CM साय ने कहा कि गाइडलाइन दरों में बदलाव जनहित में है। सरकार जनता पर बोझ न पड़े इसलिए निर्णय में संशोधन किया गया। जनता–केन्द्रित शासन की मिसाल।
रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रदेश में जमीन की गाइडलाइन दरों में किए गए बदलाव पर महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा कि “असली सरकार वही होती है, जो जनहित के लिए अपने निर्णयों को भी बदलने का साहस रखती है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता की सुविधा और हित हमेशा सर्वोपरि हैं, और यदि किसी निर्णय से नागरिकों पर अनावश्यक बोझ पड़ता है, तो सरकार उसे पुनर्विचार कर बदलने में पीछे नहीं हटेगी।
गाइडलाइन दरों में संशोधन का बड़ा फैसला
प्रदेश में जमीन की गाइडलाइन दरों में प्रस्तावित बढ़ोतरी को लेकर लोगों में बढ़ती चिंताओं को देखते हुए सरकार ने पुनर्विचार का निर्णय लिया।
मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि—
- जनता की आर्थिक स्थिति
- बाजार की वास्तविक जरूरत
- विकास कार्यों पर प्रभाव
को ध्यान में रखते हुए गाइडलाइन दरों को व्यावहारिक और संतुलित बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि बढ़ी हुई दरों से आम नागरिक, किसान, मध्यमवर्ग और छोटे व्यवसायियों पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ना चाहिए।
जनता की प्रतिक्रिया और सुझावों का मिला प्रभाव
सरकार द्वारा दर बढ़ोतरी पर चर्चा शुरू होने के बाद—
- नागरिकों
- उद्योग संगठनों
- रियल एस्टेट सेक्टर
- किसानों
ने अपनी प्रतिक्रिया सरकार के सामने रखी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जन–प्रतिनिधि होने के नाते जनता की आवाज सुनना उनका कर्तव्य है और वही लोकतंत्र की असली शक्ति है।
CM साय ने कही संवेदनशील शासन की बात
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य राजस्व बढ़ाना जरूर है, पर यह जनता की परेशानियों को बढ़ाकर नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा:
- “जनहित सर्वोपरि है।”
- “सरकार जनता के हितों के संरक्षण के लिए संकल्पित है।”
- “भूल हो तो उसे सुधारना ही अच्छी शासन प्रणाली का संकेत है।”
उनके इस वक्तव्य को राजनीतिक और सामाजिक दोनों ही वर्गों में सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
रियल एस्टेट सेक्टर को मिली राहत
गाइडलाइन दर बढ़ने से संपत्ति पंजीयन में वृद्धि होने की संभावना थी, जिससे रियल एस्टेट सेक्टर को अतिरिक्त आर्थिक दबाव झेलना पड़ता।
सरकार के संशोधित निर्णय से—
- फ्लैट और प्लॉट खरीदने वालों
- बिल्डर्स
- डेवलपर्स
को राहत मिली है।
रियल एस्टेट संगठनों ने कहा कि यह निर्णय बाजार को स्थिर रखेगा और आम जनता के लिए खरीद आसान बनाएगा।
किसानों पर राहत का असर
गाइडलाइन दर बढ़ने से कृषि भूमि का मूल्य बढ़ जाता है, जिसका सीधा असर—
- कर्ज
- रजिस्ट्री शुल्क
- स्टांप शुल्क
पर पड़ता।
सरकार के संशोधन निर्णय से किसानों को अनावश्यक बोझ से राहत मिली है।
किसान संगठनों ने इसे स्वागत योग्य कदम बताया।
राज्य सरकार की नीति: जनता–केन्द्रित शासन
बीते कुछ महीनों में सरकार ने कई ऐसे फैसले लिए हैं जो सीधे जनता पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
गाइडलाइन दरों में संशोधन भी इन्हीं में से एक बड़ा निर्णय माना जा रहा है।
सरकार का कहना है कि विकास और जनता की सुविधा दोनों एक साथ चल सकते हैं, बस नीति संतुलित होनी चाहिए।
विपक्ष और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
विशेषज्ञों ने कहा कि यह निर्णय सरकार के व्यावहारिक और लचीले दृष्टिकोण को दर्शाता है।
कुछ राजनीतिक दलों ने कहा कि सरकार ने जनता की आवाज को महत्व देकर सही कदम उठाया है।
हालाँकि, यह भी सुझाया गया कि भविष्य में दरों में बदलाव से पहले व्यापक जन–परामर्श होना चाहिए।
समापन — जनता की भलाई ही सही शासन की पहचान
गाइडलाइन दरों में संशोधन पर मुख्यमंत्री साय की टिप्पणी ने स्पष्ट कर दिया कि सरकार जनता के हित में निर्णय लेने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि सरकार का हर निर्णय जनता की सुविधा और विकास को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।
यह कदम न केवल जनता के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि सरकार की संवेदनशील और उत्तरदायी छवि को भी मजबूत करता है।








