राज्यपाल श्री रमेन डेका ने रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि कैग लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो वित्तीय पारदर्शिता और सुशासन सुनिश्चित करता है।
रायपुर। देश के संवैधानिक ढांचे और वित्तीय जवाबदेही को मजबूत करने के लिए नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी विषय पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में राज्यपाल श्री रमेन डेका ने संबोधित करते हुए कहा कि कैग लोकतंत्र की पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और सुशासन का आधार स्तंभ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कैग का कार्य सिर्फ ऑडिट करना नहीं है, बल्कि शासन को अधिक उत्तरदायी और जनहितकारी बनाने में मार्गदर्शन देना भी है।
कार्यक्रम का आयोजन
यह कार्यक्रम रायपुर स्थित एक प्रशासनिक संस्थान में आयोजित किया गया, जहाँ वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, वित्त विशेषज्ञ, विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि और छात्र उपस्थित थे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था—शासन व्यवस्था में कैग की भूमिका, उसकी संवैधानिक शक्तियाँ और उसके कार्यों के प्रभाव को समझना।
कैग की भूमिका क्यों सर्वोच्च?
राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि भारत का लोकतांत्रिक ढांचा तीन प्रमुख स्तंभों—विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका—पर आधारित है, लेकिन देश की वित्तीय ईमानदारी की रक्षा चौथा स्तंभ यानी CAG सुनिश्चित करता है। उनके अनुसार—
- कैग सार्वजनिक धन के उपयोग पर नजर रखता है।
- सरकारी विभागों के खातों और योजनाओं का ऑडिट कर अनियमितताओं की पहचान करता है।
- संसद और विधानसभाओं को निष्पक्ष रिपोर्ट उपलब्ध कराता है।
- वित्तीय पारदर्शिता और जिम्मेदारी सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण कड़ी है।
उन्होंने कहा कि यदि कैग स्वतंत्र और निष्पक्ष न रहे, तो लोकतंत्र की नींव कमजोर पड़ सकती है।
पारदर्शिता और जनहित का संतुलन
श्री डेका ने यह भी कहा कि कैग की रिपोर्टें सिर्फ आलोचना का दस्तावेज नहीं हैं, बल्कि वे प्रशासन को बेहतर ढंग से कार्य करने का अवसर भी प्रदान करती हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कई सरकारी योजनाएँ कैग की टिप्पणियों के बाद सुधार की दिशा में आगे बढ़ीं, जिससे जनहित में बेहतर परिणाम सामने आए।
उन्होंने यह भी बताया कि वित्तीय पारदर्शिता नागरिकों के विश्वास को मजबूत करती है तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बढ़ाती है।
युवाओं और प्रशासनिक अधिकारियों से अपील
अपने संबोधन में राज्यपाल ने युवा प्रशासनिक अधिकारियों और छात्रों से कहा कि वे कैग की रिपोर्टों को केवल “आलोचनात्मक दस्तावेज” के रूप में न देखें, बल्कि उन्हें सुशासन के अध्ययन और शोध का आधार बनाएं। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक वित्त प्रबंधन को समझने के लिए कैग की रिपोर्टें अनिवार्य साधन हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों को कैग की रिपोर्टों के आधार पर नीतियों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर शोध को बढ़ावा देना चाहिए।
कैग की स्वतंत्रता पर जोर
श्री डेका ने कहा कि कैग की स्वतंत्रता लोकतंत्र की आत्मा है। संविधान निर्माताओं ने इस संस्था को सुरक्षित और स्वायत्त बनाने के लिए विशेष प्रावधान किए हैं ताकि किसी भी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव का उस पर प्रभाव न पड़े।
उन्होंने कहा कि जिस देश में कैग स्वतंत्र है, वहाँ सार्वजनिक धन का दुरुपयोग रोकने की क्षमता स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है।
कार्यक्रम में विशेषज्ञों की राय
वित्त विशेषज्ञों ने कहा कि आज के समय में जब सरकारी व्यय और योजनाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है, कैग की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। तकनीकी बदलाव और डिजिटल भुगतान व्यवस्था के बढ़ने से ऑडिट के स्वरूप में भी बदलाव आ रहा है।
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि कैग को आधुनिक डेटा एनालिटिक्स और तकनीकी उपकरणों का प्रयोग बढ़ाना चाहिए ताकि ऑडिट प्रक्रिया और ज्यादा प्रभावी बन सके।
सुशासन और राष्ट्रीय विकास में कैग की भूमिका
राज्यपाल ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि कैग की रिपोर्टें सरकारों को जवाबदेह बनाती हैं और यह सुनिश्चित करती हैं कि देश का हर नागरिक अपने टैक्स के सही उपयोग को समझ सके। उन्होंने इसे “राष्ट्र के विकास की निरंतर निगरानी” बताया।
श्री डेका ने कहा कि कैग किसी भी सरकार का आलोचक नहीं, बल्कि संरक्षक है, जिसका उद्देश्य पारदर्शी और उत्तरदायी प्रशासन सुनिश्चित करना है।






