केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को पुणे में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल को प्रतिष्ठित ‘लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार’ से सम्मानित किया। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की 106वीं पुण्यतिथि पर आयोजित इस समारोह में शाह ने डोभाल के “निर्भीक” राष्ट्रवादी दृष्टिकोण की तुलना तिलक की दूरदर्शिता से करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति में उनके अतुलनीय योगदान की सराहना की।
पुरस्कार और शाह का संबोधन
अमित शाह ने अपने संबोधन की शुरुआत लोकमान्य तिलक को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए की, उन्हें एक “युग पुरुष” बताया जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा दी। शाह ने कहा कि तिलक महाराज ने ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है’ का उद्घोष कर करोड़ों भारतीयों के दिलों में स्वराज का मंत्र जगाया। यह पुरस्कार भारत की प्रगति और विकास में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है, और इसका उद्देश्य उन महान शख्सियतों का सम्मान करना है जिन्होंने राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शाह ने इस अवसर पर डोभाल की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि जब भी देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा का इतिहास लिखा जाएगा, तो अजीत डोभाल के लिए एक स्वर्णिम पृष्ठ आरक्षित रखना होगा, इसमें कोई संदेह नहीं है।
डोभाल की ‘निर्भीक’ भूमिका और उपलब्धियाँ
गृह मंत्री ने डोभाल की परिचालन उत्कृष्टता को तिलक की ऐतिहासिक निर्भीकता से जोड़ा। उन्होंने अजीत डोभाल को देश की सुरक्षा और विदेश नीति में उनके योगदान के लिए राष्ट्र के इतिहास में एक स्थायी स्थान दिलाने वाला व्यक्ति बताया। शाह ने अपने गुजरात के गृह मंत्री के कार्यकाल का एक किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि जब देश में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें अजीत डोभाल से सलाह लेने को कहा था। शाह ने याद किया कि डोभाल दोपहर में उनके घर आए थे और उन्होंने कुछ ऐसे महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जिनकी बदौलत गुजरात पुलिस ने न केवल अहमदाबाद बम धमाके, बल्कि देश भर के 13 बम धमाकों को एक साथ सुलझाया। शाह ने इस उपलब्धि को “बहुत बड़ी” बताया और कहा कि यह डोभाल की अद्वितीय विशेषज्ञता का प्रमाण है। यह घटना डोभाल की रणनीतिक सूझबूझ और उनकी समस्या-समाधान क्षमता को दर्शाती है, जो उन्हें भारत के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों में से एक बनाती है और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए उनके समर्पण को उजागर करती है।
लोकमान्य तिलक का स्मरण और विरासत
अमित शाह ने लोकमान्य तिलक के बहुआयामी व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने तिलक महाराज को एक महान शिक्षक, राष्ट्रीय शिक्षा के प्रबल समर्थक और एक प्रखर पत्रकार बताया। शाह ने कहा कि ‘केसरी’ अखबार में तिलक के लेख पढ़कर ही कोई यह अनुभव कर सकता है कि एक पत्रकार कितना निर्भीक हो सकता है। शाह ने तिलक को एक महान विचारक, कर्मयोगी और स्वतंत्रता संग्राम का एक बेजोड़ सूत्रधार बताया, जिन्होंने दुनिया के सामने भारत की आत्मा को अभिव्यक्त करने का काम किया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि तिलक ने गणपति और शिवाजी उत्सवों की शुरुआत “सांस्कृतिक राष्ट्रवाद” को जन्म देने के लिए की थी, एक ऐसा मार्ग जिस पर देश आज भी चल रहा है। तिलक का यह दृष्टिकोण आज भी भारतीय राजनीति और समाज में प्रासंगिक बना हुआ है, विशेषकर सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रवाद के संदर्भ में, जो देश की एकता और अखंडता को मजबूत करता है।
गृह मंत्री का अनुभव और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद
अमित शाह ने जोर देकर कहा कि अजीत डोभाल जैसे व्यक्तित्वों ने भारत की सुरक्षा ढांचे को मजबूत किया है, जबकि पिछली सरकारों में अक्सर “रीढ़ की कमी” देखी जाती थी, जिससे देश को सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने में मुश्किल होती थी। उन्होंने डोभाल की विशेषज्ञता को भारत की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने में महत्वपूर्ण बताया। शाह ने तिलक द्वारा शुरू किए गए गणपति और शिवाजी उत्सवों के माध्यम से सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की नींव रखने के महत्व पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि यह परंपरा आज भी देश को एक सूत्र में पिरोने का काम करती है और लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखती है। अमित शाह का यह संबोधन तिलक की विरासत और डोभाल के आधुनिक भारत की सुरक्षा में योगदान के बीच एक मजबूत वैचारिक सेतु स्थापित करता है, जो राष्ट्रवाद और सुरक्षा के साझा लक्ष्यों पर आधारित है। यह समारोह केवल एक पुरस्कार वितरण नहीं था, बल्कि भारतीय राष्ट्रवाद के दो विभिन्न युगों के नायकों के बीच एक वैचारिक संबंध स्थापित करने का प्रयास भी था, जिसमें वर्तमान की चुनौतियों का समाधान अतीत के आदर्शों में खोजा गया।





