LIVE बुधवार, 13 मई 2026
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छत्तीसगढ़

जल संरक्षण, प्राकृतिक और जैविक खेती की ओर बढ़ना आवश्यक — राज्यपाल श्री डेका ने बताए सतत कृषि के नए आयाम

राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि जल संरक्षण, प्राकृतिक और जैविक खेती भविष्य के लिए आवश्यक है। किसानों से टिकाऊ कृषि पद्धतियाँ अपनाने का आह्वान किया।

रायपुर। राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि जल संरक्षण, प्राकृतिक खेती और जैविक कृषि की ओर बढ़ना आज की आवश्यकता ही नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए हमारी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने किसानों, कृषि विशेषज्ञों और युवाओं से अपील की कि वे खेती को केवल उत्पादन का माध्यम न मानकर इसे पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ जोड़कर देखें।

श्री डेका राजधानी में आयोजित एक कृषि उन्मुख कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे, जिसमें बड़ी संख्या में किसान, वैज्ञानिक, उद्यमी और कृषि संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था— आधुनिक लेकिन टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना, जल संकट से निपटने की रणनीतियों पर चर्चा करना और जैविक खेती को मुख्यधारा में लाना।


🌱 जल संरक्षण : खेती का आधार और भविष्य का सुरक्षा कवच

राज्यपाल ने कहा कि बदलते जलवायु और अनियमित वर्षा के बीच जल संरक्षण को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि—

  • खेत तालाब,
  • डबरी निर्माण,
  • वर्षा जल संचयन,
  • माइक्रो इरिगेशन (ड्रिप, स्प्रिंकलर),
  • और नालों के पुनर्जीवन

जैसे उपायों को हर स्तर पर अपनाना चाहिए।

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उन्होंने बताया कि कई जिलों में जल संरक्षण के कारण किसानों की उत्पादन क्षमता बढ़ी है तथा सिंचाई लागत में भारी कमी आई है।


🍀 प्राकृतिक और जैविक खेती : कम लागत, अधिक लाभ

राज्यपाल श्री डेका ने प्राकृतिक और जैविक खेती को किसानों के लिए लाभकारी बताया। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अधिक उपयोग से—

  • मिट्टी की सेहत खराब होती है,
  • उत्पादन की गुणवत्ता प्रभावित होती है,
  • और किसानों की लागत बढ़ती है।

इसके विपरीत गोबर, गौमूत्र, नीम, जीवामृत, घनजीवामृत जैसे जैविक उपायों से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और फसलें अधिक स्वास्थ्यवर्धक होती हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि जैविक उत्पादों की मार्केट डिमांड तेजी से बढ़ रही है, जिससे किसानों को अच्छा मूल्य मिलता है।


🧪 कृषि विज्ञान और परंपरा का समन्वय आवश्यक

श्री डेका ने जोर दिया कि कृषि को टिकाऊ बनाने के लिए वैज्ञानिक पद्धतियों और परंपरागत ज्ञान — दोनों का सहयोग आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि—

  • मिट्टी परीक्षण,
  • जल परीक्षण,
  • बीज शोधन,
  • फसल विविधीकरण,
  • और कीट प्रबंधन

जैसे उपाय किसानों को समझने चाहिए।
उन्होंने कृषि विश्वविद्यालयों से आग्रह किया कि वे गांवों में अधिक जागरूकता अभियान चलाएं।


👨‍🌾 किसानों की आय बढ़ाने में नई तकनीकों की भूमिका

राज्यपाल ने बताया कि ड्रोन तकनीक, सटीक कृषि (Precision Farming), फार्म मैनेजमेंट ऐप और सोलर पंप जैसी सुविधाओं ने खेती में नई ऊर्जा दी है।
उन्होंने युवाओं से अनुरोध किया कि वे कृषि को स्टार्टअप और उद्यमिता की दृष्टि से देखें।


🌍 पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी खेती — वैश्विक आवश्यकता

राज्यपाल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर किसान, हर नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है।
प्राकृतिक खेती और जल संरक्षण इन प्रयासों का आधार हैं।

उन्होंने बताया कि दुनिया में जैविक खेती का विस्तार तेजी से हो रहा है और भारत, विशेषकर छत्तीसगढ़, इस क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभा सकता है।


🌾 किसानों ने उठाए मुद्दे, मिला समाधान

कार्यक्रम के दौरान किसानों ने राज्यपाल के सामने—

  • लागत में बढ़ोतरी,
  • सिंचाई सुविधा,
  • बीज गुणवत्ता,
  • बाज़ार उपलब्धता
    जैसे मुद्दे रखे।

राज्यपाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को अधिक से अधिक योजनाओं का लाभ मिले और समस्याओं का समय पर समाधान हो।


📌 अंत में दिया संदेश

श्री डेका ने कहा कि कृषि केवल भोजन उत्पादन नहीं, बल्कि यह प्रकृति, समाज और अर्थव्यवस्था— तीनों को संतुलन देने का माध्यम है।
उन्होंने किसानों से अपील की—

“जल बचाएं, मिट्टी बचाएं और प्रकृति को अपनाएं—तभी खेती सुरक्षित और लाभकारी बनी रहेगी।”

कार्यक्रम का समापन किसानों, वैज्ञानिकों और स्वयंसेवी संस्थाओं के संयुक्त संकल्प के साथ हुआ कि वे टिकाऊ और प्राकृतिक खेती की दिशा में आगे बढ़ेंगे।


Heshma lahre
लेखक: Heshma lahre

Heshma lahre is a dedicated journalist at Dabang Awaz, known for her comprehensive coverage across all news categories, delivering accurate and timely reports with integrity.