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छत्तीसगढ़

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 20 नवंबर को अंबिकापुर में होंगी शामिल — जनजातीय गौरव दिवस पर होगा ऐतिहासिक आयोजन

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 20 नवंबर को अंबिकापुर में जनजातीय गौरव दिवस समारोह में शामिल होंगी। कार्यक्रम में आदिवासी संस्कृति, विकास योजनाएँ और परंपराएँ होंगी केंद्र में।

रायपुर। छत्तीसगढ़ की भूमि एक बार फिर ऐतिहासिक अवसर की साक्षी बनेगी जब भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु 20 नवंबर को अंबिकापुर पहुँचेंगी। यहाँ आयोजित होने वाले जनजातीय गौरव दिवस के राज्य स्तरीय समारोह में वे मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। यह अवसर न केवल छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण होगा, बल्कि आदिवासी संस्कृति, परंपरा और स्वाभिमान के उत्सव का प्रतीक भी बनेगा।


आदिवासी नायकों के योगदान को किया जाएगा याद

जनजातीय गौरव दिवस की शुरुआत देशभर में भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के उपलक्ष्य में की गई थी। इस दिन देश भर में आदिवासी समाज के महान वीरों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को श्रद्धांजलि दी जाती है।
अंबिकापुर में आयोजित होने वाले इस वर्ष के समारोह में राष्ट्रपति मुर्मु आदिवासी समुदाय के ऐतिहासिक योगदान को सम्मानित करने के साथ ही विभिन्न योजनाओं का शुभारंभ भी करेंगी।

राज्य सरकार ने कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर व्यापक स्तर पर इंतजाम किए हैं। अंबिकापुर शहर को इस अवसर पर पारंपरिक झांकियों, लोककला प्रदर्शनों और जनजातीय शिल्प की सजावट से सजाया जा रहा है।


राज्यपाल और मुख्यमंत्री करेंगे स्वागत

राष्ट्रपति मुर्मु के स्वागत के लिए छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय स्वयं उपस्थित रहेंगे।
कार्यक्रम में राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री, सांसद, विधायक, और हज़ारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल होंगे।

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सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति मुर्मु इस अवसर पर राज्य में जनजातीय कल्याण और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी कई नई पहल की घोषणा कर सकती हैं।


जनजातीय गौरव दिवस — एक सांस्कृतिक उत्सव

अंबिकापुर के गांधी मैदान में आयोजित होने वाले इस समारोह में छत्तीसगढ़ की जनजातीय परंपराएँ, लोकनृत्य, संगीत और हस्तशिल्प कला का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।
कार्यक्रम के दौरान राज्य के विभिन्न जिलों से आए जनजातीय कलाकार “सैल, रौत नाचा, पंथी नृत्य” जैसी प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदेश की समृद्ध लोकसंस्कृति को प्रदर्शित करेंगे।

राज्य संस्कृति विभाग के अनुसार, राष्ट्रपति मुर्मु का आगमन जनजातीय समुदाय के लिए प्रेरणादायक होगा।
यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आदिवासी पहचान, संस्कृति और गौरव का उत्सव है।


आदिवासी विकास योजनाओं का शुभारंभ

राष्ट्रपति मुर्मु इस अवसर पर राज्य में जनजातीय क्षेत्रों के विकास से जुड़ी कई योजनाओं का शुभारंभ करेंगी। इनमें शामिल हो सकती हैं —

  • जनजातीय छात्रावासों का विस्तार कार्यक्रम
  • वन अधिकार पत्र वितरण अभियान का नया चरण
  • महिला समूहों के लिए आजीविका मिशन सहायता योजना
  • ‘मोर जंगल, मोर विकास’ पहल

इन योजनाओं के माध्यम से सरकार का उद्देश्य है कि जनजातीय समाज की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को मजबूत किया जाए तथा उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा जाए।


छत्तीसगढ़ में जनजातीय गौरव का महत्व

छत्तीसगढ़ में कुल आबादी का लगभग 31 प्रतिशत हिस्सा जनजातीय समुदाय का है। बस्तर, सरगुजा, कोरिया, कांकेर, कोरबा, जशपुर जैसे जिले जनजातीय संस्कृति के केंद्र हैं।
राज्य सरकार ने इन क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी ढाँचे के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार किए हैं।

राष्ट्रपति मुर्मु स्वयं एक जनजातीय समुदाय से आने वाली भारत की पहली महिला राष्ट्रपति हैं।
उनकी उपस्थिति इस आयोजन को विशेष महत्व देती है, क्योंकि वे देश के करोड़ों आदिवासियों के आत्मगौरव और सशक्तिकरण की प्रतीक हैं।


आदिवासी स्वाभिमान और एकता का संदेश

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधि राष्ट्रपति मुर्मु का पारंपरिक स्वागत करेंगे।
मंच पर उन्हें पारंपरिक “चेरोई,” “पगड़ी,” और “धारदार तीर-कमान” भेंट कर आदर प्रकट किया जाएगा।

राष्ट्रपति अपने संबोधन में आदिवासी युवाओं से शिक्षा और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान कर सकती हैं।
उनका संदेश समाज में “विकास के साथ संस्कृति के संरक्षण” का संतुलन बनाए रखने पर केंद्रित रहेगा।


सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियाँ पूर्ण

कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी की गई है।
रायपुर से लेकर अंबिकापुर तक राष्ट्रपति के आगमन मार्ग की निगरानी के लिए विशेष सुरक्षा दल तैनात किए गए हैं।
मुख्य मंच के आसपास सीसीटीवी कैमरे, कंट्रोल रूम और मेडिकल टीमें सक्रिय रहेंगी।

अंबिकापुर नगर निगम ने सड़कों, पार्कों और मुख्य स्थलों को आकर्षक रूप से सजाने की तैयारी पूरी कर ली है।


जनता में उत्साह का माहौल

अंबिकापुर और आसपास के जिलों में राष्ट्रपति के आगमन को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है।
विद्यालयों और महाविद्यालयों में जनजातीय गौरव दिवस से संबंधित निबंध, चित्रकला और सांस्कृतिक प्रतियोगिताएँ आयोजित की जा रही हैं।

स्थानीय जनजातीय समाज के प्रतिनिधि इसे “नई चेतना और आत्मगौरव का पर्व” मान रहे हैं।
उनका कहना है कि राष्ट्रपति का आगमन यह संदेश देगा कि आदिवासी समाज अब केवल इतिहास नहीं, बल्कि भारत के भविष्य का सक्रिय निर्माता है।


राज्य सरकार की पहल

छत्तीसगढ़ सरकार ने घोषणा की है कि जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर राज्य के सभी स्कूलों और कार्यालयों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि —

“यह दिन हमें हमारे आदिवासी नायकों के बलिदान और योगदान की याद दिलाता है। छत्तीसगढ़ की पहचान ही उसकी विविधता और एकता में निहित है।”


समापन संदेश

राष्ट्रपति मुर्मु का यह दौरा न केवल एक राजकीय कार्यक्रम है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की जनजातीय आत्मा और संस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने का अवसर भी है।
अंबिकापुर में होने वाला यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा कि संस्कृति, सम्मान और स्वाभिमान किसी समाज की सबसे बड़ी पूंजी है।



Heshma lahre
लेखक: Heshma lahre

Heshma lahre is a dedicated journalist at Dabang Awaz, known for her comprehensive coverage across all news categories, delivering accurate and timely reports with integrity.