रायपुर में राज्यपाल डेका ने कहा कि नवाचार केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहकर समाज से जुड़ना चाहिए। उन्होंने शोध, तकनीक और स्टार्टअप्स को समाज-आधारित मॉडल अपनाने की सलाह दी।
रायपुर। रायपुर में आयोजित एक नवाचार एवं शोध-केंद्रित कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री विश्वभूषण डेका ने शिक्षा, अनुसंधान और तकनीकी विकास से जुड़े छात्रों, वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों को संबोधित करते हुए कहा कि नवाचार केवल प्रयोगशालाओं और कक्षाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे समाज की जरूरतों और वास्तविक समस्याओं से जोड़ना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि प्रयोगशालाओं में विकसित विचार तभी प्रभावी माने जाएंगे जब वे समाज में बदलाव लाएँ और आम लोगों के जीवन को सरल बनाएँ।
राज्यपाल ने कहा कि भारत तेजी से तकनीकी प्रगति के दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में छात्रों और शोधकर्ताओं की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे अपने ज्ञान का उपयोग समाज के लिए व्यवहारिक समाधान तैयार करने में करें।
“नवाचार तभी सफल जब वह लोगों के जीवन में उपयोगी बदलाव लाए” — राज्यपाल डेका
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा—
“नवाचार का मूल उद्देश्य समाज के लिए उपयोगी एवं सहज समाधान तैयार करना है। केवल सिद्धांतों तक सीमित नवाचार लंबे समय में प्रभावी नहीं रहते।”
उन्होंने बताया कि कई देशों की उन्नति का आधार उनका समाज-आधारित नवाचार मॉडल है, जो स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया जाता है।
राज्यपाल ने कहा कि—
- कृषि
- स्वास्थ्य
- पर्यावरण
- शिक्षा
- ग्रामीण विकास
- डिजिटल समावेशन
इन क्षेत्रों में छोटे-छोटे नवाचार भी बड़ा प्रभाव पैदा कर सकते हैं।
शोध, तकनीक और समाज का बेहतर समन्वय ही भविष्य
राज्यपाल डेका ने छात्रों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वे अपने शोध कार्यों को केवल रिपोर्ट या प्रोजेक्ट फाइल तक सीमित न रखें।
उन्होंने कहा कि—
- शोध का लाभ जनसमुदाय तक पहुँचना चाहिए
- तकनीक का उपयोग समाज की समस्याओं को हल करे
- शोध संस्थानों और उद्योग जगत का सहयोग बढ़ना चाहिए
- स्टार्टअप और नवाचार को ग्रामीण क्षेत्रों तक ले जाना चाहिए
उन्होंने कहा कि राज्यों की प्रगति में युवाओं की सोच, तकनीक और ऊर्जा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कृषि और ग्रामीण विकास के लिए नवाचार की आवश्यकता
राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक कृषि प्रधान राज्य है, इसलिए खेती-किसानी में तकनीकी नवाचार अत्यंत आवश्यक हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा—
- आधुनिक सिंचाई तकनीक
- कम लागत वाले कृषि उपकरण
- फसल रोगों की पहचान के डिजिटल समाधान
- स्थानीय उत्पादों की वैल्यू एडिशन तकनीक
इन नवाचारों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि शोधकर्ताओं को किसानों के साथ सीधा संवाद कर उनकी समस्याओं को समझना चाहिए, ताकि वास्तविक जरूरतों के अनुसार नवाचार तैयार हों।
स्टार्टअप और युवा उद्यमियों को दिया प्रोत्साहन
राज्यपाल डेका ने कहा कि युवा स्टार्टअप्स को समाज की आवश्यकताओं पर आधारित मॉडल विकसित करने चाहिए।
उन्होंने कहा—
- ग्रामीण नवाचार केंद्र स्थापित होने चाहिए
- महिला उद्यमियों के नवाचार को समर्थन मिलना चाहिए
- विश्वविद्यालयों में इनक्यूबेशन सेंटर सक्रिय रहने चाहिए
- स्टार्टअप्स को सरकारी योजनाओं से जोड़ना चाहिए
उन्होंने कहा कि स्थानीय समस्याओं के स्थानीय समाधान ही सबसे प्रभावी नवाचार होते हैं।
“शिक्षण संस्थानों का दायित्व: छात्रों में जिज्ञासा और प्रयोग की संस्कृति विकसित करें”
राज्यपाल ने शिक्षकों से कहा कि वे छात्रों में—
- समस्या समाधान क्षमता
- जिज्ञासा
- प्रयोग की संस्कृति
- वैज्ञानिक सोच
को बढ़ावा दें।
उन्होंने कहा कि शिक्षा तभी सार्थक है जब वह छात्रों को स्वतंत्र सोचने और सृजन करने का अवसर देती है।
डिजिटल युग में नवाचार की संभावनाएँ अनंत — राज्यपाल
कार्यक्रम में राज्यपाल ने डिजिटल युग में नवाचार की संभावनाओं का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि—
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
- इंटरनेट ऑफ थिंग्स
- मशीन लर्निंग
- डेटा एनालिटिक्स
जैसी तकनीकें समाज के हर क्षेत्र में बदलाव लाने की क्षमता रखती हैं।
उन्होंने युवाओं से कहा कि वे इन तकनीकों का जिम्मेदारीपूर्ण और रचनात्मक उपयोग करें।
कार्यक्रम में प्रदर्शनी, मॉडल और शोध पोस्टर का अवलोकन
पहले से तैयार नवाचार मॉडलों और शोध पोस्टरों की प्रदर्शनी लगाई गई थी।
राज्यपाल ने—
- छात्रों के प्रोजेक्ट
- तकनीकी मॉडल
- अनुसंधान प्रयोग
- सामाजिक नवाचार प्रस्ताव
का अवलोकन किया और उनकी सराहना की।
उन्होंने कहा कि युवा प्रतिभाएँ छत्तीसगढ़ के भविष्य की दिशा तय करेंगी।
समापन: नवाचार को समाज से जोड़ने का आह्वान
कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल डेका ने कहा कि नवाचार तभी सार्थक होगा जब वह—
- समाज की समस्याएँ हल करे
- युवाओं को अवसर दे
- देश की प्रगति में योगदान करे
- सामूहिक हित को प्राथमिकता दे
उन्होंने कहा—
“नवाचार को प्रयोगशाला से बाहर निकालकर समाज के बीच ले जाना समय की मांग है।”








