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छत्तीसगढ़

हाईकोर्ट का अहम फैसला: पत्नी को मिलेगा तलाक का अधिकार, भले ही वह मायके में रह रही हो

हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि वैध कारणों से मायके में रह रही पत्नी को भी तलाक का पूरा कानूनी अधिकार प्राप्त है।

रायपुर। वैवाहिक कानून से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि पत्नी वैध कारणों से अपने मायके में रह रही है, तो यह तथ्य उसे तलाक मांगने के अधिकार से वंचित नहीं करता। कोर्ट के इस निर्णय को महिलाओं के अधिकारों और वैवाहिक न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि विवाह केवल साथ रहने का नाम नहीं है, बल्कि इसमें सम्मान, सुरक्षा और भावनात्मक सहारा भी शामिल है। यदि पति की ओर से क्रूरता, उपेक्षा या मानसिक उत्पीड़न जैसे हालात उत्पन्न हो जाएं, तो पत्नी का अलग रहना स्वाभाविक और न्यायसंगत माना जाएगा।

क्या था मामला

मामले में पति ने यह तर्क दिया कि पत्नी लंबे समय से मायके में रह रही है, इसलिए उसे तलाक का अधिकार नहीं मिलना चाहिए। वहीं पत्नी की ओर से कहा गया कि पति के व्यवहार और पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उसके लिए ससुराल में रहना असंभव हो गया था।

हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

कोर्ट ने कहा कि केवल मायके में रहना पत्नी के खिलाफ आधार नहीं बन सकता। यदि यह साबित होता है कि पत्नी ने मजबूरी या प्रताड़ना के कारण ससुराल छोड़ा, तो उसे कानून के तहत संरक्षण और तलाक का अधिकार मिलेगा।

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महिलाओं के अधिकारों को मजबूती

न्यायालय ने अपने फैसले में यह भी कहा कि महिला को केवल सामाजिक दबाव या पारिवारिक परंपराओं के कारण असहनीय रिश्ते में रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। विवाह में गरिमा और आत्मसम्मान सर्वोपरि है।

वैवाहिक कानून की व्याख्या

कोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम के प्रावधानों की व्याख्या करते हुए कहा कि तलाक के मामलों में परिस्थितियों का समग्र मूल्यांकन जरूरी है, न कि केवल पति-पत्नी के अलग रहने के तथ्य को आधार बनाना।

भविष्य के मामलों पर असर

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए मिसाल बनेगा, जहां महिलाओं को मायके में रहने के कारण कानूनी अधिकारों से वंचित किया जाता रहा है।

सामाजिक दृष्टिकोण में बदलाव

इस फैसले से समाज में यह संदेश जाएगा कि विवाह में महिला की सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। न्यायालय का यह रुख महिलाओं को कानूनी रूप से सशक्त बनाता है।

न्याय की दिशा में कदम

हाईकोर्ट का यह निर्णय न केवल वैवाहिक कानून की स्पष्टता बढ़ाता है, बल्कि महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करते हुए न्यायसंगत समाज की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।


Heshma lahre
लेखक: Heshma lahre

Heshma lahre is a dedicated journalist at Dabang Awaz, known for her comprehensive coverage across all news categories, delivering accurate and timely reports with integrity.