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छत्तीसगढ़

‘नियद नेल्लानार योजना’ से दूरस्थ वनांचलों में पहुंची आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं, बढ़ी ग्रामीणों की उम्मीदें

दूरस्थ वनांचलों में ‘नियद नेल्लानार योजना’ के तहत आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचीं। मोबाइल मेडिकल यूनिट, टेलीमेडिसिन और मातृ-शिशु देखभाल ने ग्रामीणों को बड़ी राहत दी।

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संचालित ‘नियद नेल्लानार योजना’ अब राज्य के सबसे दूरस्थ और दुर्गम इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए जीवनरेखा साबित हो रही है। ग्रामीण और आदिवासी अंचलों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना ने कई ऐसे इलाकों में चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई हैं, जहाँ अभी तक डॉक्टर, एम्बुलेंस या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का पहुँचना बेहद कठिन माना जाता था।

राजधानी रायपुर से जारी सरकारी आंकड़ों व जमीनी रिपोर्टों के मुताबिक, नेल्लानार योजना ने स्वास्थ्य प्रणाली को सिर्फ मजबूत नहीं किया, बल्कि उन समुदायों के लिए उम्मीद की नई किरण जगाई है जो लंबे समय से बुनियादी मेडिकल सुविधाओं से वंचित रहे थे।

दूरस्थ अंचलों में पहली बार पहुँची विशेषज्ञ सेवाएं

राज्य सरकार ने वैन-आधारित मोबाइल मेडिकल यूनिट, पोर्टेबल डायग्नोस्टिक उपकरण, प्रशिक्षित मेडिकल टीम और आपातकालीन दवाइयों के साथ ऐसी व्यवस्था तैयार की है, जिसके जरिए स्वास्थ्य सेवाएं सीधे ग्रामीणों के दरवाजे तक पहुंच रही हैं। खास तौर पर बस्तर, सुकमा, बीजापुर, कांकेर और नारायणपुर जैसे जिलों में यह पहल ग्रामीणों के लिए जीवन बदलने वाली साबित हो रही है।

स्थानीय प्रशासन के अनुसार, कई गांव ऐसे थे जिनमें अब तक किसी डॉक्टर का नियमित दौरा नहीं हुआ था। लेकिन योजना के तहत अब मासिक और साप्ताहिक शिविर लगाए जा रहे हैं, जिनमें सामान्य स्वास्थ्य जांच, मातृ एवं शिशु देखभाल, टीकाकरण, रक्तचाप, मधुमेह, हीमोग्लोबिन और मलेरिया जैसी बीमारियों की जांच की जा रही है।

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मातृ-शिशु स्वास्थ्य में सुधार के संकेत

दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में मातृ-शिशु स्वास्थ्य हमेशा से चुनौती रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्रसव के दौरान मदद न मिलना, कुपोषण, एनीमिया और संक्रमण जैसी समस्याएं इन इलाकों में आम थीं।

लेकिन नेल्लानार योजना में शामिल ANC चेकअप, पोषण काउंसलिंग, महिलाओं के लिए विशेष स्वास्थ्य परामर्श और हाई-रिस्क प्रेगनेंसी मामलों की पहचान से काफी सकारात्मक बदलाव देखने मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि योजना ने संस्थागत प्रसव को भी बढ़ावा दिया है, क्योंकि प्राथमिक जांच के बाद जरूरत पड़ने पर गर्भवती महिलाओं को समय पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाया जा रहा है।

टेलीमेडिसिन ने बढ़ाई मेडिकल पहुंच

इस योजना की सबसे बड़ी ताकत टेलीमेडिसिन सुविधा है, जिसके माध्यम से मरीज सीधे रायपुर और जिला अस्पतालों के विशेषज्ञ doctors से वीडियो कॉल पर परामर्श ले पा रहे हैं।

कई मामलों में गांवों में मौजूद मेडिकल टीम ने गंभीर रोगों की पहचान कर मरीज को समय रहते हाई-लेवल अस्पतालों में रेफर किया है। विशेषज्ञ कहते हैं कि इस तकनीक ने मरीजों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

कुपोषित बच्चों के लिए विशेष अभियान

कुपोषण से जूझ रहे बच्चों के लिए भी योजना के तहत टीम गांव-गांव जाकर वजन और ऊंचाई की जांच कर रही है। जिन्हें जरूरत है, उन्हें न्यूट्रिशनल फूड पैक और प्रोटीन सप्लीमेंट भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। योजना की वजह से कई गांवों में कुपोषण दर में कमी दर्ज की जा रही है।

मलेरिया और अन्य संक्रमणों पर नियंत्रण में मदद

बस्तर और उसके आसपास के जंगल क्षेत्रों में मलेरिया लगातार एक बड़ी समस्या रहा है। लेकिन योजना के तहत रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (RDT) और दवा वितरण ने संक्रमण दर कम करने में मदद की है। टीम गांवों में जाकर लोगों को मच्छरदानी के इस्तेमाल और साफ-सफाई के लिए भी जागरूक कर रही है।

ग्रामीणों ने जताया आभार, बढ़ा भरोसा

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने पहली बार उनके गांवों तक नियमित चिकित्सकीय सेवाएं पहुंचाई हैं। कई लोगों ने बताया कि पहले मामूली बुखार, प्रसव या चोट के मामलों में भी कई किलोमीटर पैदल चलकर अस्पताल जाना पड़ता था, जिससे कई जानें जोखिम में पड़ती थीं।

अब मोबाइल मेडिकल यूनिट और नियमित शिविरों के कारण उनकी दिक्कतें काफी कम हुई हैं।

अधिकारियों का दावा: योजना करेगी स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नेल्लानार योजना सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने का माध्यम नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों को मुख्यधारा की मेडिकल प्रणाली से जोड़ने के लिए एक मजबूत मॉडल बन रही है।

उनके मुताबिक, आने वाले महीनों में इस योजना के तहत और भी दूरस्थ गांवों को जोड़ा जाएगा, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बढ़ेगा।

जमीनी हकीकत: चुनौतियां भी मौजूद

हालांकि योजना ने कई सकारात्मक परिणाम दिए हैं, फिर भी स्वास्थ्य कर्मियों की कमी, खराब सड़कें और नेटवर्क समस्याएं अभी बड़ी चुनौती हैं। लेकिन प्रशासन का कहना है कि इन बाधाओं को दूर करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

निष्कर्ष स्वरूप संकेत (बिना ‘निष्कर्ष’ शब्द):

नियद नेल्लानार योजना ने दूरस्थ ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाकर एक बड़ी सामाजिक जरूरत को पूरा किया है। बढ़ती पहुंच, टेलीमेडिसिन और मातृ-शिशु स्वास्थ्य में सुधार ने इस योजना को ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूत कड़ी बना दिया है।


Heshma lahre
लेखक: Heshma lahre

Heshma lahre is a dedicated journalist at Dabang Awaz, known for her comprehensive coverage across all news categories, delivering accurate and timely reports with integrity.