यूथ स्किल्स में जीता रजत, भारत गौरवान्वित ▶ STORY इंदौर के सुमेध श्रीवास्तव ने वर्ल्ड यूथ स्किल्स में जीता… कैबिनेट के 7 बड़े फैसले: AI मिशन को 500 करोड़, औद्योगिक रोडमैप को मंजूरी ▶ STORY कैबिनेट के 7 बड़े फैसले: AI मिशन को 500 करोड़,… उत्तर छत्तीसगढ़ में भारी बारिश का अलर्ट जारी, 8 अगस्त से मिलेगी राहत ▶ STORY उत्तर छत्तीसगढ़ में भारी बारिश का अलर्ट जारी, 8 अगस्त… मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने माँ के नाम लगाया पीपल का पौधा, वन महोत्सव-2026 का शुभारंभ ▶ STORY मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने माँ के नाम लगाया पीपल का… मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में FRA और PESA टास्क फोर्स की पहली बैठक संपन्न ▶ STORY मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में FRA और PESA… ऑपरेशन निश्चय: खरोरा पुलिस ने 120 पौवा अवैध शराब के साथ तस्कर को दबोचा ▶ STORY ऑपरेशन निश्चय: खरोरा पुलिस ने 120 पौवा अवैध शराब के…