विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन ने सोमवार को नई दिल्ली में अपनी महीनों बाद पहली औपचारिक बैठक की, जिसमें हालिया विधानसभा चुनावों में मिली हार और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए रणनीति पर मंथन किया गया। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अनुरोध पर बुलाई गई इस बैठक में 23 दलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जबकि कुछ प्रमुख सहयोगी दलों ने विभिन्न कारणों से इससे दूरी बनाए रखी, जिससे गठबंधन के भीतर की जटिलताएँ और चुनौतियाँ सामने आईं।
क्या हुआ
यह बैठक नई दिल्ली के संविधान क्लब ऑफ इंडिया में दोपहर 12 बजे शुरू हुई। यह INDIA गठबंधन का महीनों बाद पहला औपचारिक जमावड़ा था, जो ऐसे समय में हुआ जब विपक्षी गठबंधन को हालिया विधानसभा चुनावों में मिली हार का सामना करना पड़ा है। इन चुनावों में भाजपा ने पश्चिम बंगाल में पहली बार ऐतिहासिक जीत दर्ज की और असम में लगातार तीसरी बार सत्ता बरकरार रखी, जो 2029 में केंद्र में लगातार चौथी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रही है। बैठक का मुख्य उद्देश्य विपक्ष के हालिया चुनावी प्रदर्शन की समीक्षा करना और आगे की राजनीतिक चुनौतियों के लिए एक नई रणनीति तैयार करना था। तृणमूल कांग्रेस (TMC), जिसने पश्चिम बंगाल में 15 साल बाद सत्ता गंवाने के बाद आंतरिक असंतोष से जूझ रही है, ने इस बैठक को बुलाने का अनुरोध किया था। TMC के INDIA गठबंधन के साथ संबंध अस्थिर रहे हैं और उसने 2024 लोकसभा चुनाव पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र रूप से लड़ा था।
कौन शामिल, कौन बाहर
कांग्रेस नेता जयरम रमेश ने बैठक से पहले पुष्टि की कि 23 दल इसमें शामिल होंगे, हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि कुछ दलों ने “अपने कारणों से” इसमें भाग न लेने का फैसला किया है। रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा कि अनुपस्थित रहने वाले दलों ने भी नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों और कार्यों के प्रति “दृढ़ विरोध” व्यक्त किया है, जिसमें लाखों भारतीयों के मतदान के अधिकार को छीनना, संविधान पर दैनिक हमला करना, जाँच एजेंसियों के माध्यम से विपक्षी नेताओं पर हमला करना, आजीविका को नुकसान पहुँचाना, मुद्रास्फीति को बढ़ावा देना, युवाओं की आकांक्षाओं को कमजोर करना, निवेश के माहौल को खराब करना और विदेश नीति के माध्यम से राष्ट्रीय हितों से समझौता करना शामिल है। शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे, जो गठबंधन के भीतर एक प्रमुख सदस्य हैं, ने बैठक में वर्चुअली* भाग लिया।
गठबंधन के भीतर चुनौतियाँ
इस बैठक से कुछ प्रमुख दलों की अनुपस्थिति ने INDIA गठबंधन के भीतर की चुनौतियों को उजागर किया। द्रविड़ मुनेत्र कज़गम (DMK) ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि वह INDIA गठबंधन की बैठक से दूर रहेगी, जिसका कारण उसने कांग्रेस के “विश्वासघात” को बताया। यह निर्णय तमिलनाडु में एक बड़े राजनीतिक पुनर्गठन के बाद आया है, जहाँ कांग्रेस ने अपने लंबे समय से सहयोगी DMK से नाता तोड़कर अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कज़गम (TVK) के साथ हाथ मिलाया था। इस गठबंधन ने TVK को राज्य में सत्ता में आने में मदद की, जिससे DMK के एक कार्यकाल के बाद सत्ता से बेदखल कर दिया गया और दोनों दलों के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए। आम आदमी पार्टी (AAP) भी कथित तौर पर इस बैठक से दूर रही। इसके अलावा, बैठक पर एक और महत्वपूर्ण मुद्दा कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी (CPI-M) के बीच केरल विधानसभा चुनाव अभियान के दौरान की गई टिप्पणियों को लेकर विवाद का था। सीपीएम महासचिव एमए बेबी ने इस संबंध में कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे को स्पष्टीकरण मांगने के लिए पत्र लिखा था।
आगे की रणनीति
बैठक का मुख्य फोकस विपक्ष के हालिया चुनावी प्रदर्शन का गहन विश्लेषण और भविष्य की राजनीतिक चुनौतियों के लिए एक ठोस रणनीति तैयार करना था। गठबंधन के नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि एकजुट होकर ही वे भाजपा सरकार की नीतियों का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सकते हैं। आगामी चुनावों और जनता से जुड़े मुद्दों पर एक साझा न्यूनतम कार्यक्रम बनाने पर भी विचार-विमर्श किया गया। गठबंधन को न केवल बाहरी विरोधियों से बल्कि अपने आंतरिक मतभेदों और विश्वास की कमी से भी निपटना होगा। जयरम रमेश के अनुसार, अनुपस्थित दलों के बावजूद, विपक्ष नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ एकजुट है, लेकिन वास्तविक धरातल पर इस एकता को बनाए रखना और मजबूत करना एक बड़ी चुनौती होगी। बैठक ने गठबंधन को अपनी कमजोरियों और शक्तियों का आकलन करने का अवसर दिया, ताकि वे भविष्य में अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें।






