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छत्तीसगढ़

बाल दिवस पर मंत्री वर्मा बने बच्चों के प्रेरणास्रोत — दृष्टि एवं श्रवण बाधितार्थ विद्यालय में जगाई आत्मविश्वास की लौ


बाल दिवस पर मंत्री वर्मा ने दृष्टि एवं श्रवण बाधितार्थ विद्यालय रायपुर में बच्चों से संवाद कर आत्मविश्वास जगाया और उनके उत्साह, प्रतिभा व संवेदनशीलता की सराहना की।


रायपुर। बाल दिवस के अवसर पर रायपुर स्थित दृष्टि एवं श्रवण बाधितार्थ विद्यालय में आयोजित विशेष कार्यक्रम में राज्य मंत्री श्री वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
उन्होंने बच्चों के साथ संवाद कर उन्हें आत्मविश्वास, प्रेरणा और सकारात्मक सोच का संदेश दिया।
यह आयोजन बच्चों की प्रतिभा, संवेदनशीलता और साहस को सम्मान देने वाला भावनात्मक और प्रेरणादायक अवसर बन गया।


🌺 बाल दिवस पर विशेष आयोजन

हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी बाल दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर में बच्चों के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
इसी क्रम में दृष्टि एवं श्रवण बाधितार्थ विद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम ने सभी का दिल जीत लिया।
यहाँ अध्ययनरत बच्चे अपनी चुनौतियों के बावजूद नृत्य, गीत, नाटक और हस्तकला प्रदर्शन में अद्भुत ऊर्जा और आत्मविश्वास के साथ शामिल हुए।

मंत्री वर्मा ने बच्चों के साथ मंच साझा करते हुए कहा —

“बाधाएं जीवन का अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत का अवसर हैं। आत्मविश्वास ही हर सपने को साकार करने की कुंजी है।”

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👦 बच्चों ने दिखाई अद्भुत प्रतिभा

विद्यालय के बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी कला, रचनात्मकता और भावनाओं की अभिव्यक्ति की।
कई बच्चों ने संकेत भाषा में देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए, जबकि कुछ ने ताल वाद्य यंत्रों पर लयबद्ध प्रदर्शन कर सभी को भावविभोर कर दिया।

मंत्री वर्मा और उपस्थित जनसमूह ने बच्चों की प्रस्तुतियों पर तालियाँ बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया।
उन्होंने कहा कि इन बच्चों की हिम्मत और जीवटता हम सबके लिए प्रेरणा का स्रोत है।


🏫 मंत्री वर्मा का प्रेरणादायक संबोधन

अपने संबोधन में मंत्री वर्मा ने कहा कि समाज को ऐसे बच्चों के प्रति संवेदनशील और सहयोगी दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
उन्होंने कहा —

“इन बच्चों की दुनिया रोशनी से नहीं, बल्कि उम्मीद और साहस से जगमगाती है। हमें इनकी क्षमताओं को पहचानकर इनके सपनों को पंख देना है।”

मंत्री ने विद्यालय प्रशासन को आश्वासन दिया कि सरकार दृष्टिबाधित और श्रवण बाधित विद्यार्थियों के लिए शिक्षा और रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराएगी।


🌿 बच्चों से आत्मीय संवाद

मंत्री वर्मा ने बच्चों के साथ व्यक्तिगत रूप से बातचीत की, उनके सपनों और रुचियों को समझा।
उन्होंने कुछ बच्चों के हाथों से बनाई गई पेंटिंग्स और हस्तनिर्मित वस्तुएँ भी देखीं और उन्हें “आशा और अभिव्यक्ति का प्रतीक” बताया।

एक दृष्टिबाधित छात्रा ने जब कहा कि वह भविष्य में अध्यापिका बनना चाहती है, तो मंत्री ने मुस्कुराते हुए कहा —

“तुम्हारा आत्मविश्वास ही तुम्हारी ताकत है, तुम जरूर सफल होगी।”

इस भावनात्मक संवाद ने पूरे सभागार में एक सकारात्मक ऊर्जा भर दी।


💡 आत्मविश्वास और स्वावलंबन का संदेश

मंत्री वर्मा ने अपने वक्तव्य में कहा कि बाल दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि यह याद दिलाता है कि हर बच्चा देश का भविष्य है
उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में कठिनाइयों से डरना नहीं, बल्कि उनका सामना मुस्कुराकर करना चाहिए।

उन्होंने विद्यालय प्रबंधन से कहा कि ऐसे विशेष विद्यालयों को आधुनिक संसाधनों और तकनीकी उपकरणों से सुसज्जित किया जाएगा, ताकि बच्चे स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बन सकें।


🏅 सम्मान और पुरस्कार वितरण

कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को प्रशस्ति पत्र, ट्रॉफी और अध्ययन सामग्री प्रदान की गई।
मंत्री वर्मा ने बच्चों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि “हर बच्चा समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा है, उसकी सफलता हम सबकी जिम्मेदारी है।”

विद्यालय की प्राचार्या ने कहा कि बच्चों की प्रगति में परिवार, शिक्षक और समाज — तीनों की भूमिका समान रूप से जरूरी है।


🕯️ भावनात्मक क्षण और उम्मीद की किरण

कार्यक्रम के दौरान एक श्रवण बाधित छात्र द्वारा बनाई गई सरदार पटेल की स्केच ने सबका ध्यान खींचा।
मंत्री वर्मा ने उस छात्र को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया और कहा कि “इस चित्र में जो शक्ति और शांति है, वही इन बच्चों के मन में बसी है।”

कार्यक्रम का समापन बच्चों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीत “हम होंगे कामयाब” से हुआ।
हालाँकि कई दर्शकों की आँखें नम थीं, लेकिन वातावरण में उम्मीद और आत्मबल की लहर दौड़ रही थी।


💬 मंत्री का समापन संदेश

मंत्री वर्मा ने कहा —

“बाल दिवस का असली अर्थ है — हर बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लाना।
ये बच्चे समाज की प्रेरणा हैं और हमें इनकी मुस्कान बनाए रखने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।”

उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार दृष्टि एवं श्रवण बाधित बच्चों के लिए समग्र विकास योजना तैयार कर रही है, जिससे उनकी शिक्षा, रोजगार और सामाजिक भागीदारी सुनिश्चित हो सके।


🌏 निष्कर्ष (संक्षेप में)

रायपुर का यह बाल दिवस कार्यक्रम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि संवेदना, आत्मविश्वास और समर्पण की कहानी बन गया।
मंत्री वर्मा ने बच्चों के बीच रहकर यह साबित किया कि नेतृत्व केवल शब्दों से नहीं, बल्कि भावनाओं से प्रेरित होता है।

दृष्टि एवं श्रवण बाधितार्थ विद्यालय के इन नन्हे सपनों ने यह सिखाया कि असली शक्ति शरीर में नहीं, मन और विश्वास में होती है।
इस बाल दिवस पर रायपुर ने सच में “आत्मविश्वास की लौ” को प्रज्वलित होते देखा।

Heshma lahre
लेखक: Heshma lahre

Heshma lahre is a dedicated journalist at Dabang Awaz, known for her comprehensive coverage across all news categories, delivering accurate and timely reports with integrity.