बस्तर दशहरा में बढ़ती भीड़ को देखते हुए रेलवे ने 6 जनसाधारण स्पेशल ट्रेनें चलाईं। लाखों श्रद्धालु और पर्यटक उत्सव का हिस्सा बनने बस्तर पहुंचे।
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ का बस्तर दशहरा उत्सव देशभर में अपनी अनूठी परंपराओं और भव्य आयोजन के लिए प्रसिद्ध है। इस वर्ष भी यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। बढ़ती यात्री संख्या को देखते हुए भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए 6 जनसाधारण स्पेशल ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया है। इन ट्रेनों का संचालन मुख्य रूप से बस्तर, रायपुर, दुर्ग, विशाखापट्टनम और आसपास के क्षेत्रों को जोड़ने वाले मार्गों पर किया जाएगा।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, हर साल बस्तर दशहरा में लाखों श्रद्धालु और सैलानी भाग लेते हैं। इस दौरान यातायात का दबाव इतना बढ़ जाता है कि नियमित ट्रेनें यात्रियों के बोझ को संभाल नहीं पातीं। इस वजह से विशेष व्यवस्था की जाती है ताकि लोग आसानी से यात्रा कर सकें और उत्सव का आनंद ले सकें।
बस्तर दशहरा का महत्व
बस्तर दशहरा केवल रावण दहन तक सीमित नहीं है। यह देश का सबसे लंबा चलने वाला उत्सव माना जाता है, जो करीब 75 दिनों तक चलता है। यहां मां दंतेश्वरी की आराधना, रथ यात्रा, मुरिया दरबार और विविध परंपरागत अनुष्ठान आयोजित होते हैं। इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए देश-विदेश से लोग आते हैं।
यह उत्सव बस्तर की आदिवासी संस्कृति, लोककला, लोकगीत, नृत्य और धार्मिक मान्यताओं का अद्भुत संगम है। यहां आने वाले पर्यटक आदिवासी जीवनशैली और संस्कृति को करीब से अनुभव करते हैं। यही वजह है कि दशहरे के दिनों में बस्तर क्षेत्र में पर्यटन का विशेष महत्व हो जाता है।
रेलवे की ओर से विशेष पहल
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे और पूर्व तटीय रेलवे ने मिलकर यात्रियों की सुविधा के लिए 6 विशेष ट्रेनों का संचालन करने की घोषणा की है। इनमें रायपुर से जगदलपुर, दुर्ग से जगदलपुर और विशाखापट्टनम से जगदलपुर के बीच चलने वाली ट्रेनें शामिल हैं।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इन विशेष ट्रेनों में सामान्य कोच की संख्या बढ़ाई गई है, ताकि ज्यादा से ज्यादा यात्रियों को किफायती दरों पर यात्रा करने का अवसर मिले।
रेलवे ने यह भी बताया कि इन ट्रेनों में स्वच्छता और सुरक्षा की विशेष व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, प्लेटफॉर्म पर भीड़ नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त स्टाफ की ड्यूटी लगाई गई है।
यात्रियों की बढ़ती संख्या
बस्तर दशहरे के दौरान यात्री संख्या में हर साल भारी इजाफा होता है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार लगभग 3 से 4 लाख लोग विभिन्न शहरों और राज्यों से बस्तर पहुंच सकते हैं।
छत्तीसगढ़ के अलावा ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं। इस वजह से सड़क और रेल दोनों ही मार्गों पर यातायात का दबाव बढ़ जाता है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल
दशहरे के दौरान बस्तर में लगने वाले मेले और सांस्कृतिक आयोजनों से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। हस्तशिल्प, बांस और धातु कला की वस्तुएं, पारंपरिक परिधान और स्थानीय खानपान की चीजें बड़ी संख्या में बिकती हैं।
स्थानीय व्यापारी और कारीगरों के अनुसार, इस अवधि में उनकी आमदनी कई गुना बढ़ जाती है। पर्यटन से होटल व्यवसाय, ट्रांसपोर्ट और अन्य सेवाओं को भी लाभ होता है।
प्रशासन की तैयारियां
यात्रियों और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए जिला प्रशासन ने भी विशेष इंतजाम किए हैं। पुलिस और सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई है। यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए ट्रैफिक पुलिस को विशेष निर्देश दिए गए हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूत किया गया है। मेले के दौरान मोबाइल मेडिकल यूनिट और एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है।
श्रद्धालुओं का उत्साह
जगदलपुर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। कई लोगों का कहना है कि बस्तर दशहरा केवल धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक अनुभव भी प्रदान करता है।
विशाखापट्टनम से आए एक श्रद्धालु ने बताया कि वह हर साल अपने परिवार के साथ बस्तर दशहरा में शामिल होते हैं क्योंकि यहां की परंपराएं उन्हें अपनी ओर आकर्षित करती हैं।
निष्कर्ष
रेलवे द्वारा चलाई गई 6 जनसाधारण स्पेशल ट्रेनें निश्चित रूप से यात्रियों के लिए राहत लेकर आई हैं। यह कदम न केवल भीड़ प्रबंधन में सहायक होगा बल्कि श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए यात्रा को सुगम बनाएगा। बस्तर दशहरा की भव्यता और इसकी सांस्कृतिक धरोहर आने वाले दिनों में और ज्यादा लोगों को आकर्षित करेगी।








