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छत्तीसगढ़

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज ‘छत्तीसगढ़ बांस तीर्थ संकल्पना सम्मेलन’ में होंगे शामिल, राज्य में बांस आधारित अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई दिशा

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज छत्तीसगढ़ बांस तीर्थ संकल्पना सम्मेलन में शामिल होंगे। बांस आधारित उद्योग, कारीगर विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने पर प्रमुख चर्चा होगी।

रायपुर । छत्तीसगढ़ में पहली बार बांस आधारित अर्थव्यवस्था को समर्पित ‘छत्तीसगढ़ बांस तीर्थ संकल्पना सम्मेलन’ आज आयोजित हो रहा है, जिसमें मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय प्रमुख रूप से शामिल होंगे। यह सम्मेलन राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, वन-आधारित उद्योगों और बांस उत्पादन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

राजधानी रायपुर से जारी जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री साय इस सम्मेलन में राज्य की बांस नीति, आदिवासी-आधारित उद्योगों के सशक्तिकरण और बांस उत्पादन बढ़ाने के लिए नई रणनीतियों पर चर्चा करेंगे। सम्मेलन में विशेषज्ञ, उद्यमी, नीति निर्माता, बांस उद्योग से जुड़े कारीगर और विभिन्न वन मंडलों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।


बांस को ‘ग्रीन गोल्ड’ के रूप में स्थापित करने की तैयारी

छत्तीसगढ़ लंबे समय से बांस उत्पादन में अग्रणी रहा है, लेकिन उसकी आर्थिक क्षमता का पूर्ण उपयोग अब भी बाकी है। सम्मेलन का उद्देश्य बांस को ‘ग्रीन गोल्ड’ के रूप में विकसित कर राज्य की अर्थव्यवस्था में बांस आधारित उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ाना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सही नीतियों और प्रशिक्षण के माध्यम से बांस आधारित उद्योग न सिर्फ रोजगार पैदा करेंगे, बल्कि वन क्षेत्रों में रहने वाले लाखों आदिवासी परिवारों को स्थायी आजीविका भी उपलब्ध करा सकते हैं।

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मुख्यमंत्री की मौजूदगी से बढ़ी उम्मीदें

मुख्यमंत्री साय लंबे समय से ग्रामीण व वनाधारित उद्योगों को मजबूत करने पर जोर देते रहे हैं। सम्मेलन के दौरान वे बांस प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और मार्केट लिंकिंग के लिए नई योजनाओं व संभावनाओं पर चर्चा करेंगे।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सम्मेलन में मुख्यमंत्री कुछ नीतिगत घोषणाएं भी कर सकते हैं, जिनका सीधा लाभ बांस कटाई, संग्रहण और उत्पाद निर्माण से जुड़े लोगों को मिलेगा।


देशभर के विशेषज्ञ साझा करेंगे अनुभव

इस आयोजन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि विभिन्न राज्यों के विशेषज्ञ और बांस तकनीक से जुड़े संस्थान अपने अनुभव और नवाचार साझा करेंगे। इससे छत्तीसगढ़ में बांस उद्योग की उन्नत तकनीकों को अपनाने का रास्ता खुलेगा।

सम्मेलन में बांस से बने उत्पादों—फर्नीचर, हैंडीक्राफ्ट, फ्लोरिंग, पेपर, चारकोल, एग्रो-उपकरण, कंस्ट्रक्शन मटेरियल आदि—की प्रदर्शनी भी आयोजित है, जिससे कारीगरों को नए बाजार और डिजाइन आइडिया मिलेंगे।


आदिवासी क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति में सुधार की संभावना

छत्तीसगढ़ के बस्तर, सरगुजा, कबीरधाम, गरियाबंद जैसे जिले बांस उत्पादन के प्रमुख केंद्र हैं। यहां बड़ी संख्या में वनवासी परिवार संग्रहण और कारीगरी पर निर्भर रहते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि राज्य में बांस का बड़े पैमाने पर वैज्ञानिक प्रबंधन, औद्योगिक प्रसंस्करण और ब्रांडिंग की व्यवस्था मजबूत होती है, तो यह आदिवासी परिवारों की आय में सीधा और स्थायी सुधार ला सकती है।


नई बांस नीति पर हो सकती है महत्वपूर्ण चर्चा

सरकारी सूत्रों के अनुसार, सम्मेलन के दौरान छत्तीसगढ़ की नई बांस नीति पर भी चर्चा की संभावना है। इसमें बांस उत्पादों को बढ़ावा देने, बांस आधारित MSME इकाइयों को प्रोत्साहन, प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना और विदेशी बाजारों तक पहुंच बढ़ाने संबंधी सुझाव शामिल हो सकते हैं।


बांस उद्योग में निवेश बढ़ाने की रणनीति

राज्य सरकार का फोकस घरेलू और विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने पर है। बांस से फर्नीचर, इको-फ्रेंडली निर्माण सामग्री और निर्यात योग्य उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।

उद्योग विभाग के अनुसार, यदि उचित निवेश और तकनीक उपलब्ध होती है, तो छत्तीसगढ़ देश में बांस आधारित उद्योगों का एक बड़ा हब बन सकता है।


बांस तीर्थ की अवधारणा—क्या है इसका अर्थ?

‘बांस तीर्थ’ की अवधारणा के तहत राज्य में एक ऐसा समग्र मॉडल विकसित करने की योजना है, जहां बांस उत्पादन, कारीगरी, प्रसंस्करण, डिजाइन, मार्केटिंग और प्रशिक्षण सभी एक साथ उपलब्ध हों।

इस मॉडल का उद्देश्य है—

  • उत्पादन बढ़ाना
  • कारीगरों को प्रशिक्षित करना
  • उत्पादों की गुणवत्ता सुधारना
  • बाजार से सीधा जुड़ाव सुनिश्चित करना

कारीगरों में बढ़ी उत्सुकता

सम्मेलन के दौरान बांस कारीगरों को नवीनतम तकनीकों का प्रदर्शन, डिजाइन प्रशिक्षण और मार्केटिंग एक्सपर्ट से सीधा संवाद करने का अवसर मिलेगा। कई स्थानीय कारीगरों ने उम्मीद जताई है कि इससे बांस उत्पादों की बिक्री और आय दोनों में बढ़ोतरी होगी।


छत्तीसगढ़ को मिल सकता है राष्ट्रीय पहचान का अवसर

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि छत्तीसगढ़ बांस उद्योग में संगठित मॉडल अपनाता है, तो राज्य आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी अलग पहचान बना सकता है।

यह सम्मेलन छत्तीसगढ़ को ‘बांस राजधानी’ या ‘बांस केंद्र’ के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


सार संकेत (बिना निष्कर्ष लिखे):

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सहभागिता वाले इस ‘बांस तीर्थ संकल्पना सम्मेलन’ से राज्य में बांस आधारित उद्योगों के विस्तार, कारीगरों के सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार की दिशा में ठोस पहल होने की उम्मीद है।


Heshma lahre
लेखक: Heshma lahre

Heshma lahre is a dedicated journalist at Dabang Awaz, known for her comprehensive coverage across all news categories, delivering accurate and timely reports with integrity.